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गर्भपात के विरोध में प्रदर्शन गर्भपात के विरोध में प्रदर्शन  (AFP or licensors)

यूरोप के धर्माध्यक्षों ने यूरोप की संसद से जीवन की रक्षा की अपील की

यूरोप के काथलिक धर्माध्यक्षों ने यूरोपीय संसद के अध्यक्ष को प्रेषित एक पत्र में, सभी के जीवन की देखभाल के महत्व पर जोर दिया है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

यूरोप, बृहस्पतिवार, 25 फरवरी 21 (रेई)- यूरोप के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने नवंबर 2020 को पोलैंड में गर्भपात के लिए तथाकथित "अधिकार" पर यूरोपीय संसद द्वारा पारित एक प्रस्ताव के कुछ बिंदुओं पर सवाल उठाया है।

यूरोपीय संसद के अध्यक्ष डेविड मरिया सास्सोली को सम्बोधित पत्र में धर्माध्यक्षों ने जोर दिया है कि काथलिक कलीसिया जो मुश्किल या अवांछित गर्भधारण से उत्पन्न जीवन की स्थितियों में महिलाओं का समर्थन करना चाहती है, "सभी अजन्मे जीवन की रक्षा और देखभाल करने को कहती है।"

उन्होंने कहा, "हर मानव व्यक्ति की सृष्टि ईश्वर ने की है और उसे सुरक्षा की जरूरत है खासकर, उस समय जब वह सबसे कमजोर हालत में होता है। अंतरराष्ट्रीय कानून में बच्चों को जन्म से पहले एवं बाद में विशेष सुरक्षा देने की बात कही गई है।"

पोलैंड में गर्भपात पर प्रतिबंध

पोलिश संवैधानिक अदालत द्वारा अक्टूबर 2020 के एक फैसले ने देश में गर्भपात पर लगभग पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया, इसे केवल बलात्कार या अनाचार के मामलों में या जब गर्भावस्था से मां के जीवन को खतरा है तब अनुमति दी गई।

प्रतिबंध, जो जनवरी में लागू हुआ, इसके कारण समर्थकों और विरोधियों के बीच विभाजित समूहों में, पोलैंड की राजधानी वर्साव में विरोध प्रदर्शन हुए।

अक्टूबर की अदालत के फैसले में पाया गया कि 1993 के गंभीर और अपरिवर्तनीय भ्रूण असामान्यता के मामलों में गर्भपात की अनुमति देनेवाला कानून असंवैधानिक था। इसने इस आधार पर अपने फैसले को सही ठहराया कि अजन्मे बच्चे मनुष्य हैं और इसलिए पोलिश संविधान के तहत सुरक्षा के लायक हैं, जो जीवन के अधिकार को सुनिश्चित करता है।

यूरोपीय संघ के नवंबर 2020 के प्रस्ताव ने यूरोपीय संघ के संस्थानों को "यौन और प्रजनन स्वास्थ्य अधिकारों" का समर्थन करने का आह्वान किया,  जिससे सदस्य देशों को और नागरिक समाज समूहों को गर्भपात को बढ़ावा देनेवाले हेतु समर्थन।

कानून के शासन का तर्क

धर्माध्यक्षों ने अपने पत्र में इस बात पर प्रकाश डाला कि न तो यूरोपीय संघ कानून और न ही मानवाधिकारों पर यूरोपीय सम्मेलन, गर्भपात का अधिकार प्रदान करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप यह मामला सदस्य राज्यों की कानूनी प्रणालियों तक पहुंच जाता है। इस संबंध में, यूरोपीय संघ का एक मूल सिद्धांत, अधिवेशन का सिद्धांत है जिसके तहत यूरोपीय संघ केवल सदस्य देशों द्वारा उस पर प्रदत्त दक्षताओं की सीमा के आधार पर कार्य कर सकता है, जो कि संधियों में उद्देश्यों को प्राप्त करने के लक्ष्य के साथ हस्ताक्षरित हैं।

धर्माध्यक्षों ने कहा कि इस सिद्धांत का अवलोकन करना, "कानून के शासन की आवश्यकता" है, क्योंकि यूरोपीय संसद का संकल्प बताता है कि "कानून के शासन के लिए सम्मान संघ के कामकाज के लिए आवश्यक है।" उसी कानून के शासन के लिए इसके सदस्य राष्ट्रों की दक्षताओं और उनकी विशेष योग्यताओं के अभ्यास के लिए भी सम्मान की आवश्यकता है।"

धर्माध्यक्षों ने पोलैंड में कानून से उत्पन्न विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में गिरजाघरों और पूजा स्थलों पर अस्वीकार्य हमलों के संबंध में निंदा या एकजुटता के भाव की कमी पर दुःख व्यक्त किया है।

25 February 2021, 16:27