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स्मारक का दर्शन करते हुए संत पापा फ्राँसिस स्मारक का दर्शन करते हुए संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

संत पापा द्वारा विलनियुस में पीड़ितों के स्मारक पर प्रार्थना

“मेरे ईश्वर! तूने मुझे क्यों त्याग दिया?” (मत्ती, 27:46)

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

विलनियुस, सोमवार, 24 सितम्बर 2018 (रेई) :  संत पापा फ्राँसिस ने विलनियुस में सोवियत कब्जे के पीड़ितों के स्मारक पर लिथुआनिया की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहूति देने वालों की याद में प्रार्थना अर्पित की।

ईसा ने ऊँचे स्वर में पुकार कर कहा, “मेरे ईश्वर! तूने मझे क्यों त्याग दिया?”

हे प्रभु, आपका क्रंदन आज भी इन दीवारों के भीतर गूँजना जारी है जो इस देश के असंख्य बेटे और बेटियों की पीड़ाओं को याद दिलाती है। लिथुआनिया और अन्य राष्ट्रों के लोगों को अपने देश में पूर्ण प्रभुत्व की मांग करने के लिए अपने प्राणों का बलिदान देना पड़ा।  

आपका क्रंदन, हे प्रभु, निर्दोषों के रोने में गूँजती है, जो आपके साथ, स्वर्ग में रोते हैं। यह पवित्र शुक्रवार का दुःख और कड़वाहट, गुमराह, शक्तिहीनता, क्रूरता और अर्थहीनता है जिसे लिथुआनियाई लोगों ने अनियंत्रित महत्वाकांक्षा के परिणाम स्वरूप अनुभव किया जो दिल को कठोर और अंधा बना दिया था।

पीड़ितों के इस स्मारक पर हे प्रभु, हम आपसे प्रार्थना करते हैं कि आपका क्रंदन हमें सतर्क करा सके। आपका क्रंदन हमें हमारे पूर्वजों के अनुभवों और पीड़ाओं को भूलने के प्रलोभन की आध्यात्मिक बीमारी से मुक्त करे।

आपके क्रंदन और अतीत में इतनी बड़ी पीड़ा का सामना करने वालों के जीवन बलिदान द्वारा हमें वर्तमान और भविष्य में निर्णायक रूप से प्रतिबद्ध होने का साहस मिले। उनका क्रंदन हमें प्रोत्साहित करे कि हम वर्तमान फैशन और नारेबाजी के अधीन न हों बल्कि आपके द्वारा दिये गये हर व्यक्ति के सम्मान और गरिमा को रखने का प्रयास कर सकें।  

हे प्रभु, लिथुआनिया आशा का एक प्रकाशस्तंभ बने। यह स्मृति और कार्य की भूमि बने, जो अन्याय के सभी रूपों से लड़ने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। यह सभी लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए रचनात्मक प्रयासों को बढ़ावा दे सके, विशेष रुप से कमजोर और सबसे असुरक्षित लोगों की सुरक्षा। विविधता को सुलझाने और सामंजस्य बनाये रखने में लिथुआनिया सभी के लिए एक शिक्षक बने।

हे प्रभु हमें कृपा दे, कि हम उन लोगों के प्रति बहरे न हों, जो स्वर्ग में हमारे लिए याचना करते हैं।

24 September 2018, 16:53