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संत मर्था में पावन याग संत मर्था में पावन याग  (ANSA)

ईश वचन को ग्रहण करना, हमें आनन्द से भर देता है

ईश वचन को सुनना हमें आनन्द से भर देता है और यही हमारी शक्ति है। यह बात संत पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार को वाटिकन के प्रेरितिक आवास स्थित संत मर्था प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए कही। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ईश वचन के बिना रविवार के पर्व को नहीं समझा जा सकता।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 3 अक्टूबर 2019 (रेई)˸ 3 अक्टूबर को ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में संत पापा ने कहा कि हम ईश्वर के वचन को आनन्द से सुनने के लिए अपना हृदय खोलें। उन्होंने मिस्सा के पाठों को ध्यान से सुनने की सलाह दी ताकि यह एक कान प्रवेश कर दूसरे कान से बाहर न निकल जाए।

संत पापा ने प्रवचन में नबी नहेम्या के ग्रंथ से लिए गये पाठ पर चिंतन किया जिसमें ईश प्रजा द्वारा ईश्वर के वचन को सुनने की घटना का वर्णन किया गया है। यह मंदिर के पुनःनिर्माण की कहानी है, यहूदियों के प्रवास से लौटने की कहानी। कहानी में जनता के नेता, प्रशासक, नहेम्या, एज्रा शास्त्री और धर्मग्रंथ को खोले जाने का जिक्र है। समस्त इस्राएली जलद्वार के सामने चौक में एकत्रित थे और एज्रा ने मूसा की संहिता का पाठ किया और उसकी व्याख्या की। संत पापा ने विश्वासियों का ध्यान इस बात की ओर आकृष्ट किया कि ईस वचन का पाठ लम्बे समय से नहीं हो पाया था और ईश्वर के वचन के माध्यम से लोग अपने ईश्वर से मुलाकात कर रहे थे।          

ईश वचन के लिए लोगों की भूख

संत पापा ने ईश्वर के वचन के प्रति इस्राएली लोगों के विपरीत हमारी रूचि पर प्रकाश डालते हुए कहा, "हम इस किताब से, जिसमें ईश्वर का वचन है आदी हो चुके हैं।" यह सही नहीं है। एज्रा के समय के लोग ईश वचन से वंचित हो गये थे। उन्हें इसकी भूख थी अतः जैसे ही उन्होंने पवित्र धर्मग्रंथ को देखा वे उठकर खड़े हो गये।  

नहेम्या और एज्रा ने लोगों को सिखलाया था कि "यह दिन प्रभु के लिए समर्पित है।" संत पापा ने कहा कि यही दिन हमारे लिए रविवार को निर्धारित है। रविवार का दिन प्रभु से मुलाकात करने का दिन है। यह मेरे लिए, परिवारों के लिए ख्रीस्त ने मिलने का दिन है। यह प्रभु के लिए समर्पित है।

ईश वचन के बिना रविवार के उत्सव को नहीं समझा जा सकता

संत पापा ने कहा, "यही कारण है कि नहेम्या, एज्रा और अन्य पुरोहितों ने लोगों को उदास नहीं होने और शोक नहीं मनाने का प्रोत्साहन दिया, क्योंकि वे संहिता का पाठ सुनकर रो रहे थे। संत पापा ने कहा कि वे भावुक होकर आनन्द से रो रहे थे।

संत पापा ने चिंतन हेतु प्रेरित करते हुए कहा, "जब हम ईश वचन सुनते हैं हमारे हृदय में किस तरह की प्रतिक्रया होती है? क्या मैं ईश वचन पर ध्यान देता हूँ? क्या मैं इसे अपने हृदय का स्पर्श करने देता हूँ अथवा क्या मैं दूसरी चीजों की चिंता करते हुए खड़ा होकर छत की ओर ताकता हूँ और क्या ईश वचन मेरे एक कान से प्रवेश कर दूसरे कान से निकल तो नहीं जाता? क्या यह मेरे हृदय तक पहुँच पाता है? मैं ईश वचन को अपने हृदय में ग्रहण करने के लिए किस तरह तैयारी करता हूँ? जब ईश वचन मेरे हृदय में पहुँचता है तो क्या मेरी आँखों से आनन्द के आँसू निकल पड़ते हैं? ईश वचन के बिना रविवार के पर्व को नहीं समझा जा सकता।" नहेम्या ने लोगों से कहा था, "जाकर रसदार मांस खाओ, मीठी अंगुरी पी लो और जिसके लिए कुछ नहीं बन सका उसके पास कुछ हिस्सा भेज दो क्योंकि यह दिन हमारे प्रभु के लिए पवित्र है।" प्रभु हमें अपने इस पर्व में गरीबों को शामिल करने का प्रोत्साहन देते हैं।

आनन्द के लिए अपना हृदय खोलना, उदासी में हमारी शक्ति नहीं

संत पापा ने कहा कि उदासी हमारी शक्ति नहीं है जबकि प्रभु का वचन हमें आनन्दित करता है। प्रभु के वचनों को सुनना हमें आनन्द से भर देता है। यही आनन्द हमारी शक्ति है हमारा बल है। ख्रीस्तीय प्रसन्नचित होते हैं क्योंकि उन्होंने ईश वचन को अपने हृदयों में ग्रहण किया है। वे उनके साथ मुलाकात करते और उनकी खोज करते हैं। यही संदेश आज हमारे लिए है। हम चिंतन करे कि हम किस तरह प्रभु के वचन को सुनते हैं जो बाईबिल से प्राप्त होते हैं?

संत पापा ने कहा, "शैतान तुरन्त हमारे हृदय में उदासी भर देता है जबकि प्रभु का आनन्द हमें उठाता, ऊपर देखने और गाने एवं खुशी के आँसू बहाने के लिए प्रेरित करता है।"

संत पापा ने अंत में विश्वासियों के लिए प्रार्थना की कि प्रभु हमारे हृदयों को उनके वचनों को सुनने हेतु खोलने की कृपा दे और आनन्द से नहीं घबराने, आनन्द के पर्व को मनाने से नहीं डरने के लिए कृपा दे ताकि हम उस आनन्द को प्राप्त कर सकें जो ईश्वर के वचन को सुनने से प्राप्त होता है।

04 October 2019, 11:30
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