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बंगलादेश में पौधा लगाते संत पापा बंगलादेश में पौधा लगाते संत पापा  (AFP or licensors)

आम घर के लिए प्रार्थना में एक होने हेतु संत पापा का निमंत्रण

1 सितम्बर सृष्टि की देखभाल हेतु विश्व प्रार्थना दिवस के अवसर पर, संत पापा फ्राँसिस ने सभी लोगों को निमंत्रण दिया है कि हम सृष्टि की देखभाल हेतु प्रार्थना करें। उन्होंने उन सभी लोगों को धन्यवाद दिया जिन्होंने इस अवसर पर विभिन्न प्रयासों की शुरूआत की है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

संत पापा ने 1 सितम्बर को एक संदेश प्रकाशित कर कहा, "प्रार्थना के इस दिवस में, मैं सर्वप्रथम प्रभु को हमारे आम घर के लिए धन्यवाद देता हूँ तथा भली इच्छा रखने वाले उन सभी लोगों को भी जो इसकी रक्षा के लिए समर्पित हैं।" संत पापा ने उन लोगों के प्रति भी आभार प्रकट किया जो कई परियोजनाओं के द्वारा पर्यावरण की रक्षा एवं उसपर अध्ययन को प्रोत्साहन देते हैं।

सृष्टि की देखभाल हेतु विश्व प्रार्थना दिवस

कुस्तुनतुनिया के ग्रीक ऑर्थोडोक्स प्राधिधर्माध्यक्ष दिमित्रोस ने सन् 1989 में 1 सितम्बर को सृष्टि की देखभाल हेतु विश्व प्रार्थना दिवस घोषित किया था जिसके पश्चात् सन् 2001 में यूरोप के अन्य खीस्तीय समुदायों ने तथा 2015 में संत पापा फ्राँसिस ने भी इसे प्रार्थना दिवस घोषित किया। यह पहली बार है जब सृष्टि की देखभाल हेतु विश्व प्रार्थना दिवस के अवसर पर असीसी में ख्रीस्तीय एकता प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया है। संत पापा ने बुधवार को आमदर्शन समारोह के दौरान कहा था, "मैं उन आयोजनों के लिए आभारी हूँ जिनको विभिन्न कलीसियाओं, धर्मसमाजी संस्थाओं एवं कलीसियाई संगठनों द्वारा कई स्थानों में आयोजित किया गया है।" संत पापा ने सभी को निमंत्रण दिया था कि हम हमारे आमघर की देखभाल हेतु शनिवार को प्रार्थना में एकजुट हों।

पानी का सवाल

संत पापा ने संदेश में जल की ओर ध्यान खींचते हुए कहा, "सृष्टि की देखभाल हेतु विश्व प्रार्थना दिवस के अवसर पर जिसको काथलिक कलीसिया, ऑर्थोडोक्स कलीसिया के भाई-बहनों एवं अन्य ख्रीस्तीय समुदायों के साथ कई सालों से मना रही है, मैं जल के सवाल पर ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूँ। यह एक साधारण एवं बहुमूल्य तत्व है किन्तु इसे प्राप्त करना, कई लोगों के लिए कठिन है जबकि सुरक्षित पेयजल को प्राप्त करना एक मौलिक एवं वैश्विक मानव अधिकार है। यह मानव अस्तित्व के लिए आवश्यक है। हमारी दुनिया उन गरीबों के प्रति ऋणी है जिनके पास पीने के पानी की पहुंच नहीं है क्योंकि उन्हें अपने अविच्छेद्य गरिमा के अनुरूप जीवन के अधिकार से वंचित कर दिया गया है।"

हमारे जीवन में जल का महत्व

जल हमारे उद्गम पर चिंतन करने हेतु प्रेरित करता है। मानव शरीर के अधिकांश भाग में जल है और इतिहास में कई सभ्यताएँ नदी के किनारे विकसित हुईं जो उन्हें पहचान दिलायीं। उत्पति ग्रंथ बतलाता है कि आरम्भ में ईश्वर का आत्मा सृष्टि पर विचरता था। (उत्प.1:2)”

संत पापा ने कहा कि सृष्टि एवं मानव के विकास में जल की आधारभूत भूमिका है। उन्होंने जल के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हुए कहा कि जीवन के लिए जल के समान सरल और उपयोगी चीज हमारे ग्रह पर और कुछ नहीं है। यही कारण है कि जल स्रोतों एवं जलाशयों की रक्षा अत्यधिक अनिवार्य है। आज, पहले से कहीं ज्यादा, हमें उसकी तत्काल चिंताओं से परे देखना होगा, वास्तविकता की एक पूरी तरह से उपयोगितावादी दृष्टिकोण से परे, जिसमें दक्षता और उत्पादकता हर तरह से हमारे व्यक्तिगत लाभ के लिए तैयार की जाती है।" आज हमें ऐसी परियोजनाओं एवं ठोस कार्यों को पहचानने की आवश्यकता है जिसमें मानव अधिकार की कीमत पर, हर स्वच्छ जल का निजीकरण अस्वीकार्य है।

जल का ख्रीस्तीय दृष्टिकोण

संत पापा ने जल के ख्रीस्तीय दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह शुद्धिकरण में जीवन के लिए महत्वपूर्ण तत्व है। बपतिस्मा संस्कार में इसका प्रयोग होता है जो पुनः जन्म लेने का संस्कार है। पवित्र आत्मा से जल के शुद्धिकरण द्वारा ईश्वर ने हमें नया जीवन एवं नवीनता प्रदान की है। यह अमर जीवन का स्रोत है। विभिन्न ख्रीस्तीय समुदायों के लिए बपतिस्मा संस्कार पूर्ण एकता के रास्ते पर प्रस्थान का अपरिवर्तनीय बिंदु माना जाता है। येसु ने अपनी प्रेरिताई के दौरान एक ऐसे जल की प्रतिज्ञा की थी जो मानव की प्यास को हमेशा के लिए बुझा सकता है। येसु से जल पीने का अर्थ है उनसे व्यक्तिगत मुलाकात करना तथा उनके शब्दों में जीवन का अर्थ पाना। येसु ने क्रूस के ऊपर से कहा था, मैं प्यासा हूँ जो निरंतर हमारे हृदयों में गूँजता है, वे हमें अब भी उस प्यास को बुझाने की मांग करते हैं क्योंकि वे प्रेम के प्यासे हैं। येसु उन सभी लोगों की प्यास बुझाने का निमंत्रण देते हैं जो हमारे समय में प्रेम के प्यासे हैं। जब मैं प्यासा था तुमने मुझे पिलाया। इस वैश्विक गाँव में पीने का जल प्रदान करने का अर्थ न केवल परोपकार के कार्य हैं किन्तु जल को स्वच्छ बनाये रखने के लिए ठोस निर्णय तथा सतत् प्रतिबद्धता सुनिश्चित करना भी है।

विभिन्न लोगों के लिए प्रार्थना का आह्वान

संत पापा ने प्रार्थना का आह्वान किया ताकि जल लोगों के बीच विभाजन का कारण न बने बल्कि उन्हें एक साथ लाये। उन्होंने समुद्र में काम करने वालों के लिए प्रार्थना की मांग की जो उसके सुरक्षित भविष्य के लिए अपना जीवन दाँव पर लगाते हैं। संत पापा ने राजनीतिक नेताओं के लिए भी प्रार्थना की ताकि वे आप्रवासी, जलवायु परिवर्तन तथा मौलिक वस्तुओं के अधिकारों से वंचित लोगों के प्रति उदार, जिम्मेदार एवं सहयोग की भावना को अपना सकें। फिर उन्होंने सागर की प्रेरिताई से संलग्न लोगों के लिए प्रार्थना की।

युवाओं के लिए प्रार्थना

संदेश के अंत में उन्होंने युवा पीढ़ी की याद करते हुए उनके लिए प्रार्थना का आह्वान किया ताकि वे आम घर के प्रति विवेक और सम्मान की भावना में बढ़ सकें तथा सभी की भलाई के लिए जल के समान महत्वपूर्ण तत्वों की रक्षा की चाह रख सकें। संत पापा ने आशा व्यक्त की कि सभी ख्रीस्तीय अपने प्रार्थनामय सहयोग द्वारा सृष्टिकर्ता के प्रति सम्मान की भावना में बढ़ सकेंगे, खासकर, नदी, सागर एवं महासागरों के उपहार के लिए। 

01 September 2018, 15:08