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संत मर्था में ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा संत मर्था में ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा  (Vatican Media)

दूसरों के हृदय को खोलने के लिए दीनता एवं विनम्रता की आवश्यकता

चंगाई जो हम सभी को आवश्यक है मन-परिवर्तन के पहिए पर चलता है। यह बात संत पापा फ्राँसिस ने 7 फरवरी को वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में कही।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

दूसरों का हृदय खोलने तथा मन-परिवर्तन करने के लिए दीन, विनम्र एवं गरीब बनकर ख्रीस्त का अनुसरण करना है। अपने आप को दूसरों के बड़ा नहीं समझना एवं अपने फायदे पर अधिक ध्यान नहीं देना है।

प्रवचन में संत पापा ने संत मरकुस रचित सुसमाचार पर चिंतन किया जहाँ येसु अपने शिष्य को भेजते तथा उन्हें चंगा करने का सामर्थ्य प्रदान करते हैं। 

यदि हृदय बंद है तो कुछ भी अंदर प्रवेश नहीं कर सकता

येसु ने अपने शिष्यों को चंगा करने के लिए भेजा ठीक फसी तरह जिस तरह वे स्वयं इस दुनिया में लोगों को चंगा करने आये। वे हमारे पापों की जड़, आदी पाप से चंगाई प्रदान करते हैं। चंगाई पुनः सृष्ट करने के समान है। येसु हमारे पाप की जड़ से चंगाई प्रदान करते एवं अपनी शिक्षा को ग्रहण करने के लिए आगे बढ़ाते हैं। अपनी शिक्षा के द्वारा वे चंगाई करने का आदेश देते हैं किन्तु पहली आज्ञा है कि हम मन-परिवर्तन करें।

उन्होंने कहा कि चंगाई पाने का पहला कदम है मन-परिवर्तन जिसके लिए हृदय खोलने की आवश्यकता है, ताकि ईश वचन उसमें प्रवेश कर सके। संत पापा ने चंगाई पाने की तुलना डॉक्टर के पास जाने से की, क्योंकि यदि रोगी व्यक्ति डॉक्टर के पास जाने से इंकार करता है तो वह चंगा नहीं हो सकता। उन्होंने इस बात पर भी गौर किया कि एक ख्रीस्तीय के रूप में हम कई अच्छे कार्य करते हैं किन्तु यदि हमारा हृदय बंद हो तो यह केवल एक रंग के समान है जो पानी में धुल जाता है।

एक चरवाहे को दूध अथवा ऊन की खोज नहीं करनी चाहिए

संत पापा ने आगे कहा कि मन-परिवर्तन हेतु लोगों का आह्वान करने के लिए अधिकार की आवश्यकता है जो येसु के समान बनने से आता है।

सुसमाचार में येसु अपने शिष्यों को निर्देश देते हैं कि वे अपने साथ यात्रा में न खाना, न झोली और न रूपया लें। कहने का अर्थ है कि वे गरीब रहें।

एक शिष्य को उस चरवाहे के समान होना चाहिए जो अपने भेड़ से न दूध और न ही ऊन की तलाश करता है। संत अगस्टीन कहते हैं चरवाहा जो दूध की खोज करता वह रूपये की खोज करता है तथा जो ऊन की खोज करता है वह घमंड के वस्त्र की खोज करता है।

ख्रीस्तियों को गरीबी, दीनता और विनम्रता का अनुसरण करने की सलाह देते हुए संत पापा ने गौर किया कि येसु अपने शिष्यों से कहते हैं कि जहां लोग उनका स्वागत नहीं करते अथवा उन्हें नहीं सुनते हैं वहाँ वे अपने पैरों की धूल झाड़ दें।

लोगों पर रूचि रखने के द्वारा अधिकार आता है

मन-परिवर्तन हेतु निमंत्रण देने के पश्चात् शिष्यों ने कई अपदूत निकाले और वे ऐसा कर सके क्योंकि उनके पास अधिकार था, अपदूत कहने का अर्थ है पाप।

यह उस व्यक्ति का अधिकार नहीं है जो लोगों से बातें बनाता बल्कि उस व्यक्ति का अधिकार है जो उनपर रूचि रखता है। अपदूत ख्रीस्त की शक्ति के सामने टिक नहीं पाते जिसमें प्रेरितों ने अपना मिशन आगे बढ़ाया क्योंकि अपदूत उन पापों का सामना नहीं कर सकते जिनसे चंगाई मिल चुकी है।

हम सभी चंगाई ला सकते हैं

संत पापा ने कहा कि प्रेरितों ने रोगियों पर पवित्र तेल का विलेपन किया और उन्हें चंगाई प्रदान की। इस तरह विलेपन ईश्वर का स्नेह है, अतः सभी शिष्यों को ईश्वर के स्नेह की प्रज्ञा को सीखना चाहिए। यह ध्यान देते हुए कि न केवल धर्माध्यक्ष एवं पुरोहित बल्कि सभी ख्रीस्तीय चंगाई ला सकते हैं संत पापा ने कहा कि हम प्रत्येक को अपने भाई बहनों की चंगाई करने की शक्ति मिली है।

संत पापा ने अंत में कहा कि हम सभी को चंगाई की आवश्यकता है और हम सभी दूसरों को चंगाई प्रदान कर सकते हैं यदि हम विनम्र और दीन हैं। हम अच्छे शब्दों, धीरज एवं स्नेहिल नजरों द्वारा दूसरों को चंगाई प्रदान कर सकते हैं।

07 February 2019, 17:12
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