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संत मर्था में ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा फ्राँसिस संत मर्था में ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा फ्राँसिस 

संत मर्था: प्रभु धर्मबहनों को आशीष प्रदान करे, संत पापा

वाटिकन के प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में शनिवार को ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा फ्राँसिस ने पौल के संत विन्सेंट (सेंट विंसेन्ट दी पौल) की पुत्रियों के लिए प्रार्थना की जो संत पापा एवं संत मर्था में रहने वाले लोगों की मदद करते हैं। अपने उपदेश में उन्होंने कहा कि जब पवित्र आत्मा कलीसिया को बढ़ाता, बुराई की आत्मा इसे ईर्ष्या, सत्ता और धन के द्वारा नष्ट करता है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 9 मई 2020 (रेई)- शनिवार को ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा ने मेरील्लाक के संत लुईसा के पर्व की याद की, जिन्होंने संत भिन्सेंट दी पौल के साथ चारिटी की पुत्रियों के धर्मसमाज की स्थापना की थी। इस धर्मसमाज का एक समुदाय, संत मर्था प्रेरितिक आवास में सेवा प्रदान करता एवं वाटिकन में बाल-चिकित्सा औषधालय चलाता है।

ख्रीस्तयाग के आरम्भ में संत पापा ने कहा, "आज मेरील्लाक की संत लुईसा का पर्व है। हम संत भिंसेन्ट की धर्मबहनों के लिए प्रार्थना करें जो इस क्लीनिक को करीब 100 सालों से चला रहे हैं और यहाँ संत मर्था के लिए इस अस्पताल में काम कर रहे हैं। प्रभु धर्मबहनों को आशीष प्रदान करे।"  

अपने उपदेश में संत पापा ने प्रेरित चरित (प्रे.च.13,44-52) से लिए गये पाठ पर चिंतन किया जहाँ अंतियोख के यहूदी, भीड़ देखकर पौलुस से ईर्ष्या करते और उनकी निंदा करते है। यहूदियों ने प्रतिष्ठित भक्त महिलाओं तथा नगर के नेताओं को उभाड़ा तथा पौलुस एवं बरनाबस के विरूद्ध उपद्रव खड़ा किया और उन्हें अपने इलाके से निकाल दिया।

संत पापा ने भजन अनुवाक्य की याद की जिसमें कहा गया है, "प्रभु के लिए नया गीत गाओ क्योंकि उन्होंने महान कार्य किये हैं, उनके दाहिने हाथ, उनकी पवित्र भुजा ने विजय प्राप्त की है। प्रभु ने अपनी मुक्ति प्रकट की है।"

प्रेरित चरित से लिए गये पाठ में संत पापा ने गौर किया कि अंतियोख का पूरा शहर ईश वचन सुनने के लिए एकत्रित था क्योंकि पौलुस ने निडर होकर उपदेश दिया और पवित्र आत्मा ने उन्हें सामर्थ्य प्रदान किया किन्तु भीड़ को देखकर, यहूदी ईर्ष्या से जलने लगे और पौलुस का विरोध किया।  

पवित्र आत्मा एवं बुराई की आत्मा के बीच संघर्ष

संत पापा ने कहा, "एक ओर पवित्र आत्मा है जो कलीसिसया को बढ़ाता, जबकि दूसरी ओर बुराई की आत्मा है जो कलीसिया का विनाश करने की कोशिश करता है।"

उन्होंने कहा, "ऐसा हमेशा होता आया है, यह आगे बढ़ती है किन्तु शत्रु इसे नष्ट करने आता है। इस विकास में बहुत प्रयत्न करना एवं शहीद होना पड़ता है। एक ओर ईश वचन कलीसिया को बढ़ाता जबकि दूसरी ओर अत्याचार भी है।

संत पापा ने कहा कि "कलीसिया, ईश्वर की सांत्वना एवं दुनिया के अत्याचार के बीच चलती है, और जब कलीसिया में कोई कठिनाई नहीं है इसका अर्थ है कि कुछ चीज का अभाव है। यदि शैतान शांत है इसका अर्थ है कि चीजें ठीक से नहीं चल रही हैं।"

ईर्ष्या और द्वेष

संत पापा ने कहा कि सुसमाचार के प्रचार को रोकने के लिए शैतान जिन हथियारों का प्रयोग करता है वे हथियार हैं- ईर्ष्या और द्वेष। यह शैतान का क्रोध है जो नष्ट करता है।

इन संघर्षों का सामना करते हुए यह महसूस किया जाना अच्छा है कि कलीसिया ईश्वर की सांत्वना एवं दुनिया के अत्याचार के बीच आगे बढ़ती है।

संत पापा ने कहा कि ये संघर्ष चलते ही रहेंगे, पवित्र आत्मा कलीसिया में सामंजस्य लाता है और शैतान उसे नष्ट करता है, जो आज भी हो रहा है।

सत्ता और धन

संत पापा ने कहा कि अस्थायी शक्ति इस ईर्ष्या के हथियार हैं। अस्थायी शक्ति अच्छे हो सकते हैं, लोग भी अच्छे हो सकते हैं किन्तु शक्ति अपने आप में हमेशा खरतनाक होता है।

दुनिया की शक्ति हमेशा ईश्वर की शक्ति के विरुद्ध होता है और दुनिया की शक्ति के पीछे धन है। पुनरूत्थान की प्रातः से ही अस्थायी शक्ति और धन का प्रयोग सच्चाई को शांत करने के लिए किया गया है।

उपदेश के अंत में संत पापा ने विश्वासियों का आह्वान किया कि वे अपना विश्वास येसु ख्रीस्त एवं पवित्र आत्मा पर रखें, अस्थायी सत्ता एवं धन पर नहीं।

संत पापा का ख्रीस्तयाग 9 मई 2020
09 May 2020, 10:11
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