खोज

Vatican News
संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

उदासीन ख्रीस्तीय ईश्वर को दरकिनार कर देते हैं, संत पापा

सोमवार को अपने प्रेरितिक आवास संत मार्था के प्रार्थनालय में पवित्र मिस्सा के दौरान संत पापा ने उदासीन ख्रीस्तियों के दो दृष्टिकोणों का वर्णन किया - "ईश्वर को एक कोने में रखना और उनके प्रति अपने उत्तरदायित्व से हाथ धोना।"

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार 16, दिसम्बर 2019 (रेई) : संत पापा फाँसिस ने सोमवार 16 दिसम्बर को प्रातःकालीन पवित्र मिस्सा के दौरान दैनिक सुसमाचार पाठ (मत्ती21:23-27), पर चिंतन किया जहाँ प्रधान याजक ने येसु को उनके शिक्षण अधिकार के बारे में प्रश्न करते हैं।

येसु ने याजकों द्वारा पूछे गये प्रश्न के जवाव में पुनः एक प्रश्न पूछा कि संत योहन का बपतिस्मा कहाँ का था स्वर्ग का या मनुष्यों का। वे कोई उत्तरदायित्व नहीं लेना चाहते थे अतः उन्होंने कहा कि वे नहीं जानते हैं।

संत पापा ने कहा कि याजकों का प्रश्न उदासीन ख्रीस्तियों के मनोभाव को दिखाता है वे ईश्वर को एक कोने में रखने और उनके प्रति अपने उत्तरदायित्व से हाथ धो देते हैं।" संत पापा ने उनके मनोभाव को बहुत ही खतरनाक कहा क्योंकि वे ईश्वर को मानो चुनौती दे रहे हों। अगर ईश्वर हमारे साथ एसा करेंगे तो हम कभी भी स्वर्ग नहीं जा पायेंगे।

दो इच्छाधारी नजरिया

संत पापा ने कहा कि येसु ने लोगों को मंदिर में शिक्षा दी और लोगों को चंगा किया। येसु की दयालुता और चंगा करने के कारण बहुत से लोग येसु के पीछे हो लिये। इससे मुख्य याजकों और फरीसियों के कामें में बाधा पैदा हो गई। इसलिए धर्मगुरुओं ने उनके अधिकार को चुनौती दी।

संत पापा ने कहा, येसु ने बुद्धिमानी से जॉन बपतिस्ता के अधिकार के बारे में पूछकर उनके प्रश्नों को वापस लौटा दिया। याजक और फरीसी जॉन बपतिस्ता पर विश्वास नहीं करते थे लेकिन उसके समर्थकों के डर से विरोध नहीं करते थे। संत पापा ने कहा कि याजक सच्चाई जानते थे परंतु विश्वास करना नहीं चाहते थे। वे चुनौती लेना नहीं चाहते थे । जैसे पिलातुस ने सबके सामने अपने हाथ धो लिये, उसी तरह इन याजकों ने भी अपने हाथ धो लिये थे।

‘गुलाब जल ख्रीस्तीय’

संत पापा ने कहा कि येसु ने अपने पूछने वालों को उसी भावना में जवाब दिया : "न तो मैं आपको बताऊंगा कि मैं किस अधिकार से यह सब करता हूँ।"

"ये उदासीन ख्रीस्तियों के दो दृष्टिकोण हैं। संत पापा ने कहा कि उनकी दादी इस तरह के लोगों के गुलाब जल ख्रीस्तीय,बिना पेंदे के ख्रीस्तीय कहा करती थी। वे ईश्वर को एक कोने में रखते हैं: तुम मेरे लिए ऐसा करो नहीं तो मैं गिरजा नहीं जाऊँगा।  येसु इसपर कैसे जवाब देते हैं?  “ठीक है जाओ। इससे खुद निपटो।”

उदासीनता

संत पापा ने कहा कि बहुत से ख्रीस्तीय अपने जीवन में आने वाली छोटी चुनौती को भी सामना कर नहीं पाते। बहुत बार वे अपने हाथ धो देते हैं । संत पापा ने उदाहरण देते हुए कहा, कुध ख्रीस्तीय इसलिए गरीब व्यक्ति को पैसे नहीं देते क्योंकि वे साचते हैं कि वह शराब में उसका पैसा उड़ा देगा.. और इस तरह उदारता दिखाने के बदले अपना हाथ धो देते हैं... वे ईश्वर को भी दरकिनार कर बैठते हैं। उनका यह मनोभाव बहुत ही खतरनाक है क्योंकि वे ईश्वर को भी चुनौती देते हैं। हम सोच नहीं सकते, अगर ईश्वर भी हमारे साथ इस तरह का बर्ताव करे और हमें दरकिनार कर दे,तो हम कभी भी स्वर्ग में प्रवेश नहीं कर पायेंगे।  

उनका मार्ग सीधा करें

अंत में, संत पापा फ्राँसिस ने प्रत्येक को अपने आप से पूछने हेतु आमंत्रित किया, “इनमें से कौन सा मनोभाव मेरे अंदर है? आइये, हम "प्रभु से उनके लिए मार्ग सीधा करने हेतु कृपा मांगे।”

16 December 2019, 16:35
सभी को पढ़ें >