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इटली के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष ग्वालतीयेरो बस्सेत्ती इटली के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष ग्वालतीयेरो बस्सेत्ती  (ANSA)

मिस्सा समारोहों पर बैन का इटली धर्माध्यक्षों द्वारा विरोध

इटली के काथलिक धर्माध्यक्षों ने दूसरे चरण के लिए इटली सरकार की योजनाओं के कुछ पहलुओं पर आपति जतायी है, यह कहते हुए कि कलीसिया, समझौता किए गए धर्म की स्वतंत्रता के अभ्यास को स्वीकार नहीं कर सकती।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

इटली, मंगलवार, 28 अप्रैल 2020 (रेई)- इटली के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन (चेई) ने इटली के प्रधानमंत्री जुसेप्पे कोनते द्वारा रविवार शाम को कोरोना वायरस संकट के, दूसरे चरण की योजना प्रस्तुत किये जाने के तुरन्त बाद अपनी प्रत्युत्तर दी, जिसके अनुसार 3 मई से लॉकडाउन में ढील दी जायेगी। 

सरकार को प्रेषित एक पत्र में धर्माध्यक्षों ने उन नीतियों पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है जो कलीसिया के प्रेरितिक कार्यों को प्रतिबंधित रखना जारी रखती है। इटली के धर्माध्यक्षों ने यह स्पष्ट किया है कि धर्म मानने के अभ्यास में किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।   

इटली में कलीसिया द्वारा प्रदान किये जाने वाले कार्यों पर गौर करते हुए धर्माध्यक्षों ने लिखा है कि "यह सभी के लिए स्पष्ट होना चाहिए कि इस संकट के समय में गरीबों की सेवा में प्रतिबद्धता, जो अत्यन्त महत्वपूर्ण है विश्वास से उत्पन्न होता है जिसे अपने स्रोत से पोषित होने की आवश्यकता है, विशेषकर, संस्कारीय जीवन से।

राज्य एवं कलीसिया के कर्तव्य

पत्र में धर्माध्यक्षों ने संकेत दिया है कि वे सरकार के साथ समझौते में हैं, जिसके परिणाम स्वरूप चेई ने सभी स्वास्थ्य नियमों के अनुपालन में, कोरोना वायरस के संक्रमणकालीन चरण के जवाब में दिशानिर्देश एवं प्रोटोकॉल प्रस्तावित किया था।

इसके बावजूद प्रधानमंत्री कोनते द्वारा प्रस्तुत योजना, लोगों के साथ सामूहिक रूप से ख्रीस्तयाग सम्पन्न करने की संभवना को मनमाने ढंग से दरकिनार करता है।

धर्माध्यक्षों ने इस योजना के लिए उत्तरदायी लोगों को याद दिलाया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय और तकनीकी विज्ञान समिति – स्वास्थ्य संबंधी मामलों एवं कलीसिया जो ख्रीस्तीय समुदाय के जीवन को संगठित करने के लिए बुलायी गई है, उपायों का सम्मान करते हुए परन्तु अपनी स्वायत्तता की पूर्णता में, उसके लिए उपयुक्त दिशानिर्देश प्रदान करे।

कलीसिया के प्रेरितिक कार्यों की पुनः शुरूआत

धर्माध्यक्षों ने अंतरिम मंत्री के पहले के बयान पर गौर किया है जिसमें कहा गया था कि "उपासना की स्वतंत्रता के व्यापक संभव अभ्यास की अनुमति देने के लिए सरकार द्वारा नए उपायों का अध्ययन किया जा रहा था।" बयान चेई के महासचिवालय, आंतरिक मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के बीच हुई रचनात्मक चर्चा के बाद आयी थी। इस बीच, "कलीसिया ने कष्टपूर्वक और जिम्मेदारी के साथ स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए सरकार द्वारा लागू की गई सीमाओं को स्वीकार किया"।

सरकारी कार्यालयों के साथ बातचीत में, धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने बार-बार और स्पष्ट रूप से जोर देकर कहा है कि जैसे ही महामारी से निपटने के लिए लागू उपाय हटाये  जाएंगे, कलीसिया अपने प्रेरितिक कार्यों को फिर से शुरू करने में सक्षम होने की मांग करेगा।

सरकार का प्रत्युत्तर

प्रधानमंत्री कार्यालय ने धर्माध्यक्षों के पत्र को स्वीकार किया है। प्रशासन की ओर से प्रधानमंत्री के प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी पुष्टि इस प्रकार की गई है कि "आने वाले दिनों में पहले से ही एक प्रोटोकॉल का अध्ययन किया जाएगा, जो जितनी जल्दी सम्भव हो विश्वासियों को धर्मविधि समारोहों में भाग लेने की अधिकतम अनुमति देगा।"

28 April 2020, 16:05