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संत पापा फ्राँसिस संत मर्था में मिस्सा अर्पित करते हुए संत पापा फ्राँसिस संत मर्था में मिस्सा अर्पित करते हुए  (ANSA)

कोविद-19:राजनेताओं और वैज्ञानिकों को याद किया सन्त पापा ने

वाटिकन स्थित सन्त मर्था प्रेरितिक आवास के प्रार्थनालय में सोमवार को ख्रीस्तयाग अर्पण के अवसर पर सन्त पापा ने राजनेताओं और वैज्ञानिकों के लिए प्रार्थना की, कि वे कोविद -19 का सही समाधान निकाल सकें, जो लोगों के पक्ष में हो।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

 वाटिकन सिटी, सोमवार 13 अप्रैल 2020 (रेई) : वाटिकन स्थित सन्त मर्था प्रेरितिक आवास के प्रार्थनालय में पास्का अठवारे के प्रथम दिन, सोमवार को ख्रीस्तयाग अर्पण के अवसर पर सन्त पापा फ्राँसिस ने शासकों, राजनेताओं और वैज्ञानिकों को याद किया जो कोरोना वायरस महामारी को रोकने और सही समाधान की खोज में लगे हुए हैं।

संत पापा ने कहा, ʺहम आज के शासकों, वैज्ञानिकों, राजनेताओं के लिए प्रार्थना करते हैं, जिन्होंने कोरोना वायरस महामारी से और उसके कुप्रभाव बाहर निकलने के तरीके का अध्ययन करना शुरू कर दिया है। सही रास्ता हमेशा लोगों के पक्ष में हो।ʺ

पुनर्जीवित प्रभु की घोषणा

अपने प्रवचन में, संत पापा फ्राँसिस ने आज के सुसमाचार (मत्ती 28, 8-15) पाठ पर चिंतन किया, जहाँ पुनर्जीवित येसु कुछ महिलाओं से अपने शिष्यों को गलील जाने के लिए कहते हैं : वे उसे वहां देखेंगे।

संत पापा ने कहा, ʺआज का सुसमाचार हमें एक विकल्प, एक रोजमर्रा का विकल्प, एक मानवीय विकल्प प्रस्तुत करता है: कब्र में डाले जाने की उदासीनता और येसु के पुनरुत्थान की आशा के बीच की खुशी का विकल्प।ʺ

संत पापा ने कहा कि ईश्वर ने महिलाओं को प्रभु के जी उठने की घोषणा करने का पहला अवसर दिया। उन्हें संदेह नहीं था, वे जानती थीं, उन्होंने उसे देखा, उन्होंने उसे छू लिया। उन्होंने खाली कब्र को भी देखा था। यह सच है कि शिष्यों ने उनकी बातों पर विश्वास नहीं किया और कहा, "ये महिलाएं शायद बहुत ही संवेदनशील हैं।" संत पापा ने कहा कि चेलों ने उस समय तो उनकी बातों पर विश्वास नहीं किया। परंतु यही सत्य है कि हमारे प्रभु जी उठे हैं और हमारे बीच विराजमान हैं। संत पापा ने कहा कि खाली कब्र के साथ रहना बेहतर नहीं है। हमारे सामने बहुत सारी समस्यायें हैं, तथ्य को छिपाने का निर्णय, यह खाली कब्र के साथ रहने के समान है।

दो मालिक की सेवा

संत पापा ने याद दिलाया कि कोई भी दो मालिक की सेवा नहीं कर सकता। या तो ईश्वर की सेवा या धन की सेवा। तथ्य को छिपाने का निर्णय लेते हुए महायाजकों और फरीसियों ने दूसरे रास्ते को चुना। महायाजकों ने नेताओं से मिलकर पहरेदारों को मोटी रकम दे दी और यह कहने को कहा कि जब वे सो रहे थे तो शिष्यों ने आकर येसु को चुरा ले गये। संत पापा ने याद दिलाया कि जैसे ही येसु की मृत्यु क्रूस पर हुई, वहाँ उपस्थित एक सैनिक ने कबूल किया था, "निश्चय ही यह ईश्वर का पुत्र था!" पहरेदारों ने रुपया ले लिया और वैसा ही किया जैसा महायाजकों ने कहा। संत पापा ने कहा, सत्य को छिपाने के लिए उन्हें रिश्वत दिया गया। यह रिश्वत नहीं है: यह पक्का भ्रष्टाचार है।

धन का कब्र

संत पापा ने कहा, ʺयदि आप येसु मसीह को प्रभु स्वीकार नहीं करते हैं, तो सोचें कि आप खाली कब्र के साथ हैं जहां भ्रष्टाचार है। यह सच है कि बहुत से लोग येसु को स्वीकार नहीं करते हैं क्योंकि वे उसे नहीं जानते हैं, क्योंकि हमने लगातार उसकी घोषणा नहीं की है और यह हमारी गलती है। लेकिन जब हम सबूतों का रास्ता अपनाते हैं, तो यह शैतान का रास्ता है, यह भ्रष्टाचार का रास्ता है। आप भुगतान करें और चुप रहें।ʺ

संत पापा ने कहा, ʺहमारी उम्मीद है कि जल्द ही इस महामारी को हम समाप्त कर पायेंगे। हमारे पास दो विकल्प है, या तो लोगों के जीवन, उनकी भलाई के लिए होगी या रुपये के देवता के लिए होगी,धन का कब्र जहाँ भुखमरी, गुलामी, युद्ध, हथियारों के कारखाने, शिक्षा से वंचित बच्चे होंगे।ʺ

अपने प्रवचन के अंत में संत पापा ने कहा, ʺप्रभु, हमारे व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में हमेशा सही घोषणा का चयन करने में हमारी मदद करें : घोषणा जो क्षितिज है, जो हमेशा लोगों की भलाई हेतु हमारा नेतृत्व करती है। हम कभी भी धन के कब्र में न गिरें।ʺ

13 April 2020, 15:13
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