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ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा  (Vatican Media)

उदार सेवा दें जैसा कि ईश्वर हमें मुफ्त में देते हैं, संत पापा

उदारता पूर्वक लोगों की सेवा करने के सिवाय ईश्वर के साथ संबंध स्थापित करने का कोई दूसरा रास्ता नहीं है। संत पापा फ्राँसिस ने यह बात संत वाटिकन के प्रेरितिक आवास संत मर्था में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए कही।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 11 जून 2019 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने ख्रीस्तयाग प्रवचन में याद दिलाया कि ईश्वर के साथ हमारा संबंध बिलकुल मुफ्त है और इसके लिए जरूरत है कि हम अपना हृदय खोलें।

मंगलवार को वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा ने कहा, "जो मुफ्त में मिला है उसे मुफ्त में दे दो।"  

एक ख्रीस्तीय का ईश्वर के साथ संबंध पर प्रकाश डालते हुए संत पापा ने स्मरण दिलाया कि हम अपने भाई-बहनों से प्रेम करने एवं उनकी सेवा करने के लिए बुलाये गये हैं जैसा कि ईश्वर ने हमारे लिए किया है।

सेवा की बुलाहट, दूसरों से फायदा उठाने के लिए नहीं

संत मती रचित सुसमाचार (मती. 10:7-13) से लिए गये पाठ पर चिंतन करते हुए संत पापा ने कहा कि ख्रीस्तीय विश्वासी स्थिर नहीं रह सकते, चूँकि हमारा जीवन जीने का तरीका हमें "हमेशा" सेवा के लिए प्रेरित करता है।

उन्होंने कहा कि येसु हमारे मिशन की शुरूआत कर चुके हैं। जब हम इस मिशन के लिए आगे बढ़ते हैं तब हम घोषित करते हैं कि स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है, रोगियों को स्वस्थ करो, मुर्दों को जिलाओ, कोढ़ियों को शुद्ध करो और अपदूतों को निकालो।

संत पापा ने कहा, "ख्रीस्तीय जीवन सेवा का जीवन है। यह दुःखद है कि ख्रीस्तीय अपने मन-परिवर्तन अथवा ख्रीस्तीय होने की चेतना के शुरू में केवल उदारता पूर्वक ईश प्रजा की सेवा करते किन्तु बाद में उनसे फायदा उठाने लगते हैं जो ईश्वर की प्रजा को हानि पहुँचाता है। हमारी बुलाहट सेवा करने के लिए है न कि दूसरों का प्रयोग करने के लिए।"

दिल बड़ा करें

संत पापा ने कहा कि ख्रीस्तीय जीवन मुफ्त में मिला है। हमने इसे बिना कीमत चुकाये प्राप्त किया है। उसी तरह मुक्ति को भी खरीदा नहीं जा सकता क्योंकि ईश्वर हमें मुफ्त में बचाते हैं और उसके लिए हमें कोई दाम चुकाना नहीं पड़ता है।

दूसरों के साथ वैसा ही करें जैसे ईश्वर ने हमारे साथ किया 

इस बात पर गौर करते हुए कि प्रभु ने हमें कृपादानों से भर दिया है। वे हमसे एक चीज की मांग करते हैं कि हम अपना हृदय खुला रखें। जब हम "हे हमारे पिता" की प्रार्थना करते हैं तब हम अपना हृदय खोलें, उनके मुफ्त वरदानों को अपने अंदर प्रवेश करने दें। जब हमें आध्यात्मिक कृपादानों की आवश्यकता होती है, तब अक्सर हम कहते हैं कि मैं उपवास करूँगा, पछतावा करूँगा या रोजरी विन्ती करूँगा ताकि कृपाओं को प्राप्त कर सकूँ। संत पापा ने कहा कि हम इन चीजों को करते हैं ताकि हम अपने हृदय को खोल सकें जबकि कृपा हमें मुफ्त में प्रदान की जाती है।

संत पापा ने सचेत किया कि कई बार हमारा हृदय बंद रहता है जिसके कारण मुफ्त में मिलने वाले प्रेम के वरदान को हम ग्रहण नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि हमें ईश्वर के साथ तोल-मोल नहीं करना चाहिए।

मुक्त रूप से दें

संत पापा ने विश्वासियों खासकर, धर्माध्यक्षों एवं पुरोहितों को निमंत्रण दिया कि वे उदारता पूर्वक अपनी सेवा दें तथा ईश्वर की कृपा को बेचने का प्रयास न करें।

संत पापा ने प्रार्थना की कि हमारा जीवन पवित्र तथा उदार हो ताकि ईश्वर की कृपा जिसको वे हमें मुफ्त में प्रदान करना चाहते हैं वह हमारे हृदयों में प्रवेश कर सके।  

11 June 2019, 17:03
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