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कोविड-19 से भारतीय येसु समाजियों को सबसे ज्यादा नुकसान

पूरी सतर्कता और तैयारियों के बावजूद भारत में काथलिक पुरोहितों के बीच सबसे ज्यादा कोरोना वायरस से येसुसमाजियों की मौत हुई है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

कोलकाता, सोमवार 14 जून 2021 (मैटर्स इंडिया) : दक्षिण एशिया येसु समाजी सम्मेलन के अध्यक्ष फादर स्टानिस्लॉस डिसूजा ने 10 जून को मैटर्स इंडिया को बताया, "हमारी सद्भावना और प्रयासों के बावजूद, हमने इस साल कोविड -19 में लगभग 44 येसुसमाजियों को खो दिया।"

‘इंडियन करेंट्स वीकली’ के संपादक कपुचिन फादर सुरेश मैथ्यू द्वारा संकलित एक सूची के अनुसार, 11 जून तक, कोरोनावायरस महामारी ने तीन धर्माध्यक्षों , 125 धर्मप्रांतीय पुरोहितों, 131 धर्मसंघी पुरोहितों, 9 धर्मबंधुओं और 248 धर्मबहनों की मौत का दावा किया। वहीं, भारत में 29,331,030 पुष्ट मामले और कुल 367,325 मौतें हुईं।

भारत में पहला कोविड -19 मामला 30 जनवरी, 2020 को केरल में दर्ज किया गया था और पहली मौत उसी साल 12 मार्च को कर्नाटक में हुई थी। काथलिक कलीसिया में, मद्रास-मैलापुर महाधर्मप्रांत के 70 वर्षीय फादर पास्कल पेट्रस 30 मई, 2020 को कोविड -19 से मरने वाले पहले पुरोहित थे। कोविद संक्रमित पहले येसु समाजी 83 वर्षीय फादर जोसेफ एल प्रगसम थे, जिनकी मृत्यु 3 जुलाई, 2020 को मदुरई, तमिलनाडु में हुई थी।

फादर मैथ्यू की सूची के अनुसार  कोविद के कारण 44 मौतों के साथ येसु समाजी पुरोहितों में सबसे ऊपर थे जबकि मदर तेरेसा के मिशनरीज ऑफ चैरिटी में 19 धर्मबहनों की मौतों के साथ धर्मबहनों की मौत की संख्या सबसे ज्यादा थी। फादर डिसूजा को इस बात का अफसोस है कि कोविड-19 से मरने वाले 29 सदस्य 50-70 वर्ष के बीच थे, जो उनके लंबे प्रशिक्षण और अध्ययन के बाद येसुसमाजियों के बीच सबसे सक्रिय और कामकाजी आयु वर्ग के थे।

उन्होंने कहा, “लगभग सभी पुरोहित हृदय, मस्तिष्क और गुर्दे से संबंधित कुछ मुद्दे, कुछ कैंसर और मधुमेह रोगी या बीपी रोगी थे। इसलिए, स्वास्थ्य के मुद्दों ने जटिलताएं पैदा कीं।” उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को यह महसूस करने में समय लगा कि वे कोविड -19 से पीड़ित हैं और उनकी दवा में देरी हुई और कुछ लोगों को सही अस्पताल खोजने में कठिनाई हुई।

4000 से अधिक जेसुइट 19 प्रांतों और दो रीजन के माध्यम से दक्षिण एशिया की सेवा करते हैं।

जैसे ही दूसरी लहर देश में आई, फादर डिसूजा ने सभी प्रांतों को येसुसमाजियों और उनकी सेवा करने वाले लोगों की देखभाल करने के लिए दो पत्र भेजे। उन्होंने कहा, "संभावित चुनौती का सामना करने के लिए कुछ ठोस निर्णय पर चर्चा करने, विचार करने और पहुंचने के लिए प्रांतीय अधिकारियों की बैठकें बुलाई गईं।"

उन्होंने कहा कि भारत में जेसुइट अधिकारियों ने अपने लोगों के बीच इस बीमारी से निपटने का फैसला किया है, जिन लोगों के बीच अपनी सेवा देते हैं। इसके लिए उन्होंने दक्षिण एशिया के गरीब प्रांतों की मदद के लिए कोविड राहत कोष और हर प्रांत में एक आपदा प्रबंधन समिति (डीएमसी) की स्थापना की।

जेसुइट प्रमुख ने कहा कि डीसीएम अधिकांश प्रांतों में हरकत में आया और लोगों को बचाने के लिए विभिन्न स्तरों पर हस्तक्षेप किया, जिसमें जेसुइट भी शामिल थे। कोविड देखभाल केंदेरों ने कोविड प्रभावित परिवारों और लॉकडाउन के कारण भोजन की आवश्यकता वाले लोगों को चिकित्सा सामान और खाद्य सामग्री वितरित की।

येसुसमाजियों ने भी प्रांतों से धन एकत्र किया और चुनौती का सामना करने के लिए उन्हें छह प्रांतों, एक आम घर और दो अस्पतालों में वितरित किया। कई प्रांतों ने सरकारी और गैर-सरकारी एजेंसियों और कलीसिया से संबंधित संस्थानों के साथ सहयोग किया। फादर डिसूजा ने कहा, "अलग-अलग स्तरों पर अच्छा काम जारी है।" उन्होंने कहा कि धर्मसंघ ने प्रांतों में कोविड से संबंधित कार्यों की निगरानी के लिए एक कोविड कार्य बल का भी गठन किया है। कार्य बल जल्द ही अब तक किए गए कार्यों पर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी और आगे का रास्ता सुझाएगी।

14 June 2021, 15:54