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मृत्युदण्ड मृत्युदण्ड  (Copyright © Ken Piorkowski 2012)

मृत्युदण्ड अस्वीकार्य, संत पापा फ्राँसिस

संत पापा फ्राँसिस के साथ मुलाकात तथा उनके अनुमोदन के बाद वाटिकन के सी डी एफ ने कहा है कि मृत्युदण्ड के संबंध में काथलिक कलीसिया की धर्मशिक्षा (सीसीसी) में बदलाव लाया गया है जिसके अनुसार मौत की सजा अस्वीकार्य है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 2 अगस्त 18 (वाटिकन न्यूज)˸ संत पापा फ्राँसिस ने काथलिक कलीसिया की धर्मशिक्षा के अनुच्छेद संख्या 2267 के एक नए संशोधन को मंजूरी दे दी है जिसके अनुसार राज्य द्वारा लगाए गए दंड प्रतिबंधों के कारण एक नई समझ उभरी है, " जिसमें मृत्युदंड अस्वीकार्य है "।

निर्णय की घोषणा, विश्वास के सिद्धांत हेतु गठित परमधर्मपीठय धर्मसंघ द्वारा 1 अगस्त को धर्माध्यक्षों को लिखे पत्र द्वारा प्रकाशित किया गया है जिसपर धर्मसंघ के अध्यक्ष कार्डिनल लुईस फ्रंचेस्को लादारिया का हस्ताक्षर है।

मृत्युदण्ड

काथलिक कलीसिया की धर्मशिक्षा के अनुच्छेद संख्या 2267 में वैध अधिकारी की ओर से एक निष्पक्ष परीक्षण के बाद, मृत्युदण्ड को, लंबे समय तक कुछ गंभीर अपराधों के लिए उचित माना जाता था तथा सार्वजनिक सुरक्षा के साधन रूप भी स्वीकार किया जाता था, किन्तु आज इस बात में जागरूकता बढ़ी है कि अत्यन्त गंभीर अपराध के बाद भी व्यक्ति की प्रतिष्ठा समाप्त नहीं हो जाती। साथ ही, राज्य द्वारा लगाए गए दंड प्रतिबंधों के महत्व की नई समझ का उदय हुआ है। कैद की अधिक प्रभावी प्रणाली भी विकसित की गई है जो नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है किन्तु मुक्ति की संभावना से उसे बिलकुल बंचित नहीं कर देती। इसके फलस्वरूप, कलीसिया सुसमाचार के प्रकाश में शिक्षा देती है कि मौत की सजा अस्वीकार्य है क्योंकि यह व्यक्ति की अनुल्लंघनीयता एवं प्रतिष्ठा पर आक्रमण है। कलीसिया दृढ़ता के साथ मृत्यु की सजा को समाप्त करने के लिए कार्य करती है।

मृत्युदण्ड को समाप्त किये जाने पर, पोप जॉन पौल द्वितीय की अपील

कार्डिनल लादारिया ने पत्र में याद किया कि संत पापा जॉन पौल द्वितीय ने मांग की थी कि मृत्युदण्ड पर शिक्षा को पुनर्निर्मित किया जाए ताकि दस्तावेज पर बेहतर चिंतन किया जा सके, हर व्यक्ति के सम्मान हेतु कलीसिया में यह चेतना जागृत हो सके, यह सुनिश्चित करते हुए कि एक हत्यारे की मानव प्रतिष्ठा समाप्त नहीं हो जाती वरन स्वयं ईश्वर उसकी प्रतिष्ठा को पुनः स्थापित करने की प्रतिज्ञा करते हैं। उन्होंने कहा है कि संत पापा जॉन पौल द्वितीय ने कई अवसरों पर मृत्युदण्ड को क्रूर एवं अनावश्यक कहा है।

संत पापा बेनेडिक्ट 16वें

संत पापा बेनेडिक्ट 16वें की याद कर कार्डिनल लादारिया लिखते हैं कि उन्होंने समाज के नेताओं से अपील की थी कि वे मृत्युदण्ड को हर तरह से दूर करने का प्रयास करें।

नागरिकों के जीवन की रक्षा हेतु अधिकारियों की जिम्मेदारी

कार्डिनल लदारिया ने कहा कि सीसीसी 2267 में नये संशोधन पर संत पापा फ्राँसिस का अनुमोदन, पिछले संत पापाओं की धर्मशिक्षा के साथ निरंतरता में खुद को व्यवस्थित करता है जबकि यह आधुनिक राज्य द्वारा लागू दंड प्रतिबंधों की नई समझ को ध्यान में रखते हुए काथलिक सिद्धांत में एक सुसंगत विकास लाता है।

कार्डिनल ने लिखा कि नया संशोधन हर मानव के जीवन की गरिमा को पहचानने के लिए समर्पण को बल प्रदान करना तथा अधिकरियों के साथ वार्ता करना चाहता है जिससे मृत्युदण्ड जहाँ यह अब भी जारी है उसे समाप्त किये जाने के लिए निर्मित शर्तों को प्रोत्साहन दिया जा सके। 

02 August 2018, 18:06