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फादर स्टेन स्वामी जो भीमा कोरेगाँव मामले में जेल में हैं फादर स्टेन स्वामी जो भीमा कोरेगाँव मामले में जेल में हैं 

चिंताओं के बीच फादर स्टेन की जमानत स्थगित

भीमा कोरोगाँव विद्रोह के आरोप में गिरफ्तारी और हिरासत में लेने के पांच महीने बाद बुजुर्ग भारतीय जेसुइट कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी की जमानत याचिका पर फैसला सुनाने के लिए एक विशेष अदालत का गठन किया गया है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

भारत, शनिवार, 20 फरवरी 2021 (ऊकान)- भीमा कोरोगाँव विद्रोह के आरोप में गिरफ्तारी और हिरासत में लेने के पांच महीने बाद बुजुर्ग भारतीय जेसुइट कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी की जमानत याचिका पर फैसला सुनाने के लिए एक विशेष अदालत का गठन किया गया है।

संघीय जांच एजेंसी एनआईए (एनआईए) की विशेष अदालत ने 84 वर्षीय फादर स्टेन स्वामी की जमानत याचिका के परिणाम की घोषणा करने के लिए 2 मार्च का दिन  निश्चित किया है।

मामले पर नजर रखनेवाले तमिलनाडु के वकील जेस्विट फादर ए. संतानाम ने ऊका न्यूज से कहा, "हम खुश हैं कि अदालत ने अंततः जमानत याचिका के परिणाम की घोषणा करने के लिए तिथि निर्धारित की है।"

फादर संतानाम को चिंता है कि बीमार फादर की जमानत को राजनीतिक कारणों से देर की जा रही है।  

8 अक्टूबर को झारखंड की राजधानी राँची स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किये जाने के बाद फादर स्टेन की जमानत याचिका को कई बार इनकार किया गया है और उन्हें मुम्बई के जेल में रखा गया है।

नवीनतम स्थिति में, फादर स्वामी के वकील ने 12 फरवरी को अपनी दलीलें पूरी कीं और अदालत से बुजुर्ग फादर को जमानत देने का अनुरोध किया है।

हालांकि एनआईए द्वारा केस डायरी जमा करने और समय मांगने के बाद 16 फरवरी को मामला पोस्ट किया गया और इस दलील पर उसकी रिहाई का विरोध किया गया कि जांच अभी भी चल रही है।

फादर संतानाम ने 18 फरवरी को ऊकान्यूज से कहा, "आमतौर पर, हमने नहीं देखा है कि सुनवाई हो जाने के बाद जमानत याचिका पर निर्णय करने के लिए अदालत इतना समय लेता है।" उन्होंने कहा, "बुजूर्ग पुरोहित पहले से ही अस्वस्थ हैं और अपने दैनिक कामों को दूसरों की मदद के बिना नहीं कर पाते हैं। हम उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान कराना चाहते हैं।"   

फादर स्वामी उन 16 अरोपियों में से एक हैं जिन्हें 1 जनवरी 2018 में महाराष्ट्र के भीमा कोरेगाँव में हुई हिंसा से जोड़ा गया है। इस हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे।  

आरोपियों पर कड़े गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोप लगाए गए हैं, जिससे अन्य मामलों के विपरीत, जमानत हासिल करना लगभग असंभव हो गया है।

इस बीच, फादर स्वामी के वकील ने विशेष अदालत के एक निर्देश का पालन करते हुए फादर के लैपटॉप और हार्ड ड्राइव की क्लोन कॉपी के लिए 13 फरवरी को मुंबई में एनआईए कार्यालय का दौरा किया।

फा. संतानाम ने कहा, "लेकिन हमें लैपटॉप एवं हार्ड ड्राईव का क्लोन कॉपी नहीं मिला। एनआईए ने 12 फरवरी को अदालत को सुनवाई के दौरान इसे न देने के बारे सूचित नहीं किया था।”

पिछले हफ्ते फादर स्वामी ने अपने लैपटॉप और हार्ड ड्राइव की क्लोन कॉपी पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जब अमेरिका के एक डिजिटल लैब ने पाया था कि उसी मामले के एक अन्य आरोपी रोना विल्सन के कंप्यूटर में गलत सबूत लगाए गए थे।

फादर स्वामी को अपने लैपटॉप में लगाए जा रहे दस्तावेज़ों की संभावना पर संदेह है।

20 February 2021, 14:37