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संत मर्था प्रार्थनालय में प्रवचन द्त् हुए संत पापा फ्राँसिस संत मर्था प्रार्थनालय में प्रवचन द्त् हुए संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

संत पापा ने छात्रों और शिक्षकों के लिए प्रार्थना की

संत पापा फ्राँसिस ने पवित्र मिस्सा में छात्रों और शिक्षकों के लिए प्रार्थना की, जिससे कि इस महामारी के समय में उन्हें आगे बढ़ने का साहस मिले। अपने प्रवचन में उन्होंने इस बात पर चिंतन किया कि ख्रीस्तीय जीवन येसु के साथ आत्मीयता में ही है। येसु सदा हमारे साथ हैं।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार 13 मई 2020 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्राँसिस ने बुधवार 13 मई को संत मर्था के प्रार्थनालय में फातिमा की माता मरियम के आदर में पवित्र मिस्सा का अनुष्ठान किया। पवित्र मिस्सा शुरु करने से पहले सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों याद कर उनके लिए प्रार्थना की।

 संत पापा ने कहा, ʺआज हम सभी छात्रों के लिए प्रार्थना करते हैं, जो अध्ययन कर रहे हैं और शिक्षकगण जो शिक्षण को आगे बढ़ने के लिए नए तरीके ढूँढ रहे हैं। प्रभु इस यात्रा में उनकी मदद करे, उन्हें साहस और एक बड़ी सफलता भी दे।ʺ

अपने प्रवचन में, संत पापा ने बुधवार के सुसमाचार पाठ (योहन,15: 1-8) पर टिप्पणी की जिसमें येसु अपने शिष्यों से कहते हैं: "मैं सच्ची दाखलता हूँ और मेरे पिता बागवान है। वह उस डाली को, जो मुझमें नहीं फलती, काट देता है और उस डाली को, जो फलती है, छँटता है, जिससे वह और भी अधिक फल उत्पन्न करे।"

येसु से संयुक्त रहना

संत पापा ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि ख्रीस्तीय जीवन येसु के साथ बने रहने में ही है। निष्क्रिय रुप से बने रहने में नहीं, लेकिन सक्रिय रुप से बने रहने में ही ख्रीस्तीय जीवन की सार्थकता है। येसु का हमारे साथ बने रहना यह ख्रीस्तीय जीवन का रहस्य है।

संत पापा ने कहा कि येसु दाखलता है और हम उसकी डालियाँ। डालियों को जीने के लिए रस की जरुरत होती है और वह तने या दाखलता से प्राप्त करती है और फूलती-फलती है। जिस तरह डालियों को दाखलता की जरुरत है उसी तरह दाखलता को डालियों की जरुरत है दाखलता में फल नहीं लगते, फलने के लिए डालियों की जरुरत होती है इस तरह हमारा और येसु का आपस में संयुक्त रहने में ही ख्रीस्तीय जीवन की सार्थकता और कलीसिया का प्रसार संभव है।

संत पापा ने इस बात को रेखांकित करते कहा कि ख्रीस्तीय जीवन सिर्फ ईश्वर की दस आज्ञाओं का पालन करना और दया के कार्यों को करना मात्र नहीं है। इससे कहीं ज्यादा है, ख्रीस्तीय जीवन प्रभु के साथ ‘संयुक्त’ रहने में है।

आपसी संबंध

संत पापा ने कहा कि "हम येसु के बिना कुछ नहीं कर सकते और येसु को भी हमारी जरुरत है। इस फलदायी आपसी संबंध में, येसु को हमारी गवाही की आवश्यकता है। हम अपने जीवन और कार्यों द्वारा येसु की गवाही देते है। "येसु को हमें उसके नाम का गवाह बनाने की आवश्यकता है, क्योंकि हमारी गवाही से सुसमाचार का प्रसार होता है।"

त्रित्व ईश्वर हम में मौजूद हैं

संत पापा ने कहा, "प्रभु हममें रहते हैं जिससे कि हम उनकी गवाही दे सकें। हमारी गवाही से ही कलीसिया बढ़ती है।"

"यह अंतरंगता का रिश्ता है, यह रहस्यमय है : यह केवल रहस्यवादियों (मिस्टिक) के लिए नहीं है, यह हम सभी के लिए है।" उस अंतरंग संवाद में, “प्रभु मौजूद हैं, प्रभु हमारे भीतर मौजूद हैं, पिता हम में मौजूद हैं, आत्मा हम में मौजूद है; वे हम में बने रहते हैं और मुझे उनमें बने रहना चाहिए।”

अंत में संत पापा ने कहा, ʺप्रभु, हमें इस अंतरंगता के रहस्य को समझने और महसूस करने की कृपा प्रदान कर। हम जीवन भर प्रभु में बने रहें और फल प्रदान कर सकें।ʺ

13 May 2020, 10:02
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