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संत मार्था प्रार्थनालय में प्रवचन देते हुए संत पापा फ्राँसिस संत मार्था प्रार्थनालय में प्रवचन देते हुए संत पापा फ्राँसिस 

विफलता को मान लेना ख्रीस्तीय मायूसी है, संत पापा फ्रांसिस

"थकावट की भावना" व्यक्ति को आशा से दूर ले जाती है। यह हमेशा हमें दिखाई देने वाले कठिन पल को दिखाती है और अतीत में प्राप्त अच्छी चीजों को भुला देती है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार,09 अप्रैल 2019 (रेई) :  “कभी-कभी ख्रीस्तीय अपनी "असफलता पर बहुत अधिक प्रभावित हो जाते हैं", जो शैतान के लिए शिकायतों और असंतोष को बोने का सही जगह बन जाता है।” यह बात संत पापा फाँसिस ने मंगलवार को अपने प्रेरितिक निवास संत मार्था के प्रार्थनालय में पवित्र यूखारिस्तीय समारोह के दौरान कही।

संत पापा ने गणना ग्रंथ से लिए गये पहले पाठ (21,4-9) के ‘थकान’ पर चिंतन किया। संत पापा ने कहा कि ईश्वर की इस्राएली जनता यात्रा करते-करते थक गई थी। मिस्र की दासता से बचने की "आशा" और "उत्साह" समुद्र के किनारे चलते-चलते रेगिस्तान में फीकी पड़ गई। उन्होंने मूसा के खिलाफ बड़बड़ाना शुरु कर दिया। संत पापा ने कहा, "थकावट की भावना व्यक्ति को आशा से दूर ले जाती है", "थकान चयनात्मक है: यह हमेशा हमें दिखाई देने वाले कठिन पल को दिखाती है और अतीत में प्राप्त अच्छी चीजों को भुला देती है।" जब हम निराशा में रहते हैं तो हम और आगे यात्रा नहीं कर पाते हैं और भुनभुनाने लगते हैं या गलत चीजों की शरण में चले जाते हैं। निराशा हम ख्रीस्तियों के जीवन में असंतोष की भावना लाती है। ऐसे समय हमें कुछ भी ठीक नहीं लगता। येसु कहते हैं कि असंतुष्ट व्यक्ति तुनकमिजाज बच्चे की तरह बन जाता है।

शैतान का उपजाऊ खेत

संत पापा ने कहा कि कुछ लोग ‘असफलता’ को बहुत अधिक अहमियत देते हैं और उसी में घिरे रहते हैं पर वे यह नहीं जानते कि यह शैतान के बीज बोने हेतु उपजाऊ खेत बन जाता है। उन्हें सांत्वना का डर, आशा का डर, प्रभु के आलिंगन का डर बना रहता है। वे जीवन के मुख्य सार को ही खो बैठते हैं। संत पापा ने कहा कि बहुत से ख्रीस्तीय भी दूसरों की शिकायत करते और आलोचना करने में अपना समय बिताते हैं। वे अपने जीवन से असंतुष्ट रहते हैं और जीवन की यात्रा में थकान महसूस करते हैं। वे अपनी विफलता को ही प्राथमिकता देते और निराशा को स्वीकार करते हैं। निराशा ही सांप का प्रतीक है जिसने मरुभूमि में लोगों को डंस लिया। सांप ने हेवा को बहकाया था।

आशा का भय

संत पापा ने कहा कि जो लोग असफलता को पसंद करते हैं वे अपना पूरा समय शिकायत करने में बिताते हैं। वे आशावान नहीं बन सकते तथा येसु के जी उठने की बात स्वीकार नहीं कर पाते। निराश व्यक्ति किसी को भी सांत्वना नहीं दे सकते हैं ।

अंत में संत पापा ने असफल, असंतोष और थकान में पड़े हुए लोगों के लिए प्रभु से कृपा मांगी। प्रभु हम सभी को इस रोग से मुक्त करें।

09 April 2019, 16:03
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