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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

कठिनाई से जूझते परिवारों के लिए संत पापा की प्रार्थना

संत पापा फ्राँसिस ने प्रातःकालीन पवित्र मिस्सा के दौरान इस कठिन परिस्थिति से जूझते परिवारों के लिए प्रार्थना की। संत पापा ने विकलांग लोगों के लिए भी एक विशेष प्रार्थना की।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार 14 मार्च 2020 (रेई) :  शनिवार 14 मार्च को वाटिकन स्थित सन्त मार्था प्रेरितिक आवास के प्रार्थनालय में संत पापा फ्राँसिस ने प्रातःकालीन पवित्र मिस्सा शुरु करने से पहले उन सभी परिवारों को याद किया जो इस समय कोविद -19 महामारी के कारण कठिन परिस्थिति से गुजर रहे हैं। सभी बच्चे स्कूल जाने के बजाय अपने घरों में बंद हैं। कुछ परिवारों में विकलांग लोग भी हैं, उनके लिए बने "देखभाल केंद्र" बंद होने की वजह से उनकी रेखरेख का पूरा भार परिवारों पर पड़ रहा है। इस कठिन परिस्थिति में भी परिवारों में शांति और खुशी बनी रहे।

संत पापा ने अपने उपदेश में संत लूकस रचित सुसमाचार से लिए गये पाठ (लूक. 15, 1-3. 11-32) पर चिंतन किया जो उड़ाव पुत्र का दृष्टांत है। संत पापा ने कहा कि हमने इस सुसमाचार पाठ को कई बार पढ़ा और सुना होगा। पाठ बताता है कि येसु का उपदेश सुनने नाकेदार और पापी आया करते थे। येसु उनकी बातें सुनते और उनके साथ उठते- बैठते, खाते-पीते थे। उनके साथ येसु को देख शास्त्री और फरीसी उनकी आलोचना करते हुए भुनभुनाते थे। संत पापा ने कहा कि ये लोग जिसे फरीसी पापी कहते हैं वे येसु के वचनों को सुनने और अपनी मुक्ति की आवश्यकता को महसूस कर रहे थे। वे एक ऐसे व्यक्ति को खोज में थे जो उनका मार्गदर्शन कर सके, जबकि फरीसी और शास्त्री अपने आप को ज्ञानी और खुद में संतुष्ट, पापियों से घृणा करते थे।

छोटे बेटे का दुःस्साहस

संत पापा ने कहा, आज के दृष्टांत में छोटे बेटे ने जाकर अपने पिता से यह कहते हुए सम्पत्ति मांगी, "सम्पत्ति का जो भाग मेरा है वह मुझे दे दीजिए।" पिता बिना कुछ बोले सम्पत्ति का हिस्सा अपने बेटे को देता है। वह चुपचाप दुःख सहता है। वह डांटता फटकारता भी नहीं है और अपने बेटे को जाने देता है। पिता अपने बेटे के वापस लौटने का इन्तजार बड़ी बेसब्री से करता है। सालों बाद छोटा बेटा अपनी गलतियों का एहसास करते हुए और अपने पिता के प्रेम को याद कर वापस लौटता है तो पिता अपना दुःख भूलकर उसका आलिंगन करता है। वह उससे कुछ भी नहीं पूछता है। घर में खुशी का माहौल छा जाता है।

बड़े बेटे की प्रतिक्रिया

संत पापा ने कहा कि छोटे बेटे का वापस आना बड़े बेटे को अच्छा नहीं लगा। अपनी अप्रसन्नता दिखाते हुए अपने पिता से कहा कि वह अपने पिता की आज्ञाओं का पालन करता आ रहा है परंतु उसके लिए पिता ने कभी समारोह का आयोजन नहीं किया। संत पापा ने कहा कि बड़ा बेटा अपने पिता के प्रेम का अनुभव नहीं कर पाया था। उसे परिवार का बड़ा बेटा होने का एहसास नहीं  हुआ था और इसलिए वह अपने पिता के उदार दिल को समझ नहीं पाया। संत पापा ने कहा कि फरीसी और शास्त्री भी ईश्वर के नियमों का अक्षरशः पालन करते थे परंतु ईश्वर के प्रेम को समझ नहीं पाये थे।

पारिवारिक माहौल

संत पापा ने कहा कि आज अनेक परिवारों में माता-पिता और बच्चों के बीच आपसी संबंध की कमी है। अनेक घरों में लोग एक साथ रहते तो हैं पर होटलों की भांति जीवन जी रहे हैं। पल्लियाँ सभी लोगों के लिए है और पल्लियों में सभी का स्वागत होना चाहिए पर कभी-कभी पल्ली पुरोहित पल्ली में अपनी भेड़ों का चरवाहा बनने के बजाय मालिक बन जाता है और अन्य पुरोहितों की आलोचना करता है जो गरीबों और जरुरतमंदों की सेवा करते हैं।

संत पापा ने अपने प्रवचन को अंत करते हुए ईश्वर से कृपा मांगी। "आइये,आज हम पिता ईश्वर के प्रेम और उदारता को समझने और अनुभव करने हेतु कृपा मांगें। छोटे बेटे की भांति अपनी गलतियों का एहसास करते हुए पिता ईश्वर के पास लौटें। अपने भाइयों और बहनों के साथ आपसी प्रेम एवं भाईचारे में जीवन बितायें।"

14 March 2020, 12:11
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