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ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा  (© Vatican Media)

क्रूस हार-जीत दोनों को स्वीकारने की प्रेरणा देता

वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में पवित्र क्रूस के महापर्व के अवसर पर संत पापा ने अपने प्रवचन में असफलता किन्तु येसु के विजय पर चिंतन किया जिन्होंने दुनिया के पाप हर लिये तथा शैतान को जंजीर बंद कर दिया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

क्रूस हमें सिखलाता है कि जीवन में असफलताएँ और सफलताएँ दोनों आयेंगी  किन्तु हमें बुरे काल से भयभीत नहीं होना चाहिए क्योंकि क्रूस द्वारा हमारा जीवन प्रकाशित  होता है जो बुराई पर ईश्वर के विजय का चिन्ह है। 

जीवन के दुर्बल पक्षों पर चिंतन की प्रेरणा देता है क्रूस

संत पापा ने कहा कि ख्रीस्तियों का चिन्ह क्रूस पर चिंतन, असफलताओं पर चिंतन करना है जो विजय का प्रतीक है। क्रूस में वह सब कुछ समाप्त होता  प्रतीत हुआ जिसको येसु ने अपने जीवन में प्राप्त किया था तथा उन लोगों की आशा बुझती दिखाई पड़ती जिन्होंने उनका अनुसरण किया था। उन्होंने कहा कि हम क्रूस को एक हार, एक असफलता के रूप में चिंतन करने से नहीं घबरायें। येसु ख्रीस्त के रहस्यों पर चिंतन करते हुए संत पौलुस बतलाते हैं कि येसु ने अपने आपको पूरा तरह खाली कर दिया, खुद को मिटा दिया, सारे संसार के पापों को अपने ऊपर ले लिया। उन्हें हर तरह से विरूपित किया गया था। संत पौलुस उनकी हार को प्रकट करने से नहीं डरते और यही हमारी विकट परिस्थिति में हमें राहत प्रदान करती है अतः क्रूस का चिन्ह ख्रीस्तियों के लिए विजय का चिन्ह है। 

पुण्य शुक्रवार

संत पापा ने प्रवचन में याद किया कि गणना ग्रंथ से लिया गया पहला पाठ, हमें मिस्र देश से प्रस्थान के बाद लोगों की शिकायतों का स्मरण दिलाती है जिन्हें सांपों ने काटा। संत पापा ने कहा कि वह प्राचीन सांप, शैतान था, सबसे बड़ा अभियोक्ता है। किन्तु प्रभु ने मूसा को आदेश किया कि जिस सांप के काटने पर लोगों की मृत्यु हो गयी थी, उसी सांप को ऊपर उठाने से उन्हें मुक्ति मिलेगी। संत पापा ने कहा कि यह एक भविष्यवाणी थी, वास्तव में पाप को अपने ऊपर ले लेने के द्वारा येसु ने पाप के पिता को हराया है उन्होंने सांप पर विजय पायी है। शैतान शुक्रवार के दिन इतना खुश था कि मुक्ति इतिहास की महान योजना को नहीं समझ पाया जिसमें वह गिरने वाला था।  

शैतान द्वारा येसु और उनकी ईश्वरत्व को निगलने का प्रयास   

कलीसिया के धर्माचार्यों के अनुसार, शैतान ने येसु को बुरे हाल में, एक हुक में लगे चारा के समान देखा और एक भूखी मछली की तरह उन्हें निगलना चाहा, उसने उसकी ईश्वरत्व को भी निगला चहा क्योंकि वह चारा से लगे हुक के समान था, उसी समय क्रूस विजय का प्रतीक बन गया।

शैतान जंजीरों में जकड़ गया है किन्तु हम उसके करीब न जाएं

संत पापा ने कहा, हमारी विजय, हमारे शत्रु शैतान पर विजयी येसु का क्रूस है। क्रूस के द्वारा हम बचाये गये हैं। येसु ने निकोदेमुस से कह था, जब मैं ऊपर उठाया जाऊँगा तो लोग मेरी ओर देखेंगे। येसु उठाये गये और शैतान का विनाश कर दिया गया। हम येसु के क्रूस द्वारा आकर्षित किये गये हैं, हमें उसकी ओर निहारना है क्योंकि यह हमें आगे जाने का बल प्रदान करता है। प्राचीन सांप जो फुंफकारता है, वह अभी भी हमें डराता है किन्तु जैसा कि कलीसिया के धर्माचार्यों ने कहा है वह जंजीर से बांधा हुआ कुत्ता है। हमें उसके करीब नहीं जाना चाहिए।  यदि हम उसकी ओर आकर्षित होकर उसे पुचकारने की कोशिश करेंगे, वह निश्चय ही हमें मार डालेगा।    

क्रूस, हार और जीत दोनों का चिन्ह

संत पापा ने प्रवचन में आगे कहा कि हमारा जीवन पुनर्जीवित एवं विजयी ख्रीस्त के साथ आगे बढ़ता है जो हमें पवित्र आत्मा प्रदान करते हैं, किन्तु वह जंजीर से बंधा हुआ कुत्ता भी बढ़ रहा है जिसके करीब हमें नहीं आनी चाहिए, अन्यथा वह हमें काट खायेगा। 

क्रूस हमें शिक्षा देती है कि जीवन में हार और जीत दोनों हैं। हमें हार को भी स्वीकार करना चाहिए, अपनी असफलताओं को धीरज पूर्वक स्वीकार करना चाहिए, यहाँ तक कि पापों में गिर जाने पर भी धीर बने रहना चाहिए क्योंकि प्रभु ने इसकी कीमत चुकायी है। हमें अपने पापों के लिए क्षमा मांगनी चाहिए किन्तु अपने आपको उस कुत्ते के पंजे में नहीं पड़ने देना चाहिए। यह हमारे लिए अच्छा है कि जब हम घर में होंगे 5, 10 अथवा 15 मिनट के लिए क्रूस को निहारें, चाहे वह क्रूस घर की दीवार पर टंगा हो या रोजरी का हो। उसको गौर से देखें, वह हमारी असफलता का चिन्ह है, वह हमें अत्याचारों, विनाश की याद दिलाती हैकिन्तु यह विजय का भी चिन्ह है क्योंकि यही वह चिन्ह है जिसपर ईश्वर विजयी हुए थे।   

 

14 September 2018, 16:14
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