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रिमिनी सभा- 2018 रिमिनी सभा- 2018 

लोगों के बीच मित्रता बढ़ाने हेतु रिमिनी सभा

इटली में लोगों के बीच मित्रता बढ़ाने के लिए एक सभा का आयोजन किया जाता है जिसे रिमिनी सभा कहा जाता है। एकता एवं स्वतंत्रता आंदोलन इसे अगस्त माह में आयोजित करती है। इस सभा की शुरूआत 1980 में हुई थी। इस वर्ष रिमीनी सभा का आयोजन 19 से 25 अगस्त तक किया गया है। इसके उद्घाटन पर संत पापा ने एक संदेश प्रेषित करते हुए कहा कि ईश्वर के बिना कोई भी क्रांति मानव को संतुष्ट नहीं कर सकती।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

संत पापा फ्राँसिस ने सभा को एक संदेश प्रेषित कर इस बात पर बल दिया कि विश्वास हमेशा इतिहास को आगे ले चलने की इच्छा का सूचक है। ख्रीस्तीय एक बेहतर दुनिया की कल्पना करना कभी नहीं छोड़ते।

सभा की विषयवस्तु है "इतिहास को आगे ले जाने वाली शक्ति वही है जो मनुष्य को खुश करती है।"

ख्रीस्तियों के लिए सवाल

वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पियेत्रो परोलिन ने संत पापा की ओर से, रिमिनी के धर्माध्यक्ष लम्बियासी के नाम, सभा के आयोजकों, स्वयंसेवकों एवं प्रतिभागियों को प्रेषित संदेश में लिखा, "कई लोग एक बेहतर दुनिया के आकर्षण से विश्वास को नीतिवाद का रूप देते और कृपा पर ध्यान न देकर, अपने प्रयासों पर ध्यान देते हैं। सब कुछ को बदल देने की उस चाह में क्या रह गया है? हम सेतु का निर्माण करने के बदले दीवार खड़ा करने के लिए लौटते हैं, दूसरों के प्रति खुला रहने की अपेक्षा, बंद रहना चाहते हैं, परिवर्तन के लिए चुनौती लेने की अपेक्षा, उदासीनता बढ़ती है। भविष्य पर भरोसा रखने के बदले भय की भावना प्रबल होती है। ये सवाल हम ख्रीस्तियों के लिए भी हैं। हम, लोगों के साथ चिंतन करने के लिए प्रेरित किये जाते हैं। अपने आप से पूछने के लिए कि हमने क्या सीखा है? हम किस खजाने को जमा कर रहे हैं? मनुष्य का प्रलोभन हमेशा अपनी बुद्धि एवं काबिलियत पर भरोसा रखना है जो दुनिया पर शासन कर रहा है। इस दावे को दो तरह से महसूस किया जा सकता है, पहला, नोस्टिसिज्म जिसमें व्यक्ति अपने तर्क एवं अनुभवों में बंद रहता है। दूसरा, नेओपेलाजियानिज्म जो पूरी तरह अपनी शक्ति पर भरोसा रखता है।

परिवर्तन आवश्यक

संत पापा ने विश्वासियों से प्रश्न किया है कि क्या ख्रीस्तीय जो इन प्रलोभनों से बचना चाहते हैं वे परिवर्तन को छोड़ दें। उन्होंने कहा, नहीं, यह गलती करने की जोखिम में नहीं पड़ने के लिए संसार से वापस हो जाने एवं प्राचीन शुद्धता को बनाये रखने का मामला नहीं है, क्योंकि सच्चा विश्वास दुनिया के पूर्ण परिवर्तन की चाह रखता है ताकि इतिहास आगे बढ़ सके।

उन्होंने कहा कि ख्रीस्तीय बेहतर दुनिया का स्वप्न देखना नहीं छोड़ सकते। यह स्वप्न देखना उचित है क्योंकि इस निश्चितता की जड़, उस दृढ़ विश्वास में है कि ख्रीस्त ही नई दुनिया के आदि हैं। संत पापा फ्राँसिस इसका सारांश इस प्रकार देते हैं, "उनका पुनरूत्थान कोई अतीत की घटना नहीं है। इसमें जीवन शक्ति है जिसने संसार में प्रवेश किया है। जहाँ यह पूरी तरह मृतप्राय लग रहा था किन्तु उसके हर भाग में पुनरूत्थान की कली निकल आयी। यह एक अनोखी शक्ति है। कोई भी प्रयास अथवा क्रांति मानव हृदय को पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर सकती। केवल ईश्वर जिन्होंने हमें अनन्त चाह से बनाया है, हमें अपनी उपस्थिति से भर सकते हैं। यही कारण है कि उन्होंने मानव का रूप धारण किया जिससे कि मानव अपने बचानेहारे से मुलाकात कर सके एवं आनन्दमय दिनों की चाह कर सके।

22 August 2018, 17:00