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आयरलैंड के अधिकारियों से मुलाकात करते संत पापा आयरलैंड के अधिकारियों से मुलाकात करते संत पापा  (ANSA)

आयरलैंड के अधिकारियों को संत पापा का सम्बोधन

संत पापा फ्राँसिस ने आयरलैंड की प्रेरितिक यात्रा के प्रथम दिन 25 अगस्त को, अपने कार्यक्रम की शुरूआत आयरलैंड के प्रधानमंत्री लेओ वारादकर, वहाँ के राजनयिकों एवं सरकारी आधिकारियों से मुलाकात करते हुए की।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

संत पापा ने अपने सम्बोधन में अपनी प्रेरितिक यात्रा का उद्देश्य बतलाते हुए कहा, "जैसा कि आप जानते हैं मेरी यात्रा का उद्देश्य है परिवारों के विश्व सम्मेलन में सहभागी होना, जो इस वर्ष डबलिन में आयोजित है। कलीसिया वास्तव में परिवारों का एक परिवार है तथा समाज में ईश्वर प्रदत्त बुलाहट की खुशी से एवं ईमानदारी पूर्वक प्रत्युत्तर देने के प्रयासों द्वारा परिवारों को समर्थन देने की आवश्यकता महसूस करती है। सम्मेलन न केवल परिवारों को अपनी प्रेमी निष्ठा, आपसी सहयोग तथा ईश्वर के वरदानों को सम्मान देने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को नवीकृत करना है, किन्तु उसे अपने सदस्यों की शिक्षा एवं विकास तथा एक आदर्श एवं प्रगतिशील सामाजिक संरचना के लिए योगदान देने के द्वारा परिवार की विशेष भूमिका को प्रस्तुत करना भी है।

परिवारों के हित का ध्यान रखना आवश्यक  

संत पापा ने परिवारों के विश्व सम्मेलन के प्रति अपनी आशा व्यक्त करते हुए कहा, "मैं परिवारों के विश्व सम्मेलन को एक नबी के साक्ष्य के रूप में देखना चाहता हूँ जिसमें नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों की समृद्ध देशभक्ति हो, जो कि हर पीढ़ी का कर्तव्य है कि वह उसे बढ़ाये एवं उसकी रक्षा करे। परिवार हमारे समाज की ईकाई है उसके कल्याण की बातों को यों ही नहीं लिया जाना चाहिए बल्कि हर उपयुक्त चीजों द्वारा उसको बढ़ावा दिया जाना एवं उसकी रक्षा की जानी चाहिए।

हमारे जीवन में परिवार का महत्व

परिवार ही है जहाँ हम प्रत्येक ने अपने जीवन में पहला कदम लिया। वहाँ हमने एक साथ मिलकर रहना सीखा, अपने स्वार्थ पर विजय पाना एवं अपनी विविधताओं को स्वीकारना तथा सबसे बढ़कर आत्मनिर्णय करना एवं मूल्यों की खोज करना सीखा जो हमारे जीवन को सच्चा अर्थ एवं पूर्णता प्रदान करती है।

संत पापा ने विश्व को एक परिवार के रूप में देखते हुए कहा, "यदि हम पूरे विश्व को एक परिवार के रूप में देखते हैं तो इसका अर्थ है कि हम मानवता के रिश्ते को अच्छी तरह स्वीकार करते हैं तथा एकता एवं एकात्मता के लिए हमारी बुलाहट को समझते हैं, विशेषकर, हमारे कमजोर भाई-बहनों के साथ। हम प्रत्येक बहुधा, नस्लीय और जातीय नफरत, संघर्ष और हिंसा, मानव गरिमा और मौलिक मानवाधिकारों का तिरस्कार तथा धनी एवं गरीब के बीच बढ़ती खाई के सामने कमजोर महसूस करते हैं। ऐसी स्थिति में हमें लोगों के बीच एक सच्चे परिवार की भावना लाने के लिए, राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन में कितना अधिक सुधार करने की आवश्यकता है।" संत पापा ने सभी सरकारी अधिकारियों को प्रोत्साहन देते हुए कहा कि वे इन कार्यों में कभी आशा न खोयें और शांति निर्माता, मेल-मिलाप के मध्यस्थ बनने एवं एक-दूसरे की रक्षा करने की नैतिक आवश्यकता के साहस को बनाये रखें।

आयरलैंड की चुनौतियाँ


संत पापा ने आयरलैंड की चुनौतियों पर गौर करते हुए कहा कि लम्बे संघर्ष ने एक ही परिवार के भाई-बहनों को विभाजित कर दिया था। किन्तु बीस वर्षों पूर्व अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने उतरी आयरलैंड में पुण्य शुक्रवार समझौता (गुड फ्राईडे अग्रीमेंट) पर हस्ताक्षर करते देखा। आयरिश सरकार ने उत्तरी आयरलैंड के राजनीतिक, धार्मिक एवं नागरिक नेताओं तथा ब्रिटिश सरकार एवं विश्व के अन्य देशों के नेताओं के समर्थन से संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान किया, जिसने दोनों तरफ अकथनीय पीड़ा उत्पन्न की थी। हम उन दो दशकों की शांति के लिए शुक्रगुजार हैं जिसने उस ऐतिहासिक समझौते का अनुसरण किया, साथ ही दृढ़ आशा व्यक्त की कि शांति की प्रक्रिया हर बाधा को दूर करेगी तथा भविष्य में सौहार्द, मेल-मिलाप एवं आपसी विश्वास को जन्म लेने में मदद देगी।

 सच्ची शांति ईश्वर का सर्वोत्तम दान

सुसमाचार हमें स्मरण दिलाता है कि सच्ची शांति ईश्वर का सर्वोत्तम दान है। यह चंगाई प्राप्त एवं मेल-मिलाप किये गये हृदय से प्रवाहित होती तथा अपनी बाहों को फैला कर समस्त विश्व का आलिंगन करती है। फिर भी, इसे हमारी ओर से निरंतर मन-परिवर्तन की आवश्यकता होती है, क्योंकि उन आध्यात्मिक संसाधनों के स्रोत के रूप में प्रामाणिक एकात्मता, न्याय और सार्वजनिक हित की सेवा के समाज का निर्माण करना आवश्यक है।

उस आध्यात्मिक नींव के बिना राष्ट्रों की वैश्विक परिवार की हमारी विचारधारा, आबादी हीन होने की जोखिम में पड़ जायेगी। क्या हम कह सकते हैं कि आर्थिक समृद्धि बनाने का लक्ष्य खुद को एक और अधिक न्यायसंगत और समान सामाजिक व्यवस्था की ओर ले जाता है या क्या यह हमें भौतिकवादी "फेंक देने की संस्कृति" में मानव परिवार के गरीब और सबसे असुरक्षित लोगों के प्रति उदासीन बना दिया है, खासकर, अजन्मे बच्चे को जीवन के अधिकार से वंचित कर? शायद इन दिनों की सबसे बड़ी चुनौती है शरणार्थी संकट, जो समाप्त नहीं होगी और जिसके समाधान के लिए विवेक की आवश्यकता है, दृष्टि की चौड़ाई तथा मानवीय सहानुभूति की, जो अल्पकालिक राजनीतिक निर्णय के परे है।

संत पापा ने कमजोर लोगों के प्रति विशेष सहानुभूति दिखलाते हुए कहा कि मैं सबसे कमजोर भाई-बहनों के प्रति अधिक चिंतित हूँ, विशेषकर, उन महिलाओं के लिए जिन्होंने अतीत में कठिन परिस्थितियों का सामना किया है।

यौन दुराचार के प्रति खेद

संत पापा ने आयरलैंड में कलीसिया के सदस्यों द्वारा यौन दुराचार के प्रति दु˸ख व्यक्त करते हुए कहा, "सबसे कमजोर लोगों के संबंध में, मैं कलीसिया के सदस्यों द्वारा उनकी सुरक्षा और शिक्षा की जिम्मेदारी के बहाने, बाल यौन दुरुपयोग से आयरलैंड में होने वाले गंभीर पाप को स्वीकार करना नहीं भूल सकता। कलीसियाई अधिकारियों- धर्माध्यक्षों, धर्मसमाज के अधिकारियों, पुरोहितों एवं अन्य लोगों की विफलता ने सुधार के लिए उचित तरीके से आवाज ऊँची की है तथा कलीसियाई समुदाय के लिए यह दुःख और लज्जा का कारण बन गया है। मैं स्वयं लज्जित हूँ।" उन्होंने याद किया कि इसको दूर करने के लिए संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें ने भी पूरी कोशिश की थी।

आयरलैंड की कलीसिया का योगदान

उन्होंने कहा, "हर बच्चा ईश्वर का बहुमूल्य वरदान है जिसको बढ़ाया जाना, उनकी क्षमताओं को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना तथा आध्यात्मिक एवं मानवीय मार्गदर्शन की आवश्यक है।"

संत पापा ने आयरलैंड की कलीसिया के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आयरलैंड की कलीसिया ने भूत एवं वर्तमान में बच्चों के कल्याण को प्रोत्साहन देने के लिए जो भूमिका निभायी है उसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यौन दुराचार की गंभीरता जिसने कई लोगों के पतन को दर्शाया है, उसके कारण नाबालिगों एवं कमजोर लोगों की सुरक्षा के महत्व पर समाज द्वारा बल मिलेगा। इसके लिए उन्होंने कहा कि युवाओं को विवेकपूर्ण मार्गदर्शन एवं सही मूल्यों को प्रदान किया जाना अति आवश्यक है।  

संत पापा ने आयरलैंड के सभी अधिकारियों को सम्बोधित कर वाटिकन का आयरलैंड के संबंध की शुरूआत की याद की तथा उनके बीच आपसी सहयोग एवं समझदारी का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि "हाल में गहन प्रयास और दोनों पक्षों पर सद्भावना ने आपसी पारस्परिक लाभ के लिए उन अनुकूल संबंधों के एक आशाजनक नवीनीकरण के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है।"

विश्वास की ज्योति

संत पापा ने आयरलैंड के प्रथम धर्माध्यक्ष पालादियुस एवं पैट्रिक की भी याद की जिन्होंने वहाँ ख्रीस्त के संदेश को मजबूती प्रदान की थी और जिसके कारण यह वहाँ के लोगों का जीवन एवं संस्कृति बन गया। कई संतों एवं महान लोगों ने अपने देश से विश्वास की ज्योति को दूसरे देशों में फैलाया।

आज भी अतीत की तरह इस देश के स्त्री एवं पुरूष, विश्वास से उत्पन्न प्रज्ञा द्वारा देश के जीवन को समृद्ध बना रहे हैं। यहां तक कि आयरलैंड के सबसे अंधेरे क्षणों में, उन्होंने उस विश्वास में स्वतंत्रता और गरिमा, न्याय और एकजुटता के भविष्य को तैयार करने के लिए आवश्यक साहस और प्रतिबद्धता का एक स्रोत को पाया। ख्रीस्तीय संदेश उस अनुभव का एक अभिन्न हिस्सा रहा है, और इस द्वीप पर लोगों की भाषा, विचार और संस्कृति को आकार प्रदान किया है।

संत पापा ने कामना की कि आयरलैंड, समकालीन राजनीतिक और सामाजिक चर्चा की पॉलीफोनी को सुनने में, ख्रीस्तीय संदेश के शक्तिशाली खिंचाव को न भूलाया जाए, जिसने इसे अतीत में बनाए रखा है और भविष्य में ऐसा करना जारी रख सकता है।

अंत में संत पापा ने सभी अधिकारियों एवं आयरलैंड के नागरिकों पर प्रज्ञा, आनन्द एवं शांति हेतु ईश्वरीय आशीष की कामना की।

25 August 2018, 17:48