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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

मिशन एक कृपादान है, कोई कार्य अथवा कार्य-संधि नहीं

वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में बृहस्पतिवार को ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा फ्राँसिस ने इस बात को रेखांकित किया कि जब हम कृपादान को अपने आप के लिए केंद्रित करते हैं तब हम इसे अपने कार्य में बदल देते हैं और मिशन के मूल उद्देश्य को खो देते हैं, चाहे हम पुरोहित हों अथवा धर्माध्यक्ष।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 19 सितम्बर 2019 (रेई)˸ उन्होंने कहा कि येसु ने उपयाजकों, पुरोहितों और धर्माध्यक्षों को कृपादान प्रदान किया ताकि वे दूसरों की सेवा कर सकें।

संत पापा ने कहा, "मिशन के लिए अभिषेक ईश्वर से मिला एक वरदान है। जिन्होंने हमपर नजर डालकर कहा था, मेरा अनुसरण करो। यह एक सेवा है न कि कोई कार्य अथवा कार्य-संधि।" संत पापा ने रजत जयन्ती मनाने वाले पुरोहितों एवं धर्माध्यक्षों के सामने ये बातें कहीं, जो उनके साथ ख्रीस्तयाग में भाग ले रहे थे। उन्होंने उन्हें तिमोथी को लिखे संत पौलस के पत्र पर चिंतन करने हेतु प्रेरित किया, जिसमें मिशन को एक कृपादान कहा गया है। संत पौलुस कहते हैं, "उस कृपादान की उपेक्षा मत करो, जो तुम में विद्यमान है और तुम्हें, भविष्यवाणी के अनुसार, अध्यक्ष-समुदाय के हस्तारोपण के समय प्राप्त हो गया है।"

संत पापा ने कहा, "यह एक पेशा के लिए संधि नहीं है जिसको मुझे करना है।" काम करना दूसरे स्थान पर है। महत्वपूर्ण बात ये है कि मुझे कृपादान को ग्रहण करना है और उसकी देखभाल करनी है तथा उसपर चिंतन करने से बाकी चीजें निकलती हैं एवं कार्य रूप लेती हैं। जब हम मिशन के इस स्वभाव को खो देते और इसे कार्य रूप देते हैं तब हम मिशन के मूल को खो देते तथा येसु की नजर को भी खो देते हैं जो हमारी ओर देखते और कहते हैं, "मेरा अनुसरण करो।"  

आत्मकेंद्रित मिशन की जोखिम

तब संत पापा ने सभी को चेतावनी दी कि हम मिशन को आत्मकेंद्रित कार्य में बदलने की जोखिम से बचें।

उन्होंने कहा, "यदि हम उस कृपादान पर चिंतन नहीं करते हैं जिसको हमने ग्रहण किया है तब हम कल्पना कर सकते हैं कि सभी झुकावों को हटा दिया गया है...जो हमारे दैनिक जीवन के लिए खतरनाक है- यह मिशन को बनाने के लिए प्रेरित करता है जबकि यह ईश्वर प्रदत्त मुफ्त वरदान है और उनके प्रति हमारा प्रेम, जिन्होंने हमें मिशन हेतु कृपादान प्रदान किया है।"

पहले चिंतन फिर कार्य

संत पापा ने उपयाजकों, पुरोहितों और धर्माध्यक्षों को उनके मिशन और सेवा को एक कृपादान के रूप में चिंतन करने का निमंत्रण दिया। हम वह सब कुछ करते हैं जिसे अच्छे मतलब, ज्ञान और कभी-कभी थोड़ी चालाकी से भी करते हैं किन्तु हमेशा कृपादान की हिफाजत करें।   

गलती करना मानवीय स्वभाव है जैसा कि पाठ में फरीसी ने किया येसु का स्वागत करने के क्रम में आतिथ्य के कई नियमों का पालन नहीं कर पाया।

संत पापा ने कहा कि वह एक अच्छा फरीसी था किन्तु उसने शिष्टाचार के कृपादान को भूला दिया। उपहारों को हमेशा भूला दिया जाता है जब व्यक्ति खुद पर आत्मकेंद्रित हो जाता। हम सभी को काम करना चाहिए और हमारा पहला काम है सुसमचार का प्रचार करना किन्तु हम देखें कि मेरे केंद्र में क्या है, हमारा स्रोत जहां से मिशन प्रवाहित होता है उसे प्रभु द्वारा मुफ्त में ग्रहण किया गया कृपादान होना चाहिए।

कलीसिया के अभिषिक्त लोगों के लिए प्रार्थना

संत पापा ने अंत में कलीसिया के सभी अभिषिक्त लोगों के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कहा, "प्रभु हमें कृपादान की हिफाजत करने में सहायता दे ताकि हम अपने मिशन को एक कृपादान और सेवा के रूप में देख सकें। इस तरह मिशन कोई पेशा अथवा भलाई करनेवाला काम मात्र न बने।"

19 September 2019, 16:59
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