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युवाओं से संत पापा, प्रेम मरा नहीं है

संत पापा फ्राँसिस ने एस्तोनिया में 25 सितम्बर को, अपनी प्रेरितिक यात्रा के दौरान ख्रीस्तीय एकतावर्धक सभा में युवाओं को सम्बोधित कर कहा कि प्रेम मरा नहीं है यह हमें बुलाता और भेजता है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

ताल्लीन्न स्थित चार्ल्स लुथेरन गिरजाघर में युवाओं से मुलाकात करते हुए संत पापा ने कहा, "एक साथ आना हमेशा अच्छा है, अपने जीवन की कहानियों को साझा करने तथा एक-दूसरे के साथ अपने विचारों एवं आशाओं को बांटने के लिए। येसु ख्रीस्त पर विश्वास करने वालों का एक साथ आना कितना अनूठा है। ये मुलाकातें पिछली व्यारी में की गयी येसु की कल्पना को साकार करती हैं, "कि वे एक हो जाएँ... ताकि संसार विश्वास कर सके।" (यो.17:21)

शांति की खोज

यदि हम अपने आपको तीर्थयात्रियों के रूप में देखेंगे जो एक साथ यात्रा कर रहे हैं तब हम बिना डर और संदेह के अपने सह-यात्रियों पर विश्वास करना सीखेंगे, ईश्वर की उपस्थिति में शांति की खोज के लिए, जिसको हम सभी पाना चाहते हैं। शांति एक कला है जिसमें हम एक-दूसरे पर भरोसा रखना सीखते हैं जो आनन्द का स्रोत है, "धन्य हैं वे, जो मेल कराते हैं! वे ईश्वर के पुत्र कहलायेंगे।" (मती. 5:9)

संत पापा ने कहा कि युवाओं के रूप में वे कई बार महसूस करते हैं कि प्रौढ़ लोग उनकी आशाओं एवं इच्छाओं पर ध्यान नहीं देते, उन्हें खुश देखकर संदेह करने लगते और जब वे किसी चीज के लिए उन्हें परेशान देखते हैं तो उन्हें महत्वहीन समझते हैं।

युवाओं की आकाक्षाएँ


संत पापा ने याद किया कि आगामी सिनॉड के लिए भेजे गये सवाल में युवाओं ने एक ऐसे सह-यात्री की इच्छा जाहिर की थी जो न्याय किये बिना उन्हें समझ सके, उन्हें सुन सके तथा उनके सवालों का उत्तर दे सके।

उन्होंने कहा, "हमारी ख्रीस्तीय कलीसियाएँ और धार्मिक संस्थाएँ, सुनने, चुनौतियों को स्वीकार करने एवं उनके अनुभवों से सीखने के बदले संवाद करने, सलाह देने तथा अपने ही अनुभवों को उनके सामने रखने की कोशिश करते हैं। हम जानते हैं कि आप साथ दिये जाने की उम्मीद करते हैं न कि न्याय किये जाने अथवा भय एवं अति सुरक्षात्मक माता-पिताओं के द्वारा पराधीन बना दिये जाने की।"

संत पापा ने कहा कि आज मैं यहाँ आपलोगों को यह बतलाने आया हूँ कि हम आपके साथ शोक मनाना चाहते हैं, आपके दुःख में दुःखी होना चाहते हैं, आपका समर्थन करना चाहते हैं, आपकी खुशी में सहभागी होना तथा प्रभु का अनुसरण करने के लिए आपको मदद देना चाहते हैं।  

येसु उन शहरों पर शिकायत करते हैं जिनका उन्होंने भ्रमण किया, जहाँ चमत्कार के कारण किये तथा कोमलता एवं सामीप्य के महान चिन्ह दिखलाये। वे वहाँ के लोगों के बदलाव की असमर्थता पर अप्रसन्न थे। उन्होंने उन्हें सोदोम से भी अधिक कठोर कहा।

युवाओं से खुला होने का आग्रह

संत पापा ने युवाओं से खुला होने का आग्रह करते हुए कहा कि जब प्रौढ़ लोग सच्चाइयों को स्वीकार नहीं करते, तब वे उसे खुला होकर प्रकट करें कि "क्या आप इसे नहीं देख सकते?" हमें अपने आपको बदलने की आवश्यकता है, हमें एहसास करना है कि आपके साथ खड़े होने का अर्थ, परिस्थितियों में बदलाव लाना है। कई युवाओं ने व्यक्त किया है कि वे किसी चीज के लिए हमारी ओर आना नहीं चाहते क्योंकि उन्हें नहीं लगता कि हमारे पास उनके लिए कोई सार्थक बात है। कुछ लोग अकेले रहना चाहते हैं क्योंकि कलीसिया का अस्तित्व उनके लिए परेशान और तंग करने वाली है। वे यौन दुराचार एवं आर्थिक मामलों के ठोकरों से थक चुके हैं, जिन के लिए अपराधियों को उचित सजा नहीं दी जाती है। संत पापा ने कहा कि ये आपकी कुछ शिकायतें हैं। हम इनका उत्तर देना चाहते हैं। जैसा कि आप चाहते हैं हम पारदर्शी, स्वीकारीय, ईमानदार, निमंत्रण देने, मिलनसार, सुलभ, प्रसन्नचित एवं परस्पर संवादात्मक समुदाय बनाना चाहते हैं।

जहाँ येसु वहाँ नवीनीकरण

सुसमाचार हमें बतलाता है कि येसु पिता की प्रशंसा करते हैं क्योंकि वे महसूस करते हैं कि जिन्होंने येसु के संदेश के अर्थ को समझा है वे निम्न लोग हैं। येसु के शब्दों में  संत पापा ने युवाओं की सराहना की क्योंकि उन्होंने अच्छे उदाहरणों के अभाव में भी समुदाय में येसु को पाया है।

क्योंकि हम जानते हैं कि जहाँ येसु हैं वहाँ नवीनीकरण है, वहां मन-परिवर्तन के नये अवसर हैं तथा हमें उन सभी चीजों का त्याग करना है जो हमें अपने भाई-बहनों से अलग कर देता है। जहाँ येसु हैं वहाँ पवित्र आत्मा की उपस्थिति है। आज वे उसी पर चिंतन कर रहे हैं जिसको येसु ने भी महसूस किया था।

संत पापा ने अपने जीवन में निराशा की घड़ी युवाओं को येसु के शब्दों को याद करने की सलाह दी, ''थके-माँदे और बोझ से दबे हुए लोगो! तुम सभी मेरे पास आओ। मैं तुम्हें विश्राम दूँगा।" (मती.11:28)

येसु ही हमारी एकता एवं शांति के स्रोत

उन्होंने कहा कि हमारे सभी कमजोरियों एवं विभाजन के बावजूद येसु ही हमारी एकता के स्रोत हैं। येसु द्वारा हमारे बोझ को उठा लेने से बढ़कर हम किसी प्रकार की शांति का अनुभव नहीं कर सकते। हम यह भी जानते हैं कि कई लोग उन्हें अब भी नहीं जानते तथा उदासी और संदेह में जीवन व्यतीत करते हैं। एक संगीतकार ने कहा था, "प्रेम मर चुका है, प्रेम चला गया है, प्रेम अब यहाँ नहीं रहता।"

संत पापा ने कहा कि कई लोगों का अनुभव इसी तरह है, वे देखते हैं कि उनके माता-पिता एक-दूसरे से प्रेम नहीं करते, नव दम्पतियों का प्रेम शीघ्र मुरझा जाता है। वे प्रेम के अभाव को उस सच्चाई में भी पाते हैं जहाँ उन्हें काम की तलाश में पलायन करना पड़ता है अथवा उन्हें परदेशी समझकर तिरछी नजरों से देखा जाता है। ऐसी परिस्थिति में लग सकता है कि प्रेम मर चुका है किन्तु हम जानते हैं कि यह नहीं मरा है और हमारे पास एक शब्द है जो कहता है कि हमें एक संदेश देना है, केवल शब्दों से नहीं बल्कि कार्यों के द्वारा।

प्रेम का महान संदेश सभी लोगों को दें

येसु ऐसा ही चाहते हैं क्योंकि वे अच्छा काम किया जाना पसंद करते हैं। उन्होंने स्वयं  वचनों से केवल नहीं किन्तु क्रूस पर कुर्बानी देकर प्रेम का महान संदेश दिया है। हम येसु में विश्वास के कारण एक साथ हैं। येसु हमारा इंतजार कर रहे हैं कि हम उन सभी युवाओं को भी उनके पास लायें जिनका जीवन अर्थपूर्ण नहीं रह गया है।

आइये हम ईश्वर की नवीनता को स्वीकारें जिसको वे हमारे जीवन में लाते हैं वह नवीनता जो हमें नये जगहों में भेजती है जहाँ मानवता सबसे अधिक घायल स्थिति में है। हम उन जगहों में अकेले नहीं होंगे क्योंकि ईश्वर हमारे साथ आते हैं। वे सीमाओं से नहीं डरते, वे स्वंय दीन बन गये, अतः यदि हम दीन-हीन लोगों के पास जाने का साहस करेंगे तो हम उन्हें वहाँ पायेंगे, उन भाई-बहनों के हृदयों में हम उन्हें पायेंगे, उनके घावों में, उनकी परेशानियों एवं पूरी तरह अकेलापन में। वे वहाँ उपस्थित हैं अतः प्रेम मरा नहीं है। वह हमें बुलाता और भेजता है।

संत पापा ने युवाओं को सुसमाचार का प्रचार करने हेतु प्रेरितिक शक्ति प्राप्त करने तथा ख्रीस्तीय जीवन को संग्रहालय के रूप में देखने की प्रवृति से बचने के लिए प्रार्थना करने की सलाह दी तथा कहा कि पवित्र आत्मा हमें पुनर्जीवित ख्रीस्त के प्रकाश में इतिहास पर चिंतन करने हेतु मदद करे, ताकि कलीसिया प्रभु के विस्मय, यौवन, आनन्द और प्रभु से मुलाकात का इंतजार करने वाली वधु के सौंदर्य को बनाये रखे।

25 September 2018, 14:41