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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर   (ANSA)

‘लौदातो सी सप्ताह’ मनाती हुई एशिया की कलीसिया

संत पापा फ्राँसिस के प्रेरितिक उद्बोघन ‘लौदातो सी’ की 5 वीं वर्षगांठ के अवसर पर,एक सप्ताह17 से 24 मई तक सामान्य घर की देखभाल के तहत इंडोनेशिया, पाकिस्तान और भारत के स्थानीय कलीसिया बढ़-चढ़ कर भाग ले रहे हैं।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार 20 मई 2020 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्राँसिस ने 24 मई, 2015 को अपने विश्वपत्र लौदातो सी (ईश्वर की महिमा हो)  पर हस्ताक्षर किए, दस्तावेज़ के 5 वीं वर्षगांठ मनाने के लिए, ‘लौदातो सी सप्ताह’(17 से 24 मई) में दुनिया भर में अनेक देशों के धर्मप्रांतों, पल्लियों, संगठनों और धर्मसमुदायों ने हमारे आमघर की देख-भाल के तहत अनेक पहलों की शुरुआत की है।

इंडोनेशिया

इंडोनेशिया में, जकार्ता के कार्डिनल इग्नासियुस सुहारो ने लौदातो सी पहल के तहत, अपने सभी विश्वासियों को 'नेक दिल' इन्सान बनने का आह्वान किया। कार्डिनल ने उन चीजों को बर्बाद नहीं करने की सलाह दी जो दूसरों के काम आ सकती है।

"एक नेक दिल के साथ, हम अपनी धरती को एक समृद्ध और शांतिपूर्ण जगह बना सकते हैं। हमारे आमघर की रक्षा करने हेतु हमें पूरा प्रयास करते रहना है।" उन्होंने रविवारीय मिस्सा धर्मविधि के लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान कहा जो जकार्ता महाधर्मप्रांत के विश्वासियों के कहा।

इंडोनेशिया के धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष कार्डिनल इग्नासियुस ने विश्वासियों से हमारे आमघर के लिए संत पापा फ्राँसिस की चिंता को साझा किया और इसे सभी जीवों एवं मनुष्यों के लिए एक समृद्ध और शांतिपूर्ण जगह बनाने का आग्रह किया।

इस संबंध में, जकार्ता महाधर्मप्रांतीय न्याय और शांति आयोग ने विश्वासियों से कहा कि वे भोजन को बर्बाद न करें।

आयोग के अध्यक्ष फादर अगुस्टिन हेरी विबोवो ने कहा, "हम उतना ही भोजन खरीदें जिसे हम खतम कर सकते हैं क्योंकि दुनिया में बहुत से लोग हैं उनहें इस भोजन की जरुरत है। इसके अलावा, इस्तेमाल किए गए कपड़ों को यूँ ही नहीं फेंक देना चाहिए क्योंकि वे अपशिष्ट समस्या पैदा कर सकते हैं।”

उन्होंने परिवारों को पेड़ लगाने और किसानों की मदद करने के लिए प्रोत्साहित किया।

पाकिस्तान

पाकिस्तान में, फ़ैसलाबाद के धर्माध्यक्ष इंद्रियस रहमत ने रविवार को पवित्र मिस्सा के दौरान सृस्टि की अमूल्य वस्तुओं के लिए ईश्वर को धन्यवाद दिया। उन्होंने सभी विश्वासियों को सृष्टि के देखभाल, संसाधनों के उचित उपयोग,लोगों और सभी जीव जन्तुओं की सुरक्षा हेतु प्रतिबद्ध होने का आह्वान किया।

पवित्र मिस्सा के बाद एक संगोष्ठी में, ‘लौदातो सी’ की मुख्य विशेषताएं पृथ्वी और पर्यावरण की वर्तमान स्थिति पर चर्चा हुई। संगोष्ठी में वृक्षारोपण भी शामिल था जिसमें कई लोगों ने भाग लिया।

धर्माध्यक्ष रहमत ने लोगों से स्थानीय पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों का उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने प्लास्टिक की थैलियों के उपयोग के खिलाफ चेतावनी दी जो स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं।

भारत

भारत के मुंबई शहर में, मुम्बई महाधर्मप्रांत के पर्यावरण हेतु बने कार्यालय ने एक छोटी सी पुस्तिका तैयार की है, जो पूरे वर्ष के लिए एक टिकाऊ जीवन शैली के लिए व्यवहार और जागरूकता की पहल का सुझाव देती है, विशेष रूप से माता-पिता, युवा लोगों और छात्रों के लिए, यहां तक ​​कि कोविद -19 के लॉकडाउन की अवधि के दौरान भी। ।

पर्यावरण कार्यालय का नेतृत्व करने वाले फादर जोसेफ गोंसाल्वेस ने कहा कि काथलिक समुदाय "टिकाउ जीवन शैली को अपनाने के लिए तथा न्याय और स्थायी भविश्य के निर्माण के लिए विचार मंथन और प्रार्थना करना चाहता है।"

मुक्तिदाता को समर्पित धर्मसमाज के फादर इवेल मेंडान्हा ने ‘लौदातो सी’ पर वीडियो की एक श्रृंखला बनाई है। वीडियो में सृजन के संरक्षण के अलग अलग पहलू पर दैनिक चिंतन के अलावा कुछ गतिविधियों का सुझाव दिया गया है जिसे लौदातो सी सप्ताह के दौरान हर दिन अभ्यास किया जा सकता है। फादर मेंडाना सभी बपतिस्मा प्राप्त भारतीयों से आग्रह किया है कि वे गंभीरता से लौदातो सी में बताए गए मानदंडों का पालन करते हुए, चिंतन और कार्रवाई का मार्ग अपनाएँ।

तारुमित्र छात्र आंदोलन

भारत के येसु समाजियों ने संसाधनों और कार्यों की एक पूरी श्रृंखला की सिफारिश करते हुए, स्कूलों के लिए विश्वपत्र के महत्व पर एक कार्यक्रम शुरू किया है। छात्र संगठन "तरुमित्र" में शामिल होने के लिए छात्रों को प्रोत्साहित किया जाता है, जिसका मिशन "पृथ्वी पर स्वस्थ पर्यावरण की रक्षा और बढ़ावा देना" है।

तारुमित्र छात्र आंदोलन की कल्पना और शुरूआत 1998 में पटना प्रांत के येसुसमाजियों द्वारा की गई थी और अब यह दक्षिण एशिया के जेसुइट सम्मेलन की एक परियोजना है।

भारत भर में सैकड़ों हाई स्कूल और कॉलेजों को एक साथ लाने वाले तरुमित्र नेटवर्क को एक पारिस्थितिक संवेदनशीलता फैलाने और "पृथ्वी के दोस्त" की आध्यात्मिकता को बढ़ावा देने के लिए आमंत्रित किया जाता है और "आम घर" के अनावश्यक शोषण एवं दोहन तथा इसकी रक्षा के बारे जानकारी दी जाती है।

20 May 2020, 16:08