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संत पापा फ्राँसिस संत मर्था में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा फ्राँसिस संत मर्था में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए  (Vatican Media)

अपनी मृत्यु की घड़ी को प्रभु पर आशा और भरोसा से देखें, संत पापा

संत पापा फ्राँसिस ने प्रवचन में नश्वर अंत, मृत्यु पर चिंतन करते हुए उसे प्रभु से मुलाकात की घड़ी कहा, जिसके लिए हमें तैयार रहना चाहिए।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 30 नवम्बर 2019 (रेई)˸ शुक्रवार को संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन के प्रेरितिक आवास संत मर्था में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए स्मरण दिलाया कि पूजन पद्धति वर्ष के अंतिम सप्ताह में कलीसिया हमें अंत पर चिंतन करने हेतु प्रेरित करती है जो दुनिया से हमारे जीवन का अंत है और हम सब समाप्त हो जायेंगे।

उन्होंने कहा कि यह बात संत लूकस रचित सुसमाचार से लिया गया है जिसमें येसु कहते हैं, स्वर्ग और पृथ्वी का अंत हो जाएगा, केवल मेरे शब्द रह जायेंगे।

मानव मूल्य

संत पापा फ्राँसिस ने अपने प्रवचन में विश्वासियों को निमंत्रण दिया कि वे अपनी मृत्यु के क्षण पर चिंतन करें। उन्होंने कहा, "कोई नहीं जानता कि यह कब होगा, किन्तु हम उस विचार को छोड़ देते और अपने आपको अमर मान लेते हैं पर यह ऐसा नहीं है।"

"हम सभी कमजोर है। संत पापा ने जेस्विट प्रकाशन चिवित्ता कथोलिका में प्रकाशित उस सच्चाई पर प्रकाश डाला कि दुर्बलता एक ऐसी चीज हैं जो हम सभी में है। हम सभी कमजोर हैं और यह कमजोरी हमें निश्चित बिंदु तक मृत्यु की ओर ले जाती है।" उन्होंने याद दिलाया कि हम किस तरह डॉक्टर अथवा मनोवैज्ञानिक के पास शारीरिक और मानसिक चंगाई की खोज में जाते हैं।

प्रभु पर आशा

संत पापा ने बतलाया कि उनके देश में कुछ लोग अपनी दफन क्रिया के लिए पहले ही पैसा चुका देते थे ताकि परिवारवालों को पैसा के लिए तकलीफ न हो किन्तु जब यह बात प्रकाश में आयी कि कुछ दफन क्रिया कम्पनी के लोग धोखा दे रहे थे तो इस तरह का चलन खत्म हो गया।

संत पापा ने कहा, "कई बार हम भ्रम में धोखा खाते हैं" खासकर, अमर होने के भ्रम में। मृत्यु निश्चित है ऐसा बाईबिल और सुसमाचार में लिखा गया है" किन्तु प्रभु हमें इसे एक मुलाकात के रूप में प्रस्तुत करते हैं, अपने साथ मुलाकात जिसमें वे आशा शब्द भी जोड़ देते हैं।

"प्रभु हमें मुलाकात हेतु तैयार रहने को कहते हैं, मृत्यु एक मुलाकात है। वे हमारे साथ मुलाकात करने आते हैं। वे ही हैं जो हमारा हाथ पकड़कर हमें लेने आते हैं और अपने साथ ले जाते हैं।" प्रभु हम प्रत्येक के द्वार पर एक दिन दस्तक देंगे। अतः यह आवश्यक है कि हम उस पल के लिए अपने आपको तैयार रखें।

उन्होंने अंत में उन्होंने निमंत्रण दिया कि वे इसके लिए तैयार रहें, अपनी मृत्यु पर चिंतन करें...एक दूसरे के लिए प्रार्थना करें ताकि जब प्रभु आयेंगे, तब हम भरोसा और साहस के साथ द्वार खोल सकेंगे ।

उन्होंने ईश्वर से भले मरण पाने के लिए प्रार्थना करने की सलाह दी ताकि हम हृदय को शांति से मरने, आशा के साथ चले जाने के लिए तैयार कर सकें।"

30 November 2019, 16:35
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