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पलेरमो में मिस्सा बलिदान के दौरान संत पापा पलेरमो में मिस्सा बलिदान के दौरान संत पापा  (AFP or licensors)

पलेरमो में संत पापा का मिस्सा बलिदान

संत पापा फ्रांसिस ने धन्य पीनो पुलीसी की 25वीं शहादत के अवसर पर पलेरमो में मिस्सा बलिदान अर्पित करते हुए मानव जीवन के चुनाव पर प्रवचन दिया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 15 सितम्बर 18 (रेई) संत पापा फ्रांसिस ने पलेरामो की अपने एकदिवासीय प्रेरितिक यात्रा के दौरान धन्य पीनो पुलीसी की 25वीं शहादत के अवसर पर मिस्सा बलिदान अर्पित किया।

उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि आज ईश्वर हमें विजय और पराजय के बारे में कहते हैं। प्रथम पाठ में संत योहन हमें विश्वास को “विजय के रुप में प्रस्तुत करते हैं जो विश्व में विजयी होता है।” जबकि सुसमाचार येसु हमें कहते हैं “जो अपने जीवन से प्रेम करता है वह उसे खो देता है।” (यो.12.25)

जीवन की हार

संत पापा ने कहा कि जो अपने जीवन से प्रेम करता है वह उसे खो देता है इसका अर्थ यह नहीं कि हमें अपने जीवन से घृणा करना चाहिए वरन् हमें अपने जीवन से प्रेम करते हुए उसकी सुरक्षा करनी चाहिए क्योंकि यह हमारे लिए ईश्वर का प्रथम उपहार है। हमारे जीवन में हार तब होती है जब हम सिर्फ अपने आप से प्रेम करते हैं। वे जो सिर्फ अपने लिए जीते हैं अपनी सफलता की चाह रखते, जीवन की अपनी सारी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु कार्य करते हैं वे अपने को दुनिया की नजरों में विजयी होता हुआ पाते हैं। येसु ख्रीस्त के अनुसार जो केवल अपने लिए जीते हैं वे न केवल कुछ खोते वरन अपना सबकुछ खोते हैं, जबकि जो अपने को दूसरों के लिए देते हैं वे अपने जीवन के अर्थ को समझते और इस पर विजयी होते हैं।

हमारा चुनाव

अतः यहाँ हम अपने लिए किसी एक चीज, प्रेम या स्वार्थ का चुनाव कर सकते हैं। स्वार्थी व्यक्ति केवल अपने जीवन की सोचता और वस्तुओं, धन-दौलत, शक्ति और सुख में अपने को असक्त पाता है। वह अपने में विश्वास करता है कि सभी चीजें अच्छी हैं लेकिन सच्चाई यही है  उसका हृदय अपने में अचेत है। जीवन के इस मार्ग का अंत हमेशा बुरा होता है आप अपने अकेलेपन में हमेशा अकेले रह जाते हैं। यह सुसमाचार के उस बीज के समान होता जो अपने में बंद रहता तो हमेशा भूमि में दबा रह जाता है। लेकिन यदि वह अपने को खोलता और मरता है जो अपने में फलहित होता है।

प्रेम में नम्रता का मार्ग चुने

संत पापा ने कहा कि आप मुझे यह कहेंगे, अपने आप को देना, ईश्वर और दूसरों के लिए देना जीवन जीने में कुछ फायदे का नहीं है, दुनिया ऐसे नहीं चलती है, जीवन में आगे बढ़ने हेतु हमें गेहूँ के दाने नहीं वरन रुपये और शक्ति की जरूरत होती है। लेकिन यह एक गलतफहमी है। धन और शक्ति मनुष्य को स्वतंत्र नहीं करते वरन उसे गुलाम बनाते हैं। आप देख सकते हैं कि ईश्वर अपनी शक्ति का उयोग हमारी और दुनिया की बुराइयों का सफाया करने हेतु नहीं करते हैं। वे सदैव प्रेम में नम्रता के मार्ग का चुनाव करते हैं, सिर्फ प्रेम हमें आंतरिक रुप से स्वतंत्र करता और हमें शांति और खुशी प्रदान करता है। ईश्वर के अनुसार इसीलिए, सच्ची ताकत सेवा है। सबसे शक्तिशाली आवाज वे नहीं जो जोर से चिल्लाते हैं वरन यह हमारी प्रार्थना है। हमारे जीवन की सबसे बड़ी सफलता हमारी व्यक्तिगत प्रसिद्धि नहीं वरन हमारा साक्ष्य है।

हमारे जीवन की लालसा

संत पापा ने कहा, “प्रिय भाईयो एवं बहनों आज ईश्वर हमें एक चुनाव करने हेतु आहृवान करते हैं, हम अपने लिए जीये या दूसरे के लिए। बुराई पर हमारी जीत केवल जीवन देने के द्वारा होती है। पुरोहित पीनो ने हमें यह शिक्षा दी, उन्होंने दिखावे में अपना जीवन नहीं जीया, उन्होंने माफियाओं के विरूद्ध आवाज नहीं उठाई और न ही उन्हें कोई हानि पहुँचाने की कोशिश की वरन् उन्होंने अच्छाई के बीज अच्छी तरह बोये। वह तार्किक रुप से हमें हारने वाले के समान दिखते हैं लेकिन उनके जीवन में तर्क की जीत हुई। वे अपने जीवन में सही थे, ईश्वरीय धन का तर्क हारता है। किसी वस्तु की चाह हमें उसे प्राप्त करने को प्रभावित करती है। इस भांति हम एक वस्तु को प्राप्त कर लेने का बाद दूसरे की प्राप्ति को लालायित रहते है, फिर तीसरे और चौथे और इस तरह हमारी चाह अनंत होती जाती है। हमारे पास जितना होता, हम उतना ही और अधिक प्राप्त करने की चाह रखते हैं, जो हममें एक बुरी तल तो दिखलाती है। वे जो अपने को भौतिक वस्तुओं से भरते रहते वे अपने में फट जाते हैं। वहीं दूसरी ओर जो प्रेम करते हैं वे अपने में इस बात को अनुभव करते हैं कि दूसरों की सेवा करना कितना सुन्दर है वे अपने अन्दर खुशी का एहसास करते जो बाहर मुस्कान के रुप में झलकती है, पुरोहित पीनो का जीवन ऐसा ही था।

हमारी मुस्कान ईश्वरीय शक्ति

आज से पचीस साल पहले, आज ही के दिन, वे अपने जन्म दिवस के दिन शहीद हो गये। उन्होंने अपनी विजय को मुस्कान के साथ सुशोभित किया, जिसका साक्ष्य उसकी हत्या करने वाला भी देता है,“उनकी मुस्कान में एक तरह का प्रकाश था।” पुरोहित पीनो असहाय थे, लेकिन उनकी मुस्कान में एक ईश्वरीय शक्ति थी, चकाचौंध करने वाली चमक नहीं वरन एक करूणामय ज्योति जो हृदय को खुरेदत्ती और हृदय को परिशुद्ध करती थी। यह प्रेम, एक उपहार, सेवा की ज्योति थी। संत पापा ने कहा कि हमें मुस्कुराते पुरोहितों, मुस्कुराते ख्रीस्तियों की जरुरत है इसलिए नहीं कि वे चीजों को सहज हृदय से लेते हैं वरन् इसलिए कि वे ईश्वर की खुशी में धनी हैं, क्योंकि वे प्रेम में विश्वास करते और उसे अपने सेवामय जीवन में जीते हैं। हम जीवन देने में खुशी का अनुभव करते हैं क्योंकि पाने की अपेक्षा देने में हमें अधिक खुशी मिलती है। (प्रेरि.20.35) संत पापा ने कहा, “मैं आप से पूछना चाहता हूँ क्या आप वैसा ही जीना चाहते हैंॽ, क्या आप अपना जीवन देना चाहते हैं, दूसरे की प्रतीक्षा किये बिना आप अपनी ओर से पहल करेंॽ क्या आप बिना कुछ की आशा किये दूसरों के लिए अच्छाई करने की चाह रखते हैं, संसार के अच्छे होने की कामना किये बिनाॽ क्या आप येसु के लिए जोखिम लेना चाहते हैंॽ

हमारी मानसिकता सत्य का साथ

संत पापा ने कहा कि पुरोहित पीनो को पता था कि उनके जीवन को खतरा है लेकिन उन्हें  यह भी पता था कि जोखिम नहीं उठाना उससे भी बड़ा खतरा है। ईश्वर हमें अपने जीवन के आरामदायक क्षणों से बाहर निकले में मदद करें। ईश्वर हमें अपने जीवन को वृहृद रुप में देखने हेतु मदद करें जहाँ हम अपनी इस मानसिकता से बाहर निकल सकें कि यदि मेरे साथ चीजें ठीक हैं तो सभी चीजें सही सलामत हैं। वे हम इस सोच से बाहर निकले में मदद करें कि अन्याय के विरूद्ध कुछ नहीं करने में ही हम सही हैं। वे हमें अपने इस विश्वास से मुक्त करें कि कुछ गलत नहीं करने में ही हम सही हैं। वे हमें अच्छाई करने की चाह दें जिससे हम बुराइयों का विरोध करते हुए सच्चाई की खोज कर सकें। सुस्त रहने के बदले हम बलिदान, घृणा के बदले प्रेम और प्रतिकार के बदले हम क्षमा को अपना सकें।

विश्वास परिवर्तन की माँग

संत पापा ने कहा कि हम दूसरों के लिए जीवन का कारण बने। यदि हम कहें कि हम ईश्वर पर विश्वास करते और अपने भाई-बहनों से घृणा करें तो यह हो नहीं सकता है। यह एक झूठ है। ईश्वर के प्रति हमारा प्रेम हमें सभी तरह की हिंसा से दूर करता और हमें सभों को प्रेम करने हेतु प्रेरित करता है। अतः घृणा शब्द को हम ख्रीस्तियों के जीवन से दूर करने की आवश्यकता है। आप ईश्वर पर विश्वास करें और माफिया बने रहे यह नहीं हो सकता है। माफिया अपने में ख्रीस्तीय जीवन नहीं जीता क्योंकि वह ईश्वर के नाम और प्रेम के विरूद्ध कार्य करता है। आज हमें प्रेम करने वाले व्यक्तियों की जरुरत है न कि सम्मानित व्यक्तियों की। हमें सेवा की आवश्यकता है न कि शक्ति सम्पन्नता की। हमें एक साथ चलने की जरुरत है न की शक्ति हासिल करने की होड़ की। संत पापा ने कहा कि यदि माफिया की पुकार है,“तुम नहीं जानते कि मैं कौन हूँ”, तो ख्रीस्तीयता की पुकार है “मुझे तुम्हारी जरूरत है।” यदि माफिया के धमकी भरे शब्द, “तुम्हें इसकी कीमत चुकनी पड़ेगी” है तो “प्रभु मुझे प्रार्थना करना सिखलाये” ख्रीस्तीय की प्रार्थना। उन्होंने माफिया दलों को चुनौती देते हुए कहा, “आप अपने में परिवर्तन लायें। आप अपने बारे में और पैसे के बारे में सोचना बंद करें। आप अपने को सच्चे ईश्वर, येसु ख्रीस्त के निकट लायें, और यदि ऐसा नहीं करते तो आप अपने जीवन को खो देंगे, आप का जीवन व्यर्थ हो जायेंगा।”

ख्रीस्त का अनुसरण कार्य की मांग

आज का सुसमाचार हमें निमतंत्र देता है संत पापा ने कहा, “यदि कोई मेरी सेवा करना चाहता है तो मेरा अनुसरण करे।” अनुसरण करने का अर्थ उनके पीछे चलना शुरू करना है। आप अपने विचारों में येसु ख्रीस्त का अनुसरण नहीं कर सकते हैं वरन् हमें इसके लिए कार्य करने की जरुरत है। पुरोहित पीनो ने इस बात को बारंबार दुहराया, “यदि हर कोई कुछ करता है तो बहुत कुछ हो सकता है।” हम में से कितने इसका अनुपालन करते हैंॽ आज हम उनके सामने अपने आप से पूछें, “मैं क्या करूँॽ मैं दूसरों के लिए, कलीसिया के लिए क्या कर सकता हूँॽ आप इस बात का इंतजार न करें कि कलीसिया आप के लिए कुछ करें वरन आप अपनी ओर से पहल करें। आप समुदाय की प्रतिक्षा न करें वरन स्वयं शुरू करें। आप अपने बारे में न सोचें, आप अपने उत्तरदायित्व से दूर न भागें, बल्कि प्रेम का चुनाव करें। आप अपने लोगों के जीवन के बारे, उनकी आश्वयकताओं की चिंता करें। यही हमारी एकमात्र लोकप्रियता है, “ख्रीस्तीय लोकप्रियता”, जो हमसे दूसरे को सुनने और दूसरों पर चिल्लाये बिना, उन पर दोष लगाये बिना और उनसे लड़ाई किये बिना उनकी सहायता की मांग करती है।”

प्रेम विजय की राह

संत पापा ने कहा कि पुरोहित पीनो के अपने जीवन में गरीबों के लिए ऐसा ही किया। उनके कमरे की कुर्सी जिस पर बैठ कर वे पढ़ते थे टूटी हुई थी। लेकिन टूटी हुई वह कुर्सी उनके जीवन का केन्द्र-विन्दु नहीं था क्योंकि वे आराम नहीं करते थे। वे प्रेम की राह में अपना जीवन जीते थे। यह हमारे लिए एक विजयी मानसिकता है। यह हमारे विश्वास की जीत को दिखलाती है जो स्वयं के समर्पण रूपी उपहार से शुरू होती है। विश्वास की यह जीत विश्व की राहों में ईश्वर के मुस्कान को लाती है। विश्वास की यह जीत शहादत से जन्म लेती है। “अपने मित्रों के लिए अपने प्राण देने से बड़ा कोई प्रेम नहीं हो सकता है।”(यो.15.13) येसु ख्रीस्त के ये वचन पुरोहित पीनो पुलीसी की कब्र में अंकित हैं जो हमें यह याद दिलाती है कि जीवन देना विजयी होने का रहस्य है, जो कि हमारे जीवन की सुन्दरता है। हमें अपने जीवन में इसी सुन्दरता को चुनना है।

15 September 2018, 16:01