माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी
वाटिकन सिटी, सोमवार, 18 मार्च 2019 (रेई) : “दूसरों का न्याय न करें, निंदा न करें, दूसरों को क्षमा करें, इस तरह आप पिता की दया का अनुकरण करते हैं। हमें जीवन में नहीं भटकने के लिए "प्रभु का अनुसरण करना चाहिए। हमें पिता ईश्वर की छत्र-छाया में चलना चाहिए।” उक्त बात संत पापा फ्राँसिस ने अपने निवास संत मार्था के प्रार्थनालय में पवित्र मिस्सा के दौरान कही।
संत पापा फ्राँसिस ने संत लूकस के सुसमाचार पर चिंतन करते हुए कहा कि ईश्वर की दया "सबसे खराब" कृत्यों को क्षमा करने में सक्षम है। हमें ईश्वर की महानता के बारे कभी नहीं भूलना चाहिए। ईश्वर की दया बहुत ही विशाल है। हमने बहुतों को यह कहते सुना होगा कि उन्होंने बहुत ही भयानक और दर्दनाक कृत्य किये हैं वे नरक में जाने योग्य बन गये हैं अब वे वापस पीछे लौटकर नही सकते। संत पापा ने कहा कि क्या ये लोग ईश्वर की दया के बारे में सोच सकते हैं?
संत पापा ने एक उदाहरण दिया, कि एक गरीब विधवा थी जो कूरे ऑफ आर्स के पास पापस्वीकार करने गई। उसका पति पुल से नीचे कूदकर आत्महत्या कर दी। इतना कहकर वह महिला रोने लगी। उसने रोते-रोते कहा, “मैं तो गरीब महिला हूँ, मैं भी पापी हूँ पर मेरा पति बेचारा, वह तो नरक में है।” आत्महत्या करना आत्मा-मारुपाप है। इसलिए वह नरक में है। कूरे ऑफ आर्स ने कहा, “मैडम क्या आप जानती हैं कि पुल और नदी के बीच ईश्वर की कृपा है।” सबसे अंत में केवल ईश्वर की दया रह जाती है।
चालीसा के लिए अच्छी आदतें
संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि येसु हमें दयालु बनने में मदद करने हेतु तीन व्यावहारिक सुझाव देते हैं। पहला:किसी की "आलोचना" नहीं करना। हमें इस चालीसा के समय किसी की भी आलोचना करने से बचना चाहिए। इसके अलावा, यह एक ऐसी आदत है जो बिना एहसास के हमारे जीवन में घुलमिल जाती है। यहां तक कि बातचीत शुरू करते ही हम दूसरों की आलोचना करना शुरु कर देते हैं। आइए हम इस बारे में सोचें कि हम अनजाने, हर दिन कितनी बार लोगों की आलोचना करते हैं।
हमारी जेब खुली रखें
अपने प्रवचन में, संत पापा फ्राँसिस ने सभी को उदारता का ज्ञान सीखने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि उदारता "गपशप" पर काबू पाने का मुख्य तरीका है। जब हम दूसरों के बारे में गपशप करते हैं, तो "हम लगातार आलोचना करते हैं, लगातार निंदा कर रहे होते हैं, और शायद ही कभी क्षमा कर पाते हैं।
उदारता
आज प्रभु हमें शिक्षा दे रहे हैं, “तुम दो और तुम्हें भी दिया जाएगा।” दूसरों के प्रति खुला रहो, गरीबों और जरुरतमंदों के प्रति उदार बनो। जो भी देते हो, खुशी से और मुस्कुराते हुए दिया करो। “यदि तुम दोगे तो तुम्हारे लिए भी दिया जाएगा।” प्रभु दयालु हैं, जिस नाप से हम दूसरों को देते हैं प्रभु हमें उसी नाप से सौ गुणा वापस लौटा देते हैं। संत पापा ने दान देने की महता को समझाते हुए कहा कि हमें केवल रुपये या वस्तुओं को दान देने से संतुष्ट नहीं होना चाहिए, पर बीमार और लाचार को देखने जाना, उनके साथ समय बिताना उन्हें सांत्वना देना, आध्यात्मिक रुप से किसी की मदद करना, प्रार्थना करना हमारी उदारता को दिखाता है। इस तरह हम प्रभु की दया का अनुकरण करते हैं।
