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बांग्लादेश-म्यानमार सीमा पर जनसंकट, फाईल फोटो बांग्लादेश-म्यानमार सीमा पर जनसंकट, फाईल फोटो   (AFP or licensors)

चटगांव में हिंसा के बाद कलीसिया ने किया शांति का आग्रह

बांग्लादेश के दक्षिण-पूर्व में चटगांव पहाड़ियों में हुए एक हमले में कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं के मारे जाने से स्थानीय लोगों फैली दहशत और असुरक्षा के बाद बंग्लादेश की कलीसिया ने शांति बनाये रखने की अपील की है।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

चटगाँव, शुक्रवार, 10 जुलाई 2020 (ऊका समाचार): बांग्लादेश के दक्षिण-पूर्व में चटगांव पहाड़ियों में हुए एक हमले में कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं के मारे जाने से स्थानीय लोगों फैली दहशत और असुरक्षा के बाद बंग्लादेश की कलीसिया ने शांति बनाये रखने की अपील की है।

प्राणघाती हिंसा

बांग्लादेश के चिटगांव पहाड़ी क्षेत्र में एक जातीय राजनीतिक दल के कई सदस्यों की हत्या के बाद कलीसिया ने राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और घातक हिंसा को समाप्त करने का आह्वान किया है।

7 जुलाई को बंदरबन जिले में परबत्या छत्रग्राम जन संघर्ष समिति (पीसीजेएसएस) के एमएन लार्मा प्रतिद्वंद्वी गुट के एक नेता के घर में अज्ञात बंदूकधारियों ने गोलीबारी की, जिसमें छह की मौत हो गई और तीन गंभीर रूप से घायल हो गए।

बंदरबन के पुलिस अधीक्षक ज़रीन अख्तर ने कहा कि वे हत्यारों का पता लगाने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा कि हिंसा से इलाके के लोगों में दहशत फैल गई है और अधिकारियों ने गश्त पर पुलिस और सैनिकों को तैनात किया है।

कलीसिया ने की शांति की अपील  

भारत एवं म्यानमार की सीमा से लगी चटगाँव की पहाड़ियाँ बंग्लादेश का एकमात्र पर्वतीय क्षेत्र है जहाँ लगभग 25 विभिन्न जनजातियाँ निवास करती हैं, इनमें अधिकांश, बौद्ध अथवा ख्रीस्तीय धर्मों के अनुयायी हैं। काथलिक धर्मानुयायियों की संख्या यहाँ लगभग 32,000 है जिनमें दो तिहाई आदिवासी मूल के हैं।  

चटगाँव महाधर्मप्रान्त की न्याय एवं शांति सम्बन्धी समिति ने इस सप्ताह के प्राणघाती हमले की कड़ी निन्दा की है तथा हिंसा को समाप्त करने का आह्वान किया है। समिति के समन्वयकर्त्ता फादर आलबेर्ट सोरेन ने ऊका न्यूज़ से कहा, "हिंसा से लोगों के साथ-साथ पुरोहितों में भी दहशत फैली है, जो प्रेरिताई के लिये, विभिन्न राजनैतिक दलों की निगरानी में, एक गाँव से दूसरे गाँव की यात्रा करते हैं। उन्होंने कहा कि हर प्रकार की हिंसा का अन्त होना चाहिये तथा शांति की स्थापना की जानी चाहिये।"

फादर सोरेन ने बताया कि स्थानीय कलीसिया ने कई अवसरों पर विभिन्न प्रतिद्वन्दी दलों एवं सरकार को एक साथ मिलकर वार्ता के लिये आमंत्रित किया है किन्तु अभी तक उसे बहुत कम सफलता मिली है।

10 July 2020, 11:11