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राँची की उर्सुलाईन धर्मबहनों द्वारा संचालित शेल्टर होम राँची की उर्सुलाईन धर्मबहनों द्वारा संचालित शेल्टर होम 

लॉकडाउन की मार झेलते लोगों की सहायता करती राँची कलीसिया

भारत में कोरोना वायरस से बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए सरकार ने लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ाने की घोषणा की है। देश के विभिन्न क्षेत्रों से शहरों में मजदूरी करने गये लोग इस लॉकडाउन में बुरी तरह फंसे हुए हैं। राँची महाधर्मप्रांत उन लोगों की मदद हरसंभव करने का प्रयास कर रहा है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

राँची, बृहस्पतिवार, 16 अप्रैल 20 (रेई) - भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड 19 महामारी के प्रकोप को फैलने से रोकने के लिए 24 मार्च को देशभर में 21 दिनों के बाद अब 3 मई तक लॉकडाउन की घोषणा की है जिसने देश के 1.3 बिलियन लोगों की गतिविधियों को पूरी तक नियंत्रित कर दिया है।

लॉकडाउन की घोषणा के कारण लाखों विस्थापित एवं तिहाड़ी मजदूर घर नहीं लौट पाये हैं। लॉकडाउन की घोषणा के बाद दिल्ली एवं मुम्बई जैसे बड़े शहरों के बस पड़ावों पर हजारों लोगों की भीड़ दिखाई पड़ी  थी। भीड़ को तितर बितर करने के लिए पुलिस से उन पर लाठी चार्ज भी की थी।  

लॉकडाउन में फंसे लोग

राँची के महाधर्माध्यक्ष फेलिस टोप्पो एवं राँची के सहायक धर्माध्यक्ष ने विश्वासियों को एक अपील जारी कर कहा था कि “ये कठिनाई भरे दिन हैं और यद्यपि हम लॉकडाउन में रह रहे हैं एवं अपने आप को सुरक्षित रखने का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं, हजारों विस्थापित लोग जहाँ हैं फंसे हुए हैं, वे नहीं जानते हैं कि कहाँ जाना है अथवा अपने  परिवार एवं बच्चों के साथ बिना यातायात, भोजन और आर्थिक सुविधा के सड़कों पर पैदल यात्रा कर रहे हैं।”

मरियम और योसेफ के समान कोई जगह नहीं

धर्माध्यक्षों ने गौर किया कि फंसे हुए बहुत सारे विस्थापित झारखंड के हैं। उन्होंने कहा कि जबकि हम अपनी सुरक्षा के लिए चिंतित हैं ये बेचारे लोग सबसे अधिक पीड़ित हैं। अनेक लोगों को जोसेफ और मरियम के समान जगह नहीं मिल रही है। इन प्रवासियों द्वारा सामना किया गया अंधेरा, हमारे मुकाबले बहुत घना और परेशान करने वाला है। कई लोग अपने घर वापस लौटने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि ले अब उन लोगों के लिए बोझ बन गये हैं जिनकी वे सेवा करते थे, कई बार बहुत कम मजदूरी में।

चिंता, देखभाल और सुरक्षा

रांची महाधर्मप्रांत ने कई उपाय बतलायें हैं जिनके माध्यम से फंसे हुए प्रवासियों को कलीसिया द्वारा मदद दी जा सकती है। उन्होंने आग्रह किया है कि लोगों के धर्म, जाति और भाषा का फर्क किये बिना उनकी चिंता की जाए। स्थानीय कलीसिया राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर इन गरीब लोगों की मदद करें। यद्यपि प्रवासियों को कलीसिया की संस्थाओं की ओर से शरण, भोजन और कपड़े मिल रहे हैं किन्तु उन्हें अपने परिवारों के साथ सम्पर्क करना और जानकारी भी देना आवश्यक है कि वे सुरक्षित हैं।

धर्माध्यक्षों ने कहा, “सुरक्षित रहने के लिए इन प्रवासियों को भी सुरक्षित रखना आवश्यक है। यदि ये लोग कोविड -19 से संक्रमित हो जायेंगे तो देश के बाकी लोगों के संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाएगा।

प्रवास विस्थापन क्यों?

झारखंड खनिजों में समृद्ध है। यह देश के 40% से अधिक संसाधनों की आपूर्ति करता है किन्तु राज्य के 39.1 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं और पाँच साल से कम उम्र के 19.6 प्रतिशत बच्चे कुपोषण के शिकार हैं।

24 प्रतिशत लोग शहरों में रहते हैं बाकी आबादी गाँवों में रहती है। राज्य में बुनियादी ढाँचे और आय उपार्जन की कमी के साथ, प्रवास का विकल्प अक्सर एक आकर्षक विकल्प प्रतीत होता है।

भारत के आर्थिक सर्वेक्षण 2016-2017 के अनुसार, राज्य से बाहर जाकर काम करने वालों में झारखंड के लोगों की आवादी सबसे अधिक थी। काम करने के उम्र के 5 प्रतिशत लोग, हर साल नौकरी के अवसर, शिक्षा और परम्परागत जीविकोपर्जन खो देने के कारण पलायन करते हैं। पंजाब, हरियाणा और महाराष्ट्र, आदि राज्य झारखंड के लोगों को आकर्षित करते हैं। यहाँ से बहुत सारे लोग घरेलू कामकाजी के रूप में दिल्ली भी पलायन करते हैं।

कोविड -19 लॉकडाउन पीड़ित और राँची काथलिक कलीसिया

विस्थापितों की दयनीय दशा देख झारखंड सरकार ने कलीसिया से सहायता की मांग की थी जिससे कि राज्य में फंसे लोगों को आश्रय एवं अन्य सुविधाएँ प्रदान की जा सके। इस आग्रह पर राज्य की काथलिक कलीसिया ने आश्रय, भोजन और मौलिक आवश्यकताओं को उपलब्ध कराने का प्रबंध किया है। कोविड 19 के संक्रमण से बचने के लिए जारी लॉकडाउन में फंसे प्रवासियों की मदद हेतु राँची की काथलिक कलीसिया ने 14 केंद्र स्थापित किये हैं।

विभिन्न धर्मसंघी संस्थाओं द्वारा स्थापित शेल्टर होम

अतिथियों का स्वागत करने में पश्चिम बंगाल की सीमा स्थित मूरी पहला केंद्र है जहाँ 46 अतिथि आ चुके हैं। इस केंद्र को उर्सुलाईन उच्च विद्यालय में स्थापित किया गया है जिसका संचालन उर्सुलाईन धर्मबहनें कर रही हैं।

मूरी में शरण लिए हुए अतिथियों में छः महिलाएँ, एक तीन साल का बच्चा, दूसरा एक साल का और एक तीन माह का शिशु शामिल हैं। उनमें से एक गर्भवती महिला भी है। यहाँ करीब 200 लोगों के ठहरने की व्यवस्था की गई है। 4 अप्रैल को राँची के सहायक धर्माध्यक्ष थेओदोर मसकरेनहास और राँची के जेस्विट प्रोविशल फादर जोसेफ मरियानुस कुजूर और अन्य पुरोहितों ने केंद्र का दौरा किया। उन्होंने नागरिक एवं कलीसियाई अधिकारियों के बीच अच्छे सहयोग की सराहना की। अतिथियों का हाल पूछते हुए उन्होंने इसे अपना घर समझने को कहा तथा आश्वासन दिया कि उनके साथ भाई-बहनों की तरह स्नेह पूर्व वर्ताव  किया जाएगा। झारखंड की कुल आबादी के 68.8 प्रतिशत लोग हिन्दू हैं।

राँची की मदर तेरेसा की धर्मबहनें राँची जिला प्रशासन के साथ मिलकर 600 लोगों के लिए समुदायिक किचन का संचालन कर रही हैं जिसे एक माह के लिए स्थापित किया गया है। राँची के महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स टोप्पो एस.जे ने 7 अप्रैल को इसका उद्घाटन किया।

राँची के जेस्विट पुरोहितों ने कोविड-19 के कारण लॉकडाउन में फंसे विस्थापितों के लिए दो शेल्टर होम खोला है। पहला शेल्टर होम तमाड़ स्थित संत जोन्स स्कूल डोरेया में और दूसरा शेल्टर होम उर्सुलाईन मध्य विद्यालय मूरी में।

उसी तरह संत अन्ना की पुत्रियों के धर्मसंघ राँची की धर्मबहनों ने भी दो शेल्टर होम तैयार किया है।

16 April 2020, 22:43