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संत मार्था के प्रार्थनालय में प्रवचन देते हुए संत पापा फ्राँसिस संत मार्था के प्रार्थनालय में प्रवचन देते हुए संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

तुम्हारा भाई कहाँ हैॽ

संत पापा फ्रांसिस ने 18 फरवरी को वाटिकन, संत मार्था के प्रार्थनालय में प्रातःकालीन मिस्मा बलिदान के दौरान अपने प्रवचन में कहा कि येसु हमें उत्पति ग्रंथ में अब्राहम और काईन से पूछे गये सवाल को आज भी दुहराते हुए कहते हैं, “तुम कहाँ होॽ तुम्हार भाई कहाँ हैॽ”

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

ईश्वर काईन को पूछे गये सवाल को हमें भी आज पूछते हैं, “तुम्हारा भाई कहाँ हैॽ” इस सवाल के उत्तर से भागने के बदले संत पापा फ्रांसिस ने संत मार्था के प्रार्थनालय में विश्वासियों को व्यक्तिगत रुप में इसका उत्तर देने हेतु आहृवान किया। वास्तव में संत पापा ने लोगों का ध्यान संत मत्ती रचित सुसमाचार के अध्याय 25 की ओर कराया जो बीमार, बंदीगृह और भूखे भाई-बहनों की ओर हमारा ध्यान आकर्षित कराता है।

काईन और हाबिल की कहानी पर चिंतन करते हुए उन्होंने कहा कि हम इसकी पुर्नावृति कई बार अपने जीवन में पाते हैं। हम इसे अपने लिए एक असहज प्रश्न के रुप में पाते जिसका उत्तर हम अपनी ओर से एक समझौता स्वरुप पेश करते हैं। ईश्वर की ओर से काईन को पूछा यह सवाल “तुम्हार भाई कहाँ हैॽ” एक “शर्मिंदा जनक” प्रश्न है। वह अपनी रक्षा करते हुए ईश्वर को एक समझौतापूर्ण जवाब देता है, “मुझे अपने भाई के जीवन से क्या लेना, क्या मैं उसका रखवाला हूँॽ”  संत पापा ने कहा कि इस तरह काईन ईश्वर की नजरों से अपने को दूर करना चाहता है।

असहज प्रश्न

येसु के द्वारा पूछे जाने वाले इस असहज प्रश्न पर चिंतन करते हुए संत पापा ने कहा कि वे संत पेत्रुस से इस तरह का सवाल पूछते हैं, उदाहारण के लिए, उन्होंने उसे तीन बार यह पूछा,“क्या तुम मुझे प्यार करते होॽ” यह इस हद तक होता है कि पेत्रुस इसका जवाब देने में असहज महसूस करता है। येसु अपने चेलों से पूछते हैं, “लोग मेरे बारे में क्या कहते हैंॽ” उनके जवाब उपरांत वे उन्हें पुनः पूछते हैं, “लेकिन तुम, क्या कहते हो कि मैं कौन हूँॽ” यह सवाल “शर्मिंदा” करने वाला सवाल है। ईश्वर ने काईऩ से पूछा, “तुम्हारा भाई कहाँ हैॽ” संत पापा ने कहा कि यह एक असहज करने वाला सवाल है जिसे हम सामान्य तौर पर नहीं पूछते हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी इसका उत्तर जानते हैं, “लेकिन यह उसका जीवन है, मैं उसका सम्मान करता हूँ, मैं उसके जीवन में दखल नहीं देता, हममें से हर कोई अपने जीवन का मार्ग चुनने के लिए स्वतंत्र है...।” इन उदाहरणों के द्वारा संत पापा ने दैनिक जीवन में ईश्वर की ओर से आने वाले असहज सवालों का जवाब सामान्य सिद्धांतों के अनुसार देने का आहृवान किया जो कुछ नहीं वरन हमारे हृदय की बातों को व्यक्त करते हैं।

समझौतापूर्ण उत्तर

ईश्वर हम सभों से यह सवाल पूछते हैं, “तुम्हारा भाई कहाँ हैॽ हम जो अपने जीवन में खोये हुए रहते बहुत बार यह कहते हैं वह अपने घर में अपनी पत्नी के साथ है। लेकिन ईश्वर हमसे उन भाइयों के बारे में पूछते हैं जो भूखे, बीमार, बंदीगृह औऱ न्याय के कारण प्रताड़ित किये जाते हैं।

संत पापा ने कहा कि ईश्वर हम सभों को व्यक्तिगत रूप से अपने भाई के बारे में पूछते हैं। हम संत मत्ती के सुसमाचार के आधार पर उन भाइयों का नाम ले सकते हैं जो बीमार, भूखे-प्यासे, नंगे हैं, वे छोटे बच्चे जो स्कूल नहीं जा सकते हैं, जो कैदखानों में हैं...। क्या ऐसे भाइयों के लिए हमारे हृदय में कोई जगह हैॽ हम दान देते हुए अपने आपको ऐसे भाइयों से दूर कर लेते हैं। “हम अपनी ओर से एक समझौता पूर्ण उत्तर देते हुए अपने को कठिनाइयों से दूर करते हैं। हम उन मुसीबतों को देखना और छूना नहीं चाहते हैं।”   

तुम कहाँ होॽ

अपने प्रवचन के अंत में संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि हम उन लोगों की “एक सूची” तैयार करें जिसकी चर्चा संत मत्ती रचित सुसमाचार का अध्याय 25 करता है। यदि हम ईश्वर की शिक्षा के अनुरूप कार्य नहीं करते तो हम “अंधकारमय” जीवन को अपने घर के द्वार से प्रवेश करने देते हैं, जो हमारा विनाश करता है। उन्होंने धर्मग्रँथ के उस सवाल की ओर भी लोगों का ध्यान आकर्षित कराया जहाँ पाप में गिरने के बाद ईश्वर अब्राहम से कहते हैं, “तुम कहाँ होॽ”

अब्राहम शर्म और भय के मारे छुप गया था। शायद हम अपने में उसी लज्जा का अनुभव करते हैं। तुम्हार भाई कहाँ हैंॽ तुम कहाँ होॽ तुम किस दुनिया में रहते हो जो तुम्हें ये सारी चीजें दिखाई नहीं देती हैं, दुनिया की मुसीबतें और दुःख तकलीफ। संत पापा ने कहा कि हम दुनिया की हकीकतों से न छिपें। हम खुले रुप में, ईमानदारी और खुशी से येसु के सवालों का, “तुम्हारा भाई कहाँ हैॽ तुम कहाँ होॽ” का जवाब दें। 

18 February 2019, 15:50
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