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संत पापा फ्राँसिस, ख्रीस्तयाग के अंत में पावन संस्कार की आराधना करते हुए संत पापा फ्राँसिस, ख्रीस्तयाग के अंत में पावन संस्कार की आराधना करते हुए 

संत मर्था मिस्सा में दिव्यांग लोगों की देखभाल करनेवालों के लिए पोप की प्रार्थना

वाटिकन के संत मर्था प्रार्थनालय में शनिवार को ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा फ्राँसिस ने कोविड -19 से संक्रमित दिव्यांग लोगों की देखभाल करनेवालों के लिए प्रार्थना की।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 18 अप्रैल 2020 (रेई)- वाटिकन के संत मर्था प्रार्थनालय में शनिवार को ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा फ्राँसिस ने कोविड -19 से संक्रमित दिव्यांग लोगों की देखभाल करनेवालों के लिए प्रार्थना की।

संत पापा ने ख्रीस्तयाग आरम्भ करते हुए कहा, "कल मैंने एक धर्मबहन से चिट्टी प्राप्त की, जो बहरे लोगों के लिए संकेतिक भाषा की व्याख्याकार हैं। मैं समझ गया कि दिव्यांग लोगों को स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करना कितना कठिन है। अतः हम उन लोगों के लिए प्रार्थना करें जो हमेशा विभिन्न प्रकार के दिव्यांग लोगों की सेवा करते हैं।"

संत पापा ने प्रवचन में साहस पर प्रकाश डाला जिसके द्वारा शिष्यों ने पेंतेकोस्त के बाद सुसमाचार का प्रचार किया था। पहले पाठ (प्रे.च 4.13-21) में याजक, मंदिर आरक्षी का नायक और सदूकी, पेत्रुस एवं योहन के साहस से चकित हो गये।  

साहस

संत पापा ने कहा, "पेत्रुस और योहन दो अशिक्षित व्यक्तियों ने याजकों, मंदिर आरक्षी के नायकों और सदूकियों को अपने साहस द्वारा अचंभित कर दिया। धार्मिक नेता इतने प्रभावित थे कि वे अपनी नजरों के सामने सच्चाई का कोई उत्तर नहीं दे पाये जहाँ पेत्रुस और योहन द्वारा प्रभु का नाम लेने पर एक व्यक्ति चंगा हो गया था।"

संत पापा ने ग्रीक शब्द पर्रेसिया के महत्व पर ध्यान आकृष्ट किया। जिसका अनुवाद अक्सर साहस, स्पष्टवादिता अथवा पराक्रम के रूप में की जाती है। यह प्रेरित चरित में ख्रीस्तियों की प्रचारशैली बन गयी थी।    

संत पापा ने कहा, "यह ख्रीस्तीय साहस है जो व्यक्ति को खुले रूप में बोलने के लिए प्रेरित करता है... उदाहरण के लिए, प्रेरित-चरित हमें बतलाता है कि पौलुस और बर्नाबस, इब्रानियों को ख्रीस्त का रहस्य, साहस के साथ बतलाना एवं सुसमाचार का प्रचार बिना भय करना चाहते थे।”

साहस को बनाये रखें

संत पापा ने कहा कि पर्रेसिया ख्रीस्तियों की विशेषता है पर यदि एक ख्रीस्तीय में इसका अभाव हो तो वह सच्चा ख्रीस्तीय नहीं है। संत पापा ने इब्रानियों के पत्र के एक परिच्छेद की याद दिलायी जिसको वे पसंद करते हैं। परिच्छेद में लेखक सचेत है कि ख्रीस्तीय समुदाय अपना मूल साहस खो चुका है। वह गुनगुना हो गया है। लेखक लिखते हैं, "आप लोग उन बीते दिनों की याद करें, जब आपलोग त्योति मिलने के तुरन्त बाद, दुखों के घोर संकट का सामना करते हुए दृढ़ बने रहे।” (इब्रा. 10:32, 35) संत पापा ने कहा कि यहाँ साहस ने कठोर, बंद और भ्रष्ट हृदयवाले याजकों, सदुकियों एवं वयोवृद्धों से मुलाकात की थी। "वे नहीं जान रहे थे कि क्या करें...वे अचंभित थे। सच्चाई जिसको उन्होंने देखा था उसको स्वीकार करने के बदले, उनका हृदय बंद हो गया और उन्होंने समझौता करने का रास्ता अपनाया। उनके साहस के सामने वे सचमुच कोने पर आ गये थे। वे इस परिस्थिति से बाहर निकलना नहीं जान रहे थे। उनके मन में कभी नहीं आया कि क्या यह सच हो सकता है?’”

डरपोक पेत्रुस कैसे बदल गया?

उन्होंने पेत्रुस एवं योहन को धमकाया और आदेश दिया कि येसु के नाम पर वे फिर कभी न बोलें और न ही शिक्षा दें। इसपर शिष्यों का जवाब अत्यन्त साहसपूर्ण था जबकि पेत्रुस डर से येसु को कुछ ही दिनों पहले इन्कार कर दिया था, "आपलोग स्वयं निर्णय करें, क्या ईश्वर की दृष्टि में यह उचित होगा कि हम ईश्वर की नहीं बल्कि आप लोगों की बात मानें। संत पापा ने कहा कि इस व्यक्ति के हृदय को क्या हुआ?”

उन्होंने कहा, यह पवित्र आत्मा का वरदान: स्पष्टवादिता, साहस और पर्रेसिया है जिसको पवित्र आत्मा ने उन्हें पेंतेकोस्त के दिन प्रदान किया था। पवित्र आत्मा ग्रहण करने के तुरन्त बाद वे साहस पूर्वक सुसमाचार का प्रचार करने बाहर निकले, जो उनके लिए नया था।

ख्रीस्तीय होने का चिन्ह

संत पापा ने कहा कि सुसमाचार में येसु उन्हें डांटते थे (मार 16:9-15) खासकर, इसलिए क्योंकि उनका हृदय अविश्वासी और कठोर था। वे उन लोगों के कथन को भी विश्वास नहीं कर पा रहे थे जिन्होंने प्रभु का दर्शन किया था। वे अब साहस प्राप्त करते हैं ताकि सारी सृष्टि को सुसमाचार सुना सकें, जब येसु ने उन्हें पवित्र आत्मा का सामार्थ्य प्रदान किया। "पवित्र आत्मा को ग्रहण करो।"

मिशन की शुरूआत यहाँ से होती है जब हम इस कृपा द्वारा साहस प्राप्त करते एवं निर्भीक होकर सुसमाचार का प्रचार करते हैं।

संत पापा की प्रार्थना

संत पापा ने प्रार्थना की कि "प्रभु हमें उसी तरह हमेशा साहसी बनने में मदद दें। जिसका अर्थ अविवेकी होना नहीं है। ख्रीस्तीय साहस, हमेशा विवेकी होता है किन्तु साहसी भी।"

18 अप्रैल को संत पापा का ख्रीस्तयाग संत मार्था चैपल से
18 April 2020, 15:36
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