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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

संचार मीडिया कर्मियों के लिए संत पापा ने की प्रार्थना

पवित्र मिस्सा के दौरान, संत पापा ने संचार मीडिया में काम करने वालों के लिए प्रार्थना की ताकि इस कठिन समय में लोगों को अलगाव की अवधि को बिताने में मदद मिल सके। अपने प्रवचन में संत पापा ने याद दिलाया कि येसु का शिष्य एक स्वतंत्र व्यक्ति है, परंपरा और नवीनता का व्यक्ति है, क्योंकि वह पवित्र आत्मा द्वारा निर्देशित होता है न कि विचारधाराओं द्वारा।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार 1 अप्रैल 2020 (रेई) : वाटिकन के संत मर्था प्रार्थनालय में बुधवार सुबह संत पापा फ्राँसिस ने पवित्र मिस्सा शुरु करने से पहले मीडिया कर्मियों को याद कर उनके लिए प्रार्थना किया जो अलगाव के इस समय को सहन करने और बिताने में मदद करने के लिए काम कर रहे हैं, ताकि लोग इतने अलग-थलग न हों, वे बच्चों की शिक्षा के लिए भी काम कर रहे है।

अपने प्रवचन में संत पापा ने संत योहन के 8वें अध्याय पर चिंतन किया। संत पापा ने येसु की पहचान को लेकर पंडितों और येसु के बीच हुए चर्चा पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा कि येसु, अंततः उन पंडितों को चुप करा देते हैं जिन्होंने अपमान और निन्दा का सहारा लिया था, यहां तक कि उनकी माता का भी अपमान किया था।

येसु में बने रहें

जो लोग येसु पर विश्वास करते हैं उन्हें वे कहते हैं, "यदि तुम मेरी शिक्षा पर दृढ़ रहोगे, तो सचमुच मेरे शिष्य सिद्ध होगे।" (योहन 8:31)। "रहना" एक महत्वपूर्ण शब्द है। येसु अक्सर इसे दोहराते हैं, अतिंम व्यारी में भी उनहोंने शिष्यों को अपने साथ बने रहने के लिए कहा था। संत पापा ने कहा कि प्रभु ने शिक्षा और सीखने पर जोर नहीं दिया इसके बजाय येसु ने अपने चेलों को उसके वचनों और उसमें बने रहने के लिए कहा था।

एक ख्रीस्तीय की पहचान

संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि एक ख्रीस्तीय की पहचान शिष्यत्व है। "यदि आप प्रभु के वचन में और प्रभु में बने रहते हैं तो आप प्रभु के शिष्य हैं। लेकिन यदि आप येसु से संयुक्त नहीं है और उनके बताये मार्ग की सराहना करते हैं, एक अच्छे और दयालु व्यक्ति के रूप में येसु की प्रशंसा करते हैं, तो आप सही अर्थों में येसु के शिष्य नहीं हो सकते।"

शिष्यत्व हमें स्वतंत्र करता है

संत पापा ने कहा कि "शिष्य वह है जो स्वतंत्र है क्योंकि वह प्रभु में बना रहता है।" शिष्य होने का अर्थ है स्वयं को पवित्र आत्मा द्वारा निर्देशित होने देना। “इसीलिए शिष्य हमेशा परंपरा और नवीनता का व्यक्ति होता है, एक स्वतंत्र व्यक्ति… कभी भी विचारधाराओं के अधीन नहीं होता। वह व्यक्ति प्रभु में बना रहता है और पवित्र आत्मा ही है जो उसे प्रेरित करता है।” संत पापा ने कहा कि शिष्यत्व एक अभिषेक है। जो लोग प्रभु में बने रहते हैं वे इसे प्राप्त करते हैं।

अपने प्रवचन के अंत में संत पापा ने प्रभु से बने रहने और पवित्र आत्मा से निर्देशित होने के लिए कृपा मांगने हेतु प्रेरित किया। "प्रभु हमें अपने से संयुक्त रहने के इस ज्ञान को समझने में मदद करें।"   

01 April 2020, 14:17
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