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ईश सेविका माता मेरी बेर्नादेत्त की 60वीं पुण्यतिथि के स्मृति चिन्ह एवं स्मारिका का विमोचन करते राँची के महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स टोप्पो ये.स. एवं सहायक धर्माध्यक्ष थेओदोर मस्करेनहास एस.एफ.एक्स ईश सेविका माता मेरी बेर्नादेत्त की 60वीं पुण्यतिथि के स्मृति चिन्ह एवं स्मारिका का विमोचन करते राँची के महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स टोप्पो ये.स. एवं सहायक धर्माध्यक्ष थेओदोर मस्करेनहास एस.एफ.एक्स 

संत अन्ना की पुत्रियों के धर्मसंघ राँची की संस्थापिका की 60वीं पुण्यतिथि मनायी गई

संत अन्ना की पुत्रियों के धर्मसंघ राँची की संस्थापिका ईश सेविका माता मेरी बेर्नादेत्त प्रसाद किस्पोट्टा की 60वीं पुण्यतिथि, 16 अप्रैल को संत मरिया महागिरजाघर राँची में मनायी गई।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

राँची, शुक्रवार, 16 अप्रैल 2021 (वीएन हिन्दी)- ईश सेविका "माता मेरी बेर्नादेत्त ने येसु के प्रेम से प्रज्वलित होकर चुनौतीपूर्ण कदम उठाया और अजीवन कुँवारी रहकर ईश्वर तथा लोगों की सेवा में अपना जीवन समर्पित करने का निर्णय लिया। वह न केवल संत अन्ना की पुत्रियों के धर्मसंघ के लिए बल्कि पूरी स्थानीय कलीसिया एवं विश्वव्यापी कलीसिया के लिए भी एक अनुपम उपहार हैं।" उक्त बातें राँची के महाधर्माध्यक्ष महामान्यवर फेलिक्स टोप्पो येसु समाजी ने 16 अप्रैल को ख्रीस्तयाग प्रवचन में कही।

16 अप्रैल 2021 को राँची स्थित संत मरिया महागिरजाघर में संत अन्ना की पुत्रियों के धर्मसंघ राँची की संस्थापिका ईश सेविका माता मेरी बेर्नादेत्त प्रसाद किस्पोट्टा की 60वीं पुण्यतिथि मनायी गई।

इस अवसर पर राँची के महाधर्माध्यक्ष महामान्यवर फेलिक्स टोप्पो येसु समाजी ने  समारोही ख्रीस्तयाग का अनुष्ठान किया, साथ ही मान्यवर सहायक धर्माध्यक्ष थेओदोर मस्करेनहास एस.एफ.एक्स एवं संत मरिया महागिरजाघर के पल्ली पुरोहित फादर आनन्द डेविड खलखो भी सह-अनुष्ठाता के रूप में उपस्थित हुए। समारोही मिस्सा में कई अन्य पुरोहितों, धर्मबंधुओं, धर्मबहनों एवं विश्वासियों ने भी भाग लेकर ईश सेविका माता मेरी बेर्नादेत्त प्रसाद किस्पोट्टा के लिए ईश्वर को धन्यवाद दिया।

येसु के प्रेम से प्रज्वलित

अपने प्रवचन में महामान्यवर फेलिक्स टोप्पो ने कहा कि "आरम्भ से ही अनेक ख्रीस्तियों ने मसीह का अनुसरण करने के लिए अनेक प्रकार के कष्ट एवं चुनौतियों का सामना किया और अंततः ईश्वर से बल पाकर वे विजयी हुए। उसी प्रकार माता मेरी बेर्नादेत ने येसु के प्रेम से प्रज्वलित होकर चुनौतीपूर्ण कदम उठाया और अजीवन कुँवारी रहकर ईश्वर तथा लोगों की सेवा में अपना जीवन समर्पित करने का निर्णय लिया। वह न केवल संत अन्ना की पुत्रियों के धर्मसंघ के लिए बल्कि पूरी स्थानीय कलीसिया एवं विश्वव्यापी कलीसिया के लिए भी एक अनुपम उपहार हैं। अतः ईश्वर को माता मेरी बेर्नादेत किस्पोट्टा तथा संत अन्ना की पुत्रियों के धर्मसंघ के लिए भी धन्यवाद देना उचित है।"

ख्रीस्तयाग के अंत में माता मेरी बेर्नादेत्त की धन्यता की प्रक्रिया का संक्षिप्त परिचय दिया गया। उसके बाद स्मृति चिन्ह एवं स्मारिका का विमोचन किया गया। धन्यवादी मिस्सा बलिदान की समाप्ति के उपरांत रांची स्थित संत अन्ना मूलमंठ में माता मेरी बेर्नादेत्त को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

मदर जेनेरल की प्रथम महासलाहकारिणी सिस्टर मेरी पुष्पा तिरकी ने कहा कि हम ईश्वर को धन्यवाद दे रहे हैं क्योंकि उन्होंने यहाँ के गरीब एवं उपेक्षितों, विशेषकर, आदिवासी भाई-बहनों के बीच सुसमाचार की घोषणा के लिए मेरी बेर्नादेत्त को चुना। माता मेरी बेर्नादेत्त ने अपनी तीन सहयोगी बहनों - माता सेसिलिया, माता बेरोनिका और माता मेरी के साथ इस मुक्तिकारी योजना को आगे बढ़ाया।

माता बेर्नादेत्त को श्रद्धांजलि अर्पित करते धर्माध्यक्ष थेओदोर मसकरेनहास
माता बेर्नादेत्त को श्रद्धांजलि अर्पित करते धर्माध्यक्ष थेओदोर मसकरेनहास

धन्यता की ओर

ईश सेविका माता मेरी बेर्नादेत्त की धन्यता की पोस्टूलेटर डॉ. सिस्टर मरियम अनुपा कुजूर डी.एस.ए. ने बतलाया कि 16 जून 2016 को महामहिम कार्डिनल अंजेलो अमातो एस.डी.बी, रोम में परमधर्मपीठीय संत प्रकरण परिषद के अध्यक्ष ने माता मेरी बेर्नादेत किस्पोट्टा को "निहिल ओबस्तात" (कोई बाधा नहीं) प्रदान कर, उन्हें संत घोषणा के रास्ते पर आगे बढ़ाया, तत्श्चात् 7 अगस्त 2016 को राँची के महामहिम कार्डिनल तेलेस्फोर पी. टोप्पो डी.डी. ने संत मरिया महागिरजाघर में उन्हें ईश सेविका घोषित किया।

स्थानीय कलीसिया के शीर्ष प्रतिनिधि होने के हैसियत से महामहिम तेलेस्फोर पी. कार्डिनल टोप्पो डी.डी. ने मान्यवर सहायक धर्माध्यक्ष थेओदोर मस्करेनहास एस.एफ.एक्स को माता मेरी बेर्नादेत की धन्यता की प्रक्रिया में धर्माध्यक्षीय प्रतिनिधि नियुक्त किया। इस प्रक्रिया को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए स्थानीय कलीसिया के अधिकारियों द्वारा न्यायाधिकरण समिति एवं इतिहास समिति का गठन किया गया। कार्डिनल तेलेस्फोर पी. टोप्पो की सेवानिवृति के बाद अब राँची के नये महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स टोप्पो ये.स.,स्थानीय कलीसिया के शीर्ष अधिकारी के रूप में समिति में शामिल हुए हैं। इस प्रकार कलीसिया के विभिन्न अधिकारियों के मार्गदर्शन में यह प्रक्रिया निरंतर आगे बढ़ रही है।  

सिस्टर अनुपा कुजूर ने बतलाया कि संत अन्ना की पुत्रियों के धर्मसंघ, राँची की संस्थापिका माता मेरी बेर्नादेत्त की धन्यता की प्रक्रिया 24 जुलाई 2015 को शुरू हुई, जब झान (झारखंड एवं अण्डामन काथलिक कलीसिया की धर्माध्यक्षीय समिति) ने माता बेर्नादेत्त की धन्यता की प्रक्रिया पर पहल करने की सहमति दी।

माता मेरी बेर्नादेत्त किसपोट्टा की जीवनी

माता मेरी बेर्नादेत्त किसपोट्टा का जन्म पिता पूरन प्रसाद किस्पोट्टा और माता पौलिना के लूथरन परिवार में 2 जून 1878 ई. को मांडर प्रखण्ड के सरगाँव में हुआ था। लूथरन कलीसिया में उसे बपतिस्मा में ख्रीस्त आनन्दित रूथ नाम दिया गया था। उसने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा लूथरन मिशन, राँची के बेथेसदा विद्यालय से प्राप्त की। बाद की पढ़ाई उसने लोरेटो स्कूल से की जो उस समय पुरूलिया रोड राँची में स्थित था, वर्तमान में यहाँ उर्सुलाइन की धर्मबहनों की संस्था है। विद्यार्जन करते हुए लोरेटो धर्मबहनों की संगति में रहकर उसने उनकी सेवा-कार्यो से प्रेरित होकर सदा कुँवारी रहने, गरीब, दीन-दुःखी, लाचार एवं पीड़ितों की सेवा में अपने आप को समर्पित करने का निर्णय लिया। वे अपने संस्मरण में कहती हैं- "अगर ये मदर लोग येसु के प्रेम से अपने माता-पिता, भाई-बहन, मित्र, सगे-संबंधियों, यहाँ तक कि अपने देष को भी छोड़कर हम गरीब एवं लाचार लोगों की सेवा में अपने को दे सकती हैं तो क्या हम भी अपने देश और अपने लोगों की सेवा में ऐसा नहीं कर सकेंगी?"

बुलाहट की प्रेरणा

अन्तरतम की यह प्रेरणा इतनी शक्तिशाली थी कि माता बेर्नादेत्त ने येसु के प्रेम से प्रज्वलित होकर अपना सर्वस्व येसु को दे डाला। येसु के प्रेम से सदा कुँवारी रहकर लोगों की सेवा करने का निर्णय उसके लिए एक बड़ी चुनौती थी क्योंकि उस समय की आदिवासी संस्कृति के अनुसार लड़कियाँ बिना शादी नहीं रह सकती थीं। उनका यह कदम समाज तथा काथलिक मिशनरियों को झकझोर दिया। उत्साही मिशनरियों ने सोचा कि बेर्नादेत्त और उनकी तीन सहेलियों के इस प्रकार के निर्णय से उनका मिशन का काम रुक जाएगा। माता-पिता अपनी लड़कियों को स्कूल नहीं भेजेंगे। अतः

उसे और उसकी तीन साथियों को जो उसी की तरह सोचती थीं, विद्यालय से निष्कासित कर घर भेज दिया गया था। विवाह के कई प्रलोभन दिये गये, माता-पिता, रिश्तेदार एवं मिशनरियों ने भी विवाह के लिए उन्हें जबरदस्त किया। सारा परिवार उनके विरूद्ध हो गया। उन्हें अनेक प्रकार की यातनाएँ दी गई फिर भी वे अपने पवित्र निर्णय में अडिग रहीं। वे येसु के प्रेम से ओत-प्रोत होकर सुसमाचार की घोषणा के लिए कुछ भी करने को तत्पर थीं। उनका ऐसा उत्साह, विश्वास, समर्पण, सेवा, त्याग और्र ईश्वरीय बुलाहट के प्रति प्यार किसी से छिपा नहीं रहा। अन्ततः संत अन्ना की पुत्रियों के धर्मसंघ, राँची की स्थापना औपचारिक रूप से राँची में 26 जुलाई 1897 को तत्कालीन कलकत्ता महाधर्मप्रान्त के महाधर्माध्यक्ष पौल गोथल्स, ये.स. के द्वारा समय की माँग के अनुसार की गई जिसकी नींव माता मेरी बेर्नादेत्त ने डाली जो धर्मसंघ की संस्थापिका है।

ईश सेवक फा. कोन्सटन्ट लीवन्स ये.स. के मिशन में सहयोग

यह धर्मसंघ छोटानागपुर के महान् प्रेरित ईश सेवक फा. कोन्सटन्ट लीवन्स ये.स. के मिशन कार्य से सदैव जुड़ा हुआ है। यर्ह ईश्वर का एक अद्भुत वरदान है। माता बेर्नादेत्त के नेतृत्व में ही फा. लीवन्स के मिशन कार्य से जुड़कर ख्रीस्त के राज्य विस्तार में धर्मसंघ ने अहम् भूमिका निभायी। अनेक कठिनाईयों का सामना करते हुए दूर-दूर पैदल चलकर ख्रीस्तीय विश्वास की ज्योति जलाई। यह धर्मसंघ देश-विदेश में अपने कारिज्म और चार प्रेरिताई कार्यों - सुसमाचार प्रसारण, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और समाज सेवा के माध्यम से सुसमाचार का प्रचार कर रहा है। आज इस महान् विभूति के लिए, जिसने सुसमाचार की घोषणा करते हुए, छोटानागपुर की कलीसिया के विस्तार एवं येसु ख्रीस्त में विश्वास के बढ़ने एवं फूलने-फलने में अपना अमूल्य योगदान दिया है हम ईश्वर को धन्यवाद देते हैं। संत अन्ना की पुत्रियों का धर्मसंघ, राँची, की स्थापना करके अपनी धर्मबहनों के साथ तत्कालीन नन्हीं कलीसिया को मजबूताई देने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। यह सब ईश्वरीय कृपा एवं आशीषों से संभव हुआ है ईश्वरीय योजना पूरी हुई है।

ईश सेविका घोषित

माता मेरी बेर्नादेत्त प्रसाद किस्पोट्टा 83 वर्ष की आयु में, 64 वर्ष तक धर्मसंघ तथा कलीसिया की सेवा में समर्पित रही और 16 अप्रैल 1961 में ईश्वर ने उन्हें अनंत जीवन का भागी बना लिया। आज कलीसिया उनके वीरोचित गुणों को पहचान कर संतता की प्रक्रिया में 7 अगस्त 2016 को र्इश सेविका का दर्जा देकर गौरान्वित किया है। संतता की यह प्रक्रिया आर्चविशप फेलिक्स टोप्पो, ये.स. राँची महाधर्मप्रान्त के निर्देशन में, मान्यवर विशप थयोदोर मसकरेन्हस, एस.एफ.एक्स. सहायक बिशप की अगुवाई में आगे बढ़ रही है।

छोटानागपुर की दयनीय स्थिति एवं धर्मसंघ काआह्वान

ईश-सेविका मेरी बेर्नादेत्त की 60वीं पुण्यतिथि, धर्मसंघ एवं कलीसिया के इतिहास के पन्नों को पुनः पलटकर देखने के लिए प्रेरित कर रहा है। जिन पन्नों में विभिन्न परिस्थितियों के बीच विलाप करते हमारे अपने लोगों की भयावह जीवन शैली अंकित की गयी है। एक ओर लीवन्स के आने के पूर्व जमींदारी प्रथा की कहर, वहीं दूसरी ओर 1895-1896 के बीच धर्मसंघ की स्थापना के पूर्व पूरे देश में भारी महामारी का प्रकोप। जमींदारी प्रथा की चपेट में आकर लोगों को पेट भरने के लिए एक दाना का नसीब नहीं था, लोग खाली पेट, भूखों, जमीनदारों के डंडे व लाठी की मार खाकर जीवन व्यतीत कर रहे थे। दूसरी ओर देश में भयानक महामारी याने हैजा और आकाल से सैकड़ों क्या बूढ़े, क्या जवान, बच्चे, स्त्री और पुरूष, थोड़ा खाना, पानी, दवाई और सांत्वना पाने के लिए तरस रहे थे। वे बेचारे चारों तरफ क्या शहर में, बस्ती में, खेत में, मैदान में, रास्ता और सड़कों की नलियों में इधर-उधर भूख-बीमारी से मरने लगे। ऐसी भयावह स्थिति में बेर्नादेत और उसकी बहनें फादरों और मादरों के साथ टोलों, बस्तियों और गाँवों में जाकर चावल, दाल, कपड़ा-लता दवाई इत्यादि बाँटने में सहायता करती थीं। लोगों को दिलासा देतीं और मरण संकट में पड़े हुओं को बपतिस्मा देती थीं। दिन-रात लोगों के दुःख से रोने विलापने की आवाज सुनाई पड़ती थी।

सिस्टर पुष्पा ने कहा, "आज हमारे बीच वही स्थिति मंडरा रही है। संपूर्ण विश्व में कोरोना वायरस जैसे जानलेवा महामारी के कारण लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। चारों ओर रोने-विलापने की आवाज आ रही है। ऐसी विकट परिस्थिति में आज मेरी बेर्नादेत्त, त्याग-तपस्या व प्रार्थनामय जीवन जीने के लिए आह्वान कर रही है। ईश-सेविका मेरी बेर्नादेत्त की मध्यस्थता द्वारा कोरोना वायरस के चपेट में आये पूरे विश्व के लोगों के लिए प्रार्थना करें, अपने देश व राज्य के लिए प्रार्थना करें, छोटानागपुर की कलीसिया के लिए प्रार्थना करें, ताकि इस भयानक महामारी से प्रभु हमें सुरक्षित रखे।"

धर्मसंघ के विभिन्न समुदायों में पुण्यतिथि मनायी गई

राँची की कलीसिया के साथ-साथ धर्मसंघ के सभी समुदायों में ईश सेविका माता मेरी बेर्नादेत्त किस्पोट्टा की 60वी. पुण्यतिथि को प्रार्थनाओं एवं पावन यूखरिस्त में भाग लेकर मनायी गई। रोम समुदाय की धर्मबहनों ने येसु ख्रीस्त के अति मूल्यवान रक्त पल्ली के विश्वासियों के साथ मिलकर ईश सेविका माता मेरी बेर्नादेत्त की पुण्यतिथि के अवसर पर ईश्वर को धन्यवाद दिया।

समुदाय की सुपीरियर सिस्टर अल्मा फ्रिडा खलखो ने पवित्र मिस्सा के उपरांत मुख्य अनुष्ठाता फादर मार्को एवं उपस्थिति सभी विश्वासियों के प्रति आभार प्रकट किया तथा कहा कि ईश सेविका माता मेरी बेर्नादेत्त ने कलीसिया रूपी परिवार की सेवा के लिए अपना जीवन अर्पित किया। हम प्रत्येक जन इस पल्ली परिवार के सदस्य हैं। हम माता बेर्नादेत्त के जीवन से प्रेरित होकर येसु के प्रेम में एक बने रहें।

16 April 2021, 13:39