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ब्रिस्बेन के महाधर्माध्यक्ष मार्क कोलरिज ब्रिस्बेन के महाधर्माध्यक्ष मार्क कोलरिज   (ANSA)

ऑस्ट्रेलियाई कलीसिया द्वारा मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता

सामाजिक न्याय रविवार, 30 अगस्त के पहले, ऑस्ट्रेलिया के काथलिक धर्माध्यक्षों ने एक बयान जारी कर सभी को कोविद -19 के तहत मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

ऑस्ट्रेलिया, शनिवार 08 अगस्त,2020 (वाटिकन न्यूज) : ऑस्ट्रेलिया के काथलिक धर्माध्यक्ष विश्वासी समुदायों, सरकारों और आम लोगों को मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, खासकर कोविद -19 महामारी के इस दौर में जब लोगों में चिंता और निराशा की भावनाएं पैदा हो रही हैं।

30 अगस्त को मनाए जाने वाले सामाजिक न्याय रविवार के मद्देनजर, ऑस्ट्रेलियाई काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन (एसीबीसी) ने एक बयान जारी किया, जिसका शीर्षक है, "ऑस्ट्रेलिया में मानसिक स्वास्थ्य के साथ पूर्ण जीवन जीना "।

सामाजिक न्याय के बयान २०२०-२१ को जारी करते हुए, सामाजिक न्याय, मिशन और सेवा के लिए एसीबीसी आयोग के लिए धर्माध्यक्षों के प्रतिनिधि और सिडनी के सहायक धर्माध्यक्ष टेरेंस ब्रैडी ने सभी काथलिकों को बयान के संदेश और चुनौतियों का सामना करने को कहा।

19-पृष्ठ के बयान पर एसीबीसी के अध्यक्ष, ब्रिस्बेन के महाधर्माध्यक्ष मार्क कोलरिज ने हस्ताक्षर किया है।

चिंता और निराशा

धर्माध्यक्ष ब्रैडी ने लिखा, “यह कोविद-19 महामारी के संदर्भ में एक सामयिक संदेश है। महामारी हमारे सदस्यों, स्कूलों और समुदायों के कई सदस्यों को प्रभावित कर रही है।” "चिंता और निराशा की व्यक्तिगत भावनाओं को हम सभी इस समय साझा करते हैं, यह सभी के मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए और अधिक जागरूक और सक्रिय बनने का अवसर प्रदान करता है।"

बयान में कहा गया है कि पल्लियाँ, संगठन और समुदाय मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों का सामना करने वालों के प्रति स्वीकृति, समावेश, देखभाल और उपचार के स्थान हो सकते हैं, न कि अस्वीकृति, निर्णय या कलंक के स्थान।

कमजोर और वंचित लोग

ऑस्ट्रेलिया में काथलिक कलीसिया सरकारों और नीति-निर्माताओं की प्रतिबद्धता की मांग करती है ताकि बहुत से लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को बचाया जा सके।

संत पापा फ्राँसिस का हवाला देते हुए, बयान में कहा गया है कि हमारे समाज की सामान्य प्रतिबद्धता के परीक्षण में हम उन लोगों की देखभाल करते हैं जो सबसे कमजोर या वंचित हैं।

इस संबंध में, ऑस्ट्रेलियाई कलीसिया राष्ट्रों से उन नीतियों को संबोधित करने के लिए कहता है जो ऑस्ट्रेलियाई आदिवासी, शरणार्थियों, बेघर लोगों और जेल में बंद लोग जो पहले से ही अनिश्चित परिस्थितियों में हैं।

येसु का तरीका

"हमारा समाज हमें उन लोगों से दूर रहने या उन्हें दूर रखने कोशिश करता है, जो अपनी निर्बलताओं में हमसे संपर्क रखने की कोशिष करते हैं।" धर्माध्यक्ष ब्रैडी कहते हैं कि यह येसु का तरीका नही हैं।

"हमें येसु के समान उन लोगों के समीप जाना है जो मानसिक रूप से अस्वस्थता का अनुभव कर रहे हैं और हमें स्वीकार करना हैं कि वे मसीह के शरीर के सदस्य हैं वे हमारे ही भाई-बहन  हैं। इसके बाद ही हम कह सकते हैं कि 'हम सब एक साथ हैं' तभी हम जीवन को पूर्ण रूप से जी सकते हैं।''

08 August 2020, 15:08