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सन्त पापा फ्राँसिस लिथुआनिया में सन्त पापा फ्राँसिस लिथुआनिया में  (AFP or licensors)

लिथुआनिया विश्व में एकात्मता का आदर्श बने, सन्त पापा फ्राँसिस

बाल्कन प्रदेश द्वारा हासिल स्वतंत्रता की शताब्दी के उपलक्ष्य में सन्त पापा फ्राँसिस लिथुआनिया लातविया एवं एस्तोनिया की प्रेरितिक यात्रा कर रहे हैं जिसका प्रमुख उद्देश्य दशकों के दमन चक्र और उत्पीड़न के शिकार बने बाल्कन के काथलिक धर्मानुयायियों को उनके विश्वास में सुदृढ़ करना है।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

लिथुआनिया, रविवार, 23 सितम्बर 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): लिथुआनिया विश्व में एकात्मता का आदर्श बने, शनिवार को अपनी इस अपील के साथ सार्वभौमिक काथलिक कलीसिया के परमधर्मगुरु सन्त पापा फ्राँसिस ने बाल्कन राष्ट्रों में अपनी चार दिवसीय यात्रा आरम्भ की. उन्होंने कहा कि दशकों तक सोवियत और नाज़ी अधिकरण, निष्कासन एवं नरसंहार के बाद लिथुआनिया, बढ़ती असहिष्णुता के जाल में फंसे, विश्व में एकात्मता का आदर्श बने.

बाल्कन राष्ट्रों में प्रेरितिक यात्रा का उद्देश्य

बाल्कन प्रदेश द्वारा हासिल स्वतंत्रता की शताब्दी के उपलक्ष्य में सन्त पापा फ्राँसिस लिथुआनिया लातविया एवं एस्तोनिया की प्रेरितिक यात्रा कर रहे हैं जिसका प्रमुख उद्देश्य दशकों के दमन चक्र और उत्पीड़न के शिकार बने बाल्कन के काथलिक धर्मानुयायियों को उनके विश्वास में सुदृढ़ करना है. इटली से बाहर यह सन्त पापा फ्राँसिस की 25 वीं तथा बाल्कन देशों में पहली प्रेरितिक यात्रा है. लगभग 25 वर्षों के अन्तराल के बाद ये राष्ट्र भले ही "नेटो" एवं यूरोपीय संघ के सदस्य बन गये हैं तथापि, सोवियत और नाज़ी दमनचक्र तथा धार्मिक उत्पीड़न ने एक दर्दनाक विरासत छोड़ी है जिसे पराजित करना बालकन देशों के लोगों के लिये एक महान चुनौती है .

सोवियत अधिकरण के घाव

90 के दशक तक सोवियत संघ द्वारा थोपे गयेार्मिक दमन तथा राज्य प्रायोजित नास्तिकतावाद के घावों से ये देश अभीरी तरह उभर नहीं पाये हैं. लिथुआनिया की राजधानी विलनियुस के महाधर्माध्यक्ष जिनतारास ग्रूसास ने वाटिकन रेडियो से कहा, "पचास वर्षों के सोवियत अधिकरण एवं दख़ल ने कलीसिया और लोगों पर अपनी छाप छोड़ी है. लोगों में गहन घाव बने हुए जिन्हें भरने में समय लगेगा."

बाल्कन देशों में नाज़ी नरसंहार के शिकार बने लोगों के प्रति श्रद्धान्जलि अर्पित किये जाने के लिये लिथुआनिया के राष्ट्रपति दालिया ग्रीबाओसकैते ने सन्त पापा फ्राँसिस के प्रति गहन आभार व्यक्त किया. शनिवार को लिथुआनिया में सन्त पापा का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा था, "नाजी और स्टालिनिस्ट अपराधों की क्रूरता एवं पाश्विकता सहन करनेवाले देश में कई लोग यहूदियों की सुरक्षा में उठ खड़े हुए थे इसलिये कि उन्होंने मानवता को परम भलाई रूप में पहचान लिया था. "

23 सितम्बर, 1943 को विलनियुस में शेष न निवासियों को मार डाला गया था या फिर जर्मन नाज़ी बलों के नज़रबन्दी शिविरों में भेज दिया गया था.

 यूरोप में बढ़ती षक्षिणपंथी हिंसा की चेतावनी

राजधानी विलनियुस में राष्ट्रपति भवन के प्राँगण में सन्त पापा फ्राँसिस ने स्मरण दिलाया कि "सर्वसत्तात्मक एवं एकदलीय शासन पद्धति एवं विचारधाराओं" के आगमन से पूर्व लिथुआनिया विविध जातियों एवं धार्मिक समूहों का शांतिपूर्ण परिवार था, जिनमें ख्रीस्तीय, यहूदी और इस्लाम तीनों धर्मों के लोग शामिल थे. आज यूरोप में आप्रवासियों के विरुद्ध बढ़ती दक्षिणपंथी हिंसा के सन्दर्भ में उन्होंने कहा, "आज विश्व ऐसे राजनैतिक बलों से चिन्हित है जो हिंसा, घृणा एवं अन्यों के निष्कासन के लिये भय एवं संघर्ष को प्रश्रय दे रहे हैं."

बाल्कन देशों में अपनी प्रेरितिक यात्रा के प्रथम दो दिन सन्त पापा फ्रांसिस लिथुआनिया में व्यतीत कर सोमवार को लातविया तथा मंगलवार को एस्तोनिया की ओर प्रस्थान करेंगे. सन् 1993 के बाद से इन तीन देशों में काथलिक कलीसिया के परमाध्यक्ष की यह पहली प्रेरितिक यात्रा है.

सन्त पापा ने शनिवार  सन्ध्या विलनियुस के महागिरजाघर के प्राँगण में लिथुआनिया के युवाओं के साक्ष्य सुनें तथा उन्हें अपना सन्देश दिया.

23 September 2018, 10:55