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संत मर्था में ख्रीस्तीयाग अर्पित करते संत पापा संत मर्था में ख्रीस्तीयाग अर्पित करते संत पापा  (Vatican Media)

धर्माध्यक्षों को तीन बातों पर ध्यान देने की आवश्यकता

धर्माध्यक्ष एक प्रार्थना का व्यक्ति है, वह चुना गया है तथा लोगों के करीब रहता है। यह बात संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग के दौरान, धर्माध्यक्षों पर प्रकाश डालते हुए कही।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

मंगलवार को उन्होंने ख्रीस्तयाग प्रवचन में कहा कि इस समय धर्माध्यक्षों पर ठोकर के कई आरोप लग रहे हैं, अतः धर्माध्यक्षों को तीन मूल बातों को याद रखना चाहिए, उनकी शक्ति प्रार्थना के व्यक्ति बनने में है, यह स्वीकार करने की विनम्रता में कि वे ईश्वर द्वारा चुने गये हैं तथा लोगों के नजदीक रहने में है।

प्रवचन में संत पापा ने संत लूकस रचित सुसमाचार से लिए गये पाठ पर चिंतन किया जहाँ येसु पूरी रात प्रार्थना में बिताते हैं उसके बाद बारह चेलों का चुनाव करते तथा उन्हें लोगों के बीच भेजते हैं। संत पापा ने कहा कि वे ही प्रथम धर्माध्यक्ष थे जिन्होंने लोगों के बीच जाकर उनकी बातें सुनी एवं उन्हें चंगा किया।

संत पापा ने धर्माध्यक्षों के चुनाव पर प्रवचन ऐसे समय में दिया जब रोम में तीन प्रकार के धर्माध्यक्षों का सेमिनार चल रहा है।

प्रार्थना के व्यक्ति

संत पापा ने कहा कि धर्माध्यक्षों का पहला आधारभूत पहलू है प्रार्थना के व्यक्ति बनना। वास्तव में, प्रार्थना एक सहानुभूति है जो बुरे काल में उनकी मदद करती है। उन्हें यह याद रखना चाहिए कि येसु उनके लिए प्रार्थना करते हैं। येसु सभी धर्माध्यक्षों के लिए प्रार्थना करते हैं इस चेतना के द्वारा धर्माध्यक्ष को दिलासा मिलता है और यह ताकत उन्हें अपने तथा ईश प्रजा के लिए प्रार्थना करने हेतु प्रेरित करता है। यही उनका पहला कर्तव्य है। संत पेत्रुस भी इस बात की पुष्टि देते हैं जब वे कहते हैं, हमें प्रार्थना तथा ईश वचन का प्रचार करना है।

धर्माध्यक्ष को चुना गया तथा विनम्र महसूस करना चाहिए

धर्माध्यक्षों का दूसरा मनोभाव जिसपर संत पापा ने बल दिया वह है कि येसु ने बारहों का चुनाव किया, अतः एक निष्ठावान धर्माध्यक्ष जानता है कि वह चुना गया है।

धर्माध्यक्ष जो येसु को प्यार करता है वह एक पर्वतारोही के समान नहीं होता जो अपनी बुलाहट को आगे जाने के लिए एक अवसर के रूप में देखता हो। एक धर्माध्यक्ष चुना गया महसूस करता है जो उसे प्रभु से बातचीत करने के लिए प्रेरित करता है, "आपने मुझे चुना, में नग्य हूँ मैं एक पापी हूँ।" इस तरह वह विनम्र होता है क्योंकि वह येसु की उपस्थित का एहसास करता है और यह उसे बल प्रदान करता है।

वह लोगों से दूर नहीं रहता

सुसमाचार पाठ बतलाता है कि चेले लोगों के नजदीक थे। संत पापा ने कहा कि धर्माध्यक्ष जो लोगों की भावनाओं को नहीं समझते हैं, उसके कारण वे उनसे दूर चले जाते हैं। एक धर्माध्यक्ष को लोगों के हृदयों का स्पर्श करना और उनके द्वारा स्पर्श किया जाना चाहिए। उन्हें कुलीन वर्ग एवं शक्तिशाली लोगों के शरण की खोज नहीं करनी चाहिए। कुलीन उनकी आलोचना करेंगे बल्कि लोग उन्हें प्यार करेंगे और इसके द्वारा धर्माध्यक्षों की बुलाहट मजबूत होगी।

बड़ा अभियोक्ता लोगों को ठोकर देना चाहता है

अतः संत पापा ने बरम्बार दुहराया है कि धर्माध्यक्षों की शक्ति प्रार्थना के व्यक्ति बनने, ईश्वर द्वारा चुने गये महसूस करने एवं लोगों के करीब रहने में है।

संत पापा ने कहा कि यह सच है कि हम सब पापी हैं। हम उन पापों को खोलने का प्रयास करें जो हमें दिखाई पड़े और जो दूसरों के लिए ठोकर का कारण है। जैसा कि योब के ग्रंथ में कहा गया है बड़ा अभियोक्ता चारों ओर घूमता है कि किस पर अभियोग लगाये। उस अभियोक्ता के विरूद्ध धर्माध्यक्षों की जो शक्ति है वह है प्रार्थना।

संत पापा ने विश्वासियों से धर्माध्यक्षों के लिए प्रार्थना करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, आइये आज हम धर्माध्यक्षों के लिए प्रार्थना करें, उनके लिए जो हमसे पहले यहाँ थे तथा दुनिया भर के सभी धर्माध्यक्षों के लिए।  

11 September 2018, 16:13
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