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मुुम्बई में तापमान की जाँच कराते मुुम्बई में तापमान की जाँच कराते  (AFP or licensors)

उत्तरपूर्वी भारत में कोविड-19 के प्रसार को रोकने हेतु ख्रीस्तियों का प्रयास

आदिवासी लोगों के बीच कोविड -19 से लड़ने में निरक्षरता, गरीबी और बिजली की कमी जैसी चुनौतियाँ हैं।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

भारत, मंगलवार, 8 जून 2021 (रेई)- भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में काथलिक धर्मप्रांत, अन्य ख्रीस्तीय समूहों के साथ मिलकर, कमजोर आदिवासी लोगों, विशेषकर चाय बागानों में काम करनेवाले लोगों के बीच कोविड -19 के प्रसार को रोकने का प्रयास कर रहे हैं।

ख्रीस्तीय स्वयंसेवकों ने कहा कि उनकी मुख्य चिंता है असम राज्य के लगभग 800 चाय बागानों में काम करनेवाले दस लाख से अधिक लोगों में वायरस को फैलने से रोकना है।

डिब्रूगढ़ धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष अल्बर्ट हेमरोम ने कहा कि कोविड-19 की दूसरी लहर की शुरूआत में असम के बड़े शहरों में प्रतिबंध लगाये गये थे।

उन्होंने कहा, "किन्तु अब यह गाँवों तक पहुँच चुका है, विशेषकर, गरीबों और चाय बगानों में काम करनेवाले अशिक्षित लोगों के बीच।"   

उन्होंने बतलाया कि संक्रमण की जांच के तरीकों के बारे में जागरूकता पैदा करने के अलावा, ख्रीस्तीय स्वयंसेवक चाय बागानों में गरीबी से जूझ रहे तिहाड़ी मजदूरों के बीच भोजन वितरित करने में व्यस्त हैं, जो पूर्वोत्तर राज्यों में तालाबंदी के बाद बेरोजगार हो गए हैं।

भारत के आठ पूर्वोत्तर राज्य मुख्य भूमि से कटे हुए हैं, जिनमें सिलीगुड़ी, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम एवं नागालैंड - ख्रीस्तीय बहुल राज्य हैं। हमें पहली लहर में कोई तकलीफ नहीं हुई थी लेकिन अभी हमारे गाँवों एवं चाय बगानों से सैंकड़ों नये मामले हर दिन दर्ज किये जा रहे हैं।

असम, मनिपुर, त्रिपूरा और सिक्किम कोविड-19 को पहली लहर जिसकी शुरूआत जनवरी 2020 में हुई थी इसकी चपेट में नहीं थी लेकिन दूसरी लहर जिसकी शुरूआत अप्रैल में हुई स्थिति को बदल दी है।

असम जो एक घनी आबादीवाला राज्य है इसकी आबादी करीब 30 मिलियन है जहाँ संक्रमितों की संख्या प्रतिदिन बढ़ रही है। यहाँ जून के पहले सप्ताह में हर दिन करीब 4000 नये मामले दर्ज किये जा रहे हैं और हर 24 घंटे में करीब 40 लोगों की मौत हो रही है।

धर्माध्यक्ष हेमरोम ने ऊका समाचार को 4 जून को बतलाया, "हमें पहली लहर में कोई तकलीफ नहीं हुई थी लेकिन अब गाँवों एवं बगानों में हर दिन सैंकड़ों नये मामले दर्ज किये जा रहे हैं।"

उन्होंने कहा, "संक्रमण तेजी से बढ़ सकता है क्योंकि बगानों में काम करनेवाले लोग समूहों और छोटे कमरों में रहते हैं। यदि कोई एक व्यक्ति भी संक्रमित हो जाए तो पूरा समूह संक्रमित हो सकता है और ऐसी परिस्थिति में यह खतरनाक होगा।" 

डिब्रूगढ़ धर्मप्रांत के गोलाघाट जिले में राहत और जागरूकता अभियान का नेतृत्व कर रहे एक पल्ली के फादर सीजर हेनरी ने कहा कि जागरूकता पैदा करना उनके काम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

धर्माध्यक्ष ने कहा, “चाय बागानों में आदिवासी आबादी काफी हद तक कोविड -19 प्रोटोकॉल से अनजान हैं। वे शायद ही किसी गंभीर सामाजिक दूरी, स्वच्छता और अन्य उपायों का पालन कर सकते हैं।”

ख्रीस्तीय स्वयंसेवकों की मदद से, पुरोहित ने आदिवासी लोगों के बीच विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया है ताकि उन्हें सामाजिक दूरी के महत्व, मास्क पहनने, हाथ धोने, अपने घरों को साफ करने और टीकाकरण की आवश्यकता के बारे में बताया जा सके।

वे टीकाकरण के लिए जाने से भी डरते हैं क्योंकि उनका मानना है कि इससे मृत्यु या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

फादर हेनरी ने ऊका न्यूज को बतलाया, "अभी हमलोग उनसे कोविड-19 नवाचार का पालन करने की अपील कर रहे हैं और उन्हें वैक्सिन लगाने का प्रोत्साहन दे रहे हैं।"

उन्होंने कहा कि उनकी पल्ली में 4,000 काथलिक लोग हैं, 4 जून तक उनमें से 4 ही लोग वैक्सिन लिए हैं, ये चारों सरकारी नौकरी करते हैं।  

उत्तर पूर्वी रीजन के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के उप सचिव फादर जी. पी. अमलराज ने कहा कि समस्या पूरे रीजन में एक समान है जहाँ आदिवासियों की बहुलता है। 

फादर ने कहा कि वे 15 काथलिक धर्मप्रांत में गरीबों की सहायता के लिए क्षेत्र के भीतर और अन्य संसाधनों से धन जुटा रहे हैं।

हम अपने सीमित संसाधनों से उनकी जान बचाने में मदद करने के लिए केवल सरकारी एजेंसियों के साथ काम कर सकते हैं। ख्रीस्तीय स्वयंसेवक गाँव के गरीब लोगों के लिए मेडिकल सुविधा, भोजन और सूखा राशन प्रदान करते हैं।

स्थानीय कलीसिया ने एक टोल फ्री नम्बर जारी किया है जिसके द्वारा ऑनलाईन कौंसलिंग दी जाती है।

असम ख्रीस्तीय मंच के प्रवक्ता अल्लेन ब्रूक ने कहा, "रीजन में बहुत बुरी स्थिति है।"

बड़ी संख्या में अशिक्षित आदिवासी कोविड-19 नवाचार का पालन नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि यह उनकी आदिवासी भाषा में नहीं है।

ब्रूक ने कहा, "यहाँ तक कि युवा जो वैक्सिन लेना चाहते हैं वे भी वैक्सिन के लिए ऑनलाईन रजिस्टर नहीं कर पा रहे हैं।"

उन्होंने कहा, "हम केवल सरकारी एजेंसियों के साथ काम करते हैं ताकि उनके जीवन को सीमित संसाधनों से ही बचने में मदद दे सकें और हम उसे हर संभव अच्छे तरीके से करने का प्रयास कर रहे हैं।" 

08 June 2021, 15:41