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संत पापा फ्राँसिस ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा फ्राँसिस ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए  (ANSA)

येसु की शांति समुद्र की गहराई के समान शांत होती है

संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था में, मंगलवार को ख्रीस्तयाग अर्पित किया जहाँ उन्होंने पुनर्जीवित ख्रीस्त द्वारा शिष्यों से विदा होने के पूर्व की गई प्रतिज्ञा- शांति पर चिंतन किया। यह शांति दुनिया से नहीं आती बल्कि इसे पवित्र आत्मा हमें प्रदान करता है जो परीक्षा की घड़ी भी हमारे साथ रहती एवं हमें आगे बढ़ने का साहस प्रदान करती है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 21 मई 2019 (रेई)˸ संत पापा ने प्रवचन में प्रेरित चरित एवं संत योहन रचित सुसमाचार से लिए गये पाठों पर चिंतन किया, जिसमें संत पौलुस अत्याचार एवं पीड़ा को सहर्ष स्वीकार करते हैं जबकि सुसमाचार में येसु अपने शिष्यों को शांति प्रदान करने की बात करते हैं।

"धन्य हो तुम जब लोग तुम्हारा अपमान करते और तुम्हें सताते हैं"

संत पापा ने कहा कि अत्याचार एवं आपत्ति का जीवन शांति रहित दिखाई पड़ता है फिर भी आठ धन्यताओं में हम इसे भी पाते हैं। "धन्य हो तुम जब लोग मेरे कारण तुम्हारा अपमान करते, तुम्हें सताते, तुमपर झूठा दोष लगाते तथा तुम्हें हानि पहुँचाते हैं।"

उन्होंने कहा कि येसु की शांति जीवन में अत्याचार एवं कठिनाइयों के समय भी बनी रहती है। इस शांति को कोई नहीं ले सकता, यह एक वरदान है यह गहरे समुद्र की तरह शांत है। येसु के साथ शांति से जीने का अर्थ है सभी परीक्षाओं, कठिनाइयों एवं परेशानियों का सामना शांत होकर करना।

एक ख्रीस्तीय शांति कभी नहीं खोता

संत पापा ने कहा कि हम इस बात से समझ सकते हैं कि संतों ने अपने अंतिम समय में क्यों शांति नहीं खोयी और यहाँ तक कि वे शहादत के लिए भी तैयार हो गये। यह येसु का वरदान है। जिसको हम मानवीय साधनों जैसे डॉक्टर अथवा औषधि से प्राप्त नहीं कर सकते। यह अलग है और हमारे अंदर केवल पवित्र आत्मा से आती है।

शांति हमें जीवन में आगे बढ़ने की शक्ति देती है। यह हमें सहन करने की शिक्षा देती है। उस शब्द को धारण करने की शिक्षा, जिसका अर्थ हम पूरी तरह समझ नहीं पाते। यह एक ख्रीस्तीय शब्द है जिसको हमें धारण करना है ताकि हम कठिनाइयों के बीच भी शांति से कार्य कर सकें। वास्तव में, पवित्र आत्मा की उपस्थिति में ही शांति प्राप्त कर, साहस के साथ आगे बढ़ने के द्वारा ही हम इसे समझ सकते हैं जिसकी प्रतिज्ञा येसु ने की है। हम शांति खो जाते हैं इसका अर्थ है कि हममें कुछ चीज की कमी है।

शांति के द्वारा विनोद के मनोभाव को खोया नहीं जाता

संत पापा ने कहा कि जब हमारे हृदय में येसु की शांति है न कि दुनिया अथवा बैंक के रूपये से मिलने वाली शांति की, तब हम कठिन से कठिन परिस्थिति पर भी विजय पा सकते हैं और मुस्कुरा सकते हैं।  

उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति शांति में जीता है वह विनोद के मनोभाव को भी नहीं खोता, वह अपने आप पर, दूसरों पर एवं सब कुछ पर हंस सकता है। विनोद का यह मनोभाव ईश्वर की कृपा के अति करीब होता है। येसु की शांति एवं विनोद के इस मनोभाव के द्वारा हम खुलकर सांस ले सकते हैं।

संत पापा ने प्रार्थना की कि प्रभु हमें वह शांति प्रदान करे जो पवित्र आत्मा से आती है जो हमें जीवन की अनेक कठिनाइयों के बीच भी धीरज रखने और आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करती है।  

21 May 2019, 14:10
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