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लिथुवानिया के विल्नियस करूणा के तीर्थ मेंं संत पापा लिथुवानिया के विल्नियस करूणा के तीर्थ मेंं संत पापा  (AFP or licensors)

करूणामय माता के सानिध्य में करूणा का संदेश

संत पापा फ्रांसिस ने लिथुवानिया के विल्नियस में करुणामय माता मरिया की तीर्थ की भेंट करते हुए लोगों को करुणावान होने का संदेश दिया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 22 सितम्बर 2018 (रेई।) संत पापा फ्राँसिस ने बाल्टिक देशों की अपनी प्रेरितिक यात्रा के पहले दिन लिथुवानिया के विल्नियस में करुणा की माता मरिया के तीर्थ पर विश्वासियों को करुणावान होने का आहृवान किया।  

संत पापा ने कहा कि हम आशा के द्वार के सामने खड़े हैं, जो इस शहर के रक्षात्मक दीवारों का एकमात्र अवशेष है, जो सन 1799 में आक्रमणकारियों की चढ़ाई के दौरान शहर को भय और खतरे से सुरक्षित रखा। उस वक्त भी इस दीवार ने “करुणा की माता” की प्रतिमा, ईश्वर की पवित्र मां जो सदैव हमारी सहायता हेतु तैयार रहती हैं, बचाये रखा।

उस समय से मरियम ने हमें इस बात की शिक्षा दी है कि हम आक्रमण किये बिना अपनी सुरक्षा कर सकते हैं। हम अपनी सुरक्षा हेतु दूसरों पर आश्रित रहे बिना ही सुरक्षित रह सकते हैं। बालक येसु रहित, सोने से सुशोभित मरियम की यह प्रतिमा हम प्रत्येक की माता है। वह हम प्रत्येक के हृदय में अपने बेटे येसु ख्रीस्त के रुप को देखती है जिसे हम अपने में देखने हेतु असफल होते हैं।  

मानव ईश्वर का प्रतिरुप         

संत पापा ने कहा कि क्योंकि येसु का रुप हम सभों के हृदय में अंकित है हर नर और नारी हमें ईश्वर से मिलने हेतु मदद करते हैं। हम जब भय के कारण अपना हृदय दूसरों के लिए को बंद कर देते, अपने में दीवार और सीमाओं का निर्माण करते तो हम स्वयं को ख्रीस्त के सुसमाचार से वंचित करते हैं जो दूसरे के द्वारा हमारे जीवन के इतिहास में प्रवेश करते हैं। अतीत में हमने दीवारों का निर्माण किया लेकिन आज हम अपने में यह अनुभव करते हैं कि हमें एक दूसरे के चेहरे में देखते हुए एक-दूसरे को अपने भाई-बहनों के रुप में देखने, उनके साथ चलने की आश्वयकता है जिससे हम जीवन में खुशी और शांति के मूल्यवान उपाहर को प्राप्त कर सकें।

हमारी एकात्मकता दूसरे के लिए उपहार  

यहां रोज दिन विश्व के कई देशों, लिथोनियाई, पोलिस, बेलरुस और रुस के असंख्य लोग, ख्रीस्तीय और अर्थोडॉक्स करुणामय माता के दर्शन करने को आते हैं। आज यह संभंव है और इसके लिए हम संचार माध्यमों और देशों के बीच आवगमन की स्वतंत्रता के शुक्रगुजार हैं। संत पापा ने कहा कि यह हमारे लिए कितना अच्छा होता यदि हम आपसी एकजुटता में एक दूसरे का साथ देते हुए एक स्थान से दूसरे साथ को जाते जिससे हम ईश्वर से मिले उपहारों का एक-दूसरे के साथ उदारतापूर्वक आदान-प्रदान कर सकते। ऐसा करना हमें अपने को दूसरों के लिए उपलब्ध करेगा जिसके द्वारा हम एक-दूसरे के उपहार से अपने जीवन को समृद्ध बना सकेंगे।

संत पापा ने कहा कि बहुत बार ऐसा प्रतीत होता है कि विश्व के लिए हमारा खुलापन हमें प्रतियोगिता के कटघरे में लाकर खड़ा कर देता है, जहाँ “मानव, मानव के लिए भेड़िया” बन जाता और उसके जीवन में एक तरह का युद्ध और विभाजन शुरू हो जाता है जो उसे थका देता, एक दूसरे के प्रति घृणा और शत्रुता के भाव उत्पन्न करता जिसके फलस्वरूप वह अपने में कहीं का नहीं रह जाता है।

माता की पुकार

करुणा की माता, एक अच्छी मां की भांति हमें एक परिवार के रुप में एक साथ लाने की कोशिश करती है। वे हमारे कानों में फुसफुसाती हैं, “अपने भाई, अपनी बहनी की खोज करो।” इस तरह वे हमारे जीवन में एक नई आशा जगाती हैं। वे हमें सुसमाचार के उस द्वार पर ले कर आती हैं जहाँ हम धनी व्यक्ति और लाजरूस के बारे में सुनते हैं।(लुक.16.19-31) जहाँ आज हम परिवारों और बच्चों को घायल पाते जो हमारी  सहायता की प्रतीक्षा में हैं। उनके घाव लाजरूस के घाव नहीं हैं वरन वे येसु ख्रीस्त के सच्चे घाव हैं। अपने दर्द और अंधकारमय स्थिति में वे हमें पुकारते हैं जिससे हम करूणा में उनकी मदद हेतु अपना हाथ बढ़ायें। यह करूणा का कार्य है जो चाभी की तरह हमारे लिए स्वर्ग का द्वार खोलती है।

संत पापा ने कहा कि इस द्वार को पार करते हुए हम उस शक्ति का अनुभव करते हैं जो हमारे पड़ोसी से हमारे संबंध को परिशुद्ध करती है। हमारी मां माता मरियम हमारी सहायता करें कि हम उनकी खम्मियों और गलतियों को, अपने बड़प्पन में नहीं बल्कि अपनी करुणा और नम्रता के भाव से देख सकें। माला विन्ती के रहस्यों में चिंतन करते हुए हम माता मरियम से निवदेन करें कि हम एक समुदाय स्वरुप येसु ख्रीस्त जो हमारी आशा हैं, को घोषित कर सकें। इस तरह हम माता मरिया की सहायता द्वारा अपने देश में सभों को स्वीकार कर सकेंगे, दूसरों का स्वागत करते हुए उनके निकट, उनके साथ वार्ता और धैर्य के उपहार का आदान-प्रदान करते हुए अपने देश को प्रेम और क्षमा का एक देश बना सकेंगे, जो दूसरो की बुराई नहीं करती है। हमारा देश दीवारों का निर्माता नहीं वरन सेतु का निर्माता बनेगा, जो करुणा का चुनाव करती है न की किसी पर आरोप लगाती है।

22 September 2018, 17:18