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चेक के शहीद की याद में वाटिकन रेडियो में कार्यक्रम का आयोजन

फादर जोसेफ तुफर के जीवन एवं शहादत की याद करने हेतु परमधर्मपीठ के लिए चेक के राजदूत ने वाटिकन रेडियो में एक कार्यक्रम का आयोजन किया। फादर जोसेफ तुफर की हत्या चेकोस्लावाकिया के कम्यूनिस्ट शासन के हाथों 1950 में हुई थी।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 7 मार्च 2020 (रेई)˸ फादर जोसेफ तुफर के जीवन एवं शहादत की याद करने हेतु परमधर्मपीठ के लिए चेक के राजदूत ने वाटिकन रेडियो में एक कार्यक्रम का आयोजन किया। फादर जोसेफ तुफर की हत्या चेकोस्लावाकिया के कम्यूनिस्ट शासन के हाथों 1950 में हुई थी।  

वाटिकन के लिए चेक के राजदूत वाक्लव कोलाजा द्वारा आयोजित बृहस्पतिवार के प्रेस सम्मेलन में वाटिकन के कई राजदूतों ने भाग लिया। कार्यक्रम की विषयवस्तु थी, "चमत्कार बनाम तानाशाही" जिसमें फादर जोसेफ तुफर की मृत्यु पर चर्चा की गयी।

चमत्कार की हेराफेरी

11 दिसम्बर 1949 को जब फादर तुफर चिहोस्ट गाँव में ख्रीस्तयाग अर्पित कर रहे थे तभी पवित्र संदुक के ऊपर रखा लकड़ी का क्रूस एक ओर झुकना शुरू हुआ और तिरछा खड़ा हो गया।  

फादर तुफर, वेदी को पीठ कर उपदेश दे रहे थे अतः वे इस चमत्कार को अपनी आँखों से नहीं देख पाये किन्तु मिस्सा में भाग लेने वाले 19 लोगों ने इसे देखा और बाद में उन्हें इसकी जानकारी दी।

चिहोस्ट के चमत्कार की खबर शीघ्र फैल गयी और कम्यूनिस्ट शासन ने अपने फायदे के लिए इसमें हेरफेर करना शुरू किया।

चेक टेलीविजन के निदेशक एवं फादर तुफर पर डॉक्यूमेंटरी फिल्म "अज़ इफ वी शुड डाई टूडे" के निर्माता पैट्रिक डिविस ने वाटिकन रेडियो को बतलाया कि कम्यूनिस्ट शासन ने चिहोस्ट चमत्कार का प्रयोग काथलिक कलीसिया को बदनाम करने के लिए किया।

तख्ता पलट के बाद फरवरी 1948 में चेकोस्लोवाकिया में कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता में आई थी। डिविस ने कहा कि कम्यूनिस्ट शासन ने काथलिक कलीसिया को अपना "सबसे प्रमुख वैचारिक शत्रु" माना। सन् 1949 को काथलिकों पर कठोर दमन शुरू हो गया। चिहोस्ट चमत्कार को एक प्रचार का अवसर बतला कर इसे जब्त कर लिया।  

फेक न्यूज़

फादर तुफर राज्य पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिये गये। झूठी बात स्वीकार कराने के लिए उन्हें बेरहमी से पीटा गया। अधिकारी चाहते थे कि वे यह स्वीकार करें कि पूरी घटना का आयोजन वाटिकन के आदेश के तहत किया गया था तथा एक क्रियाविधि के द्वारा क्रूस को हिलने में मदद दी गयी थी।  

डिविस ने कहा कि "फादर तुफर ने इस बात को अस्वीकार करते हुए उसपर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया। उसने अपनी स्थिति का बचाव करते हुए कहा कि उसने यह चमत्कार नहीं किया है बल्कि यह एक अलौकिक घटना थी और इसके लिए वे मर गये। चिहोस्ट के पल्ली पुरोहित ने ज़ख्मों को स्वीकार किया और 25 फरवरी 1950 को उनकी मृत्यु हो गई।"

टूटे संबंध

चेकोस्लावाकिया के कम्यूनिस्ट शासक ने फिर भी इस घटना का प्रयोग वाटिकन के राजनयिकों को देश से निष्कासित करने के बहाने के रूप में किया तथा परमधर्मपीठ के साथ अपना संबंध तोड़ दिया।  

इसके बाद उन्होंने सैंकड़ों, पुरोहितों, धर्मबहनों और काथलिक लोकधर्मियों को गिरफ्तार किया एवं चेकोस्लावाकिया की कलीसिया को जब्त कर लिया। काथलिक विरोधी दमन में कई लोग मारे गये।

सच्चाई की जीत

डिविस ने कहा कि फादर तुफर का उदाहरण चेक के काथलिकों में जीवित है। उनकी मृत्यु के पीछे का सच 1968 में एक स्थानीय पत्रकार के द्वारा प्रकट हुआ। उन्होंने कहा कि उनकी कहानी सच्चाई की जीत की कहानी है। जब उन्हें पीट-पीट कर मार डाला गया तब लगा था कि सब कुछ समाप्त हो गया और अब 70 सालों बाद यह एक जीत की कहानी बन गयी है, क्योंकि सच्चाई उभर कर सामने आती है।  

चेक के धर्माध्यक्षों ने फादर जोसेफ तुफर के कारणों को संत प्रकरण हेतु 2013 में ही खोल दिया था ताकि उनके शहादत को विश्वव्यापी कलीसिया के लिए प्रेरणा स्रोत के रूप में प्रस्तुत किया जाए।

 

07 March 2020, 16:49