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संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा  (Vatican Media)

येसु, प्रार्थना द्वारा “घुसपैठ” करें

संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन के प्रेरितिक आवास संत मार्था के प्रार्थनालय में अपने प्रातःकालीन ख्रीस्तयाग के दौरान प्रवचन में कहा कि ईश्वर हमारे मित्र हैं जो हमारी मांगों को पूरा करते हैं। हमें उनसे साहसपूर्वक अपने जरूरत की चीजों की मांग करनी चाहिए।

दिलीप  संजय एक्का-वाटिकन सिटी

संत पापा ने सुसमाचार की विषयवस्तु प्रार्थना कैसे करनी चाहिए, पर अपना चिंतन प्रस्तुत करते हुए कहा कि येसु अपने शिष्यों को उस व्यक्ति के बारे में कहते हैं जो रात को अपनी जरूरत की मांग करते हुए अपने मित्र के पास जाता है। वह उसके दरवाजे पर दस्तक देते हुए रोटियों की मांग करता है। उसका मित्र उसे कहता है कि यह उचित समय नहीं है लेकिन उसके बार-बार आग्रह करने पर वह उठ कर उसकी मांग पूरी करता है।

साहस और बिना थके प्रार्थना करें

संत पापा ने प्रार्थना के संबंध में तीन बातों-एक जरूरतमंद व्यक्ति, मित्र और थोड़ी रोटी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति अपने मित्र के पास आचनक अपनी आश्वयकता की स्थिति में पहुँच जाता है क्योंकि उसे विश्वास है कि उसका वह मित्र उसकी जरूरत को पूरा करेगा, क्योंकि उसके पास वह चीज है जिसे उसकी आवश्यकता है। संत पापा ने कहा कि प्रार्थना इस भांति एक तरह का “दखलंदाजी” है। येसु हमें इस तरह प्रार्थना करना सीखलाते हैं।

जब हम प्रार्थना करें तो साहस के साथ प्रार्थना करें क्योंकि साधरणतः जब हमें किसी चीज की जरूरत महसूस होती है तब ही हम प्रार्थना करते हैं। ईश्वर हमारे मित्र हैं, वे धनी मित्र हैं जिसके पास रोटी है, उनके पास वह चीज है जिसकी हमें आवश्यकता है।  “प्रार्थना में हमें दखलंदाजी करनी चाहिए, हमें नहीं थकना चाहिए।” संत पापा ने कहा, “हमें मांगने से नहीं थकना चाहिए। मांगो और तुम्हें मिल जायेगा।”

प्रार्थना जादूई छड़ी नहीं

संत पापा ने कहा, “प्रार्थना कोई जादुई छड़ी नहीं है। ऐसा नहीं कि हम किसी वस्तु की मांग किये और वह हमें तुरंत मिल गया। यह दो बार “हे पिता हमारे” प्रार्थना का पाठ कर इत्मीनान हो जाना नहीं है। उन्होंने कहा, “प्रार्थना एक कार्य है, वह कार्य जो हमारी चाह के बारे कहता है जिसको हम बार-बार दुहारते हैं, जो बिना शर्मायें, हमें अपने में दृढ़ बने रहने की मांग करता है क्योंकि मैं अपने मित्र के दरवाजे को खटखटता हूँ। ईश्वर हमारे मित्र हैं जिनके साथ हम ऐसा पेश आ सकते हैं। संत पापा ने संत मेनिका का उदाहरण देते  हुए कहा, “उन्होंने कितने सालों तक इस तरह, यहाँ तक की आंसू बहा-बहा कर अपने बेटे के मन-परिवर्तन हेतु प्रार्थना की और अन्ततः ईश्वर ने उनके लिए अपना द्वार खोला।

पाने हेतु ईश्वर से लड़ें

संत पापा ने अपने चिंतन में एक दूसरा उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा, “बोयनोस आईरस में एक व्यक्ति जो मजदूरी करता था उसकी बेटी मौत से जूझ रही थी, चिकित्सकों ने उसके जीवन को लेकर आशाएं छोड दी थीं। वह व्यक्ति 70 कि.मी. की यात्रा पूरी करते हुए लुजान माता मरियम के तीर्थस्थल पर गया। रात को वहाँ पहुँचने पर उसने तीर्थस्थल को बंद पाया। उसने सारी रात माता मरियम से यह कहते हुए प्रार्थना की, “मुझे मेरी बेटी चाहिए, मुझे मेरी बेटी चाहिए, आप मुझे उसे दे सकते हैं।” दूसरे दिन जब वह अस्पताल में अपनी पत्नी से मिला तो उसकी पत्नी के कहा, “चिकित्सक उसे और एक परिक्षण हेतु ले गये थे, वे यह नहीं बतला पायें कि वह किस प्रकार जागी और खाने की मांग की, उसे कुछ तकलीफ नहीं है और अब  वह खतरे से बाहर  है।” संत पापा ने कहा कि वह व्यक्ति जानता था कि कैसे प्रार्थना करनी चाहिए।

बच्चों की कराह 

संत पापा ने अपने प्रवचन में बच्चों की मांग और अपनी मांग की प्राप्ति हेतु उनके रोने पर चिंतन करने का  निमंत्रण दिया। बच्चों के जिद्ध से हारकर माता-पिता को अपने बच्चों की मांग पूरी करनी पड़ती है। आप में से कुछ कहेंगे, “क्या ऐसा करने से ईश्वर नराज नहीं होंगेॽ” येसु ने हमें स्वयं कहा है, “बुरे होने पर भी यदि तुम लोग अपने बच्चों को सहज ही अच्छी चीजें देते हो, तो तुम्हारा स्वर्गिक पिता मांगने वालों को पवित्र आत्मा क्यों नहीं देगाॽ” (लूका. 11.13)

संत पापा ने पुनः इस बात को दुहराते हुए कहा कि ईश्वर एक मित्र हैं, जो सदैव अच्छी चीजें प्रदान करते हैं। हम उन्हें अपने जीवन की तकलीफों को अपने से दूर करने को कहते और वे उन्हें दूर करते तथा हमें पवित्र आत्मा प्रदान करते हैं। हम अपने में चिंतन करें कि हम किसी तरह प्रार्थना करते हैंॽ क्या एक तोते के समान या क्या हम सचमुच अपने हृदय में अपनी आवश्यकता को रखते हुए विन्ती करते हैंॽ क्या ईश्वर से अपनी उचित आवश्यकता की पूर्ति हेतु हम उनसे लड़ाई करते हैं। संत पापा ने अंत में कहा, “हम सुसमाचार के इस अंश से अपने लिए प्रार्थना करना सीखें।"

11 October 2018, 16:25
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