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ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा  (Vatican Media)

हृदय, परिवार एवं विश्व में शांति की तलाश

मंगलवार को प्रवचन में संत पापा ने विश्वासियों का आह्वान किया कि वे ख्रीस्त जयन्ती की तैयारी अपनी आत्मा, अपने परिवार एवं विश्व में शांति स्थापित करने के द्वारा करें।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 4 दिसम्बर 2018 (रेई)˸ आगमन काल हरेक दिल, परिवार एवं विश्व में शांति स्थापित करने का समय है। युद्ध जारी रखने के लिए कोई बहाना स्वीकार्य नहीं। उक्त बातें संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन के प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में कही।

मंगलवार को प्रवचन में संत पापा ने विश्वासियों का आह्वान किया कि वे ख्रीस्त जयन्ती की तैयारी अपनी आत्मा, अपने परिवार एवं विश्व में शांति स्थापित करने के द्वारा करें। उन्होंने कहा, "शांति की स्थापना करना एक प्रकार से ईश्वर का अनुकरण करना है, अपने को विनम्र बनाना, दूसरों के बारे बातचीत नहीं करना और उन्हें दुःख नहीं देना।" 

संत पापा ने नबी इसायस के ग्रंथ एवं संत लूकस रचित सुसमाचार से लिए गये पाठों पर चिंतन किया। नबी इसायस के शब्दों में प्रतिज्ञा की गयी है कि जब प्रभु आयेंगे तो किस तरह की स्थिति होगी। प्रभु शांति स्थापित करेंगे तथा सब कुछ पर शांति छायी रहेगी। यहाँ एक प्रतीकात्मक कल्पना की गयी है कि "भेड़िया मेमने के साथ रहेगा, चीता बकरी की बगल में लेट जायेगा, बछड़ा तथा सिंह-शावक साथ-साथ चरेंगे और बालक उन्हें हाँक कर ले चलेगा।" संत पापा ने कहा कि इसका अर्थ है येसु हमारे बीच शांति लायेंगे जो हमारे जीवन एवं इतिहास को बदल देंगे। यही कारण है कि वे शांति के राजकुमार कहलाते हैं। 

शांति के राजकुमार से दिल में शांति हेतु प्रार्थना

उन्होंने कहा, "अतः आगमन काल शांति के राजकुमार के स्वागत हेतु तैयारी का समय है। इसके लिए सबसे पहले हमारे हृदय में शांति लाना है। कई बार हम शांति में नहीं रहते बल्कि परेशान रहते हैं और कोई आशा दिखाई नहीं पड़ती है। ऐसी स्थिति में प्रभु हमसे एक सवाल करते हैं, तुम्हारा हृदय कैसा है क्या इसमें शांति है? यदि शांति नहीं है तो प्रभु हमारा आह्वान करते हैं कि हम शांति के राजकुमार से शांति की याचना करें ताकि उनसे मुलाकात करने हेतु तैयारी कर पायेंगे। हम अक्सर दूसरों पर अधिक ध्यान देते किन्तु संत पापा ने कहा कि सबसे पहले हम अपने आप पर गौर करें।   

परिवार में शांति लायें ˸ उसमें पुल है अथवा दीवार?

संत पापा ने कहा कि हमें अपने परिवार में शांति स्थापित करना है। परिवारों में कई प्रकार की परेशानियाँ होती हैं। हम अपने आप से पूछें क्या मेरे परिवार में शांति है? कई बार परिवार का एक सदस्य दूसरे के विरूद्ध हो जाता है अथवा विभाजन की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। अतः हम परिवार में शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करें।

बच्चों से पूछना

शांति स्थापित करने का तीसरा क्षेत्र है विश्व, जहाँ आज शांति से अधिक युद्ध है। दुनिया में आज बहुत अधिक युद्ध, विभाजन, घृणा एवं शोषण है। 

संत पापा ने कहा, "विश्व में शांति लाने के लिए मैं क्या करता हूँ?" हम कह सकते हैं कि दुनिया बहुत बड़ी है मैं इसमें क्या कर सकता हूँ किन्तु दुनिया में शांति स्थापित करने के लिए हमें अपने ही पड़ोसियों, स्कूल एवं कार्य स्थल में शांति स्थापित करने की जरूरत है। क्या मैं युद्ध, घृणा एवं दूसरों की निंदा करने के लिए हमेशा बहाना करता हूँ? क्या मैं लोगों को जोड़ने की कोशिश करता हूँ, दूसरों का न्याय करता हूँ? उन्होंने बच्चों से पूछा कि वे स्कूल में क्या करते हैं। जब हम किसी साथी को पसंद नहीं करते जो कमजोर है क्या हम उसे धमकाते अथवा उसके साथ शांति से पेश आते हैं। इन सबके द्वारा हम इस आगमन काल में शांति के राजकुमार के स्वागत हेतु तैयार कर सकते हैं।   

शांति स्थापना है ईश्वर का अनुकरण 

शांति हमेशा आगे बढ़ती है यह रूकती नहीं। यह फलप्रद है। यह व्यक्ति के हृदय से आरम्भ होकर बाहर निकलती तथा पुनः लौटकर आती है। संत पापा ने कहा कि शांति स्थापित करना ईश्वर का अनुकरण करना है। जब उन्होंने शांति स्थापित करना चाहा, तब हमें माफ कर दिया। उन्होंने अपने पुत्र को शांति के राजकुमार के रूप में भेजा। कुछ लोग कह सकते हैं कि मैंने शांति स्थापित करने के लिए पढ़ाई नहीं की है, मैं नहीं जानता, मैं छोटा हूँ इत्यादि। येसु सुसमाचार में बतलाते हैं कि शांति स्थापित करने के लिए किस तरह का मनोभाव होना चाहिए। वे कहते हैं, "पिता स्वर्ग एवं पृथ्वी के प्रभु, मैं तेरी स्तूति करता हूँ क्योंकि आपने इन बातों को बुद्धिमानों और ज्ञानियों से छिपाये रखा है तथा इसे दीन हीन लोगों पर प्रकट किया है। संत पापा ने कहा कि यदि आपने पढ़ाई नहीं की है, यदि आप बुद्धिमान नहीं है तो अपने आपको दीन और विनम्र बनायें, अपने आप को सेवक बनायें तब प्रभु शांति स्थापित करने की क्षमता एवं बल प्रदान करेंगे। 

युद्धों की सम्भावनाओं के सामने रूक जाना 

संत पापा ने कहा कि अतः आगमन काल में हमारी प्रार्थना होनी चाहिए कि प्रभु हमारे हृदय, परिवार एवं पड़ोसियों को शांति प्रदान करे।   

जब कभी हम देखते हैं कि झगड़ा होने वाला है चाहे परिवार में अथवा स्कूल या कार्य क्षेत्र में, हम रूक जाएँ एवं शांति स्थापित करने का प्रयास करें। दूसरों को कभी चोट न दें। हम दूसरों के बारे बातें न करके उन्हें चोट देने से बच सकते हैं। यदि हम ऐसा करेंगे तो शांति फैलेगी। प्रभु हमारे हृदय को शांति के राजकुमार के जन्म दिवस के लिए तैयार करे। 

 

04 December 2018, 17:32
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