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पाकिस्तान के ख्रीस्तीय पाकिस्तान के ख्रीस्तीय  (AFP or licensors)

6 मार्च को भारत में शांति के लिए प्रार्थना

पाकिस्तानी ख्रीस्तीय धर्मगुरूओं ने भारत में हालिया सांप्रदायिक दंगों की निंदा की है जो नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के समर्थन एवं विरोध के कारण हुए।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

पाकिस्तान, बुधवार, 4 मार्च 2020 (रेई)˸ नई दिल्ली में 24 फरवरी से दंगे शुरू हुए थे जिसमें 45 लोगों की मौत हो गयी है तथा करीब 250 लोग घायल हो गये हैं।

पाकिस्तान के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के न्याय एवं शांति आयोग ने 1 मार्च को एक सेमिनार का आयोजन किया था, जिसमें विभिन्न ख्रीस्तीय नेताओं और विभिन्न मानवीय कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। सेमिनार में नई दिल्ली में हुई हिंसक घटनाओं को भी प्राथमिकता दी गयी।

उकान समाचार के अनुसार सेमिनार के प्रतिभागियों ने दंगा में पीड़ित लोगों के प्रति गहरी सहानुभूति जतायी तथा सरकार से अपील की कि वह उनकी रक्षा करे।  

कराची के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल जोसेफ कूट्स ने कहा, "भारत सरकार को सभी नागरिकों की सुरक्षा के लिए तत्काल उपाय करना चाहिए, चाहे वे किसी भी आस्था के क्यों न हों।" उन्होंने नई दिल्ली के ख्रीस्तियों एवं सिक्खों की सराहना की जिन्होंने दंगे के समय लोगों का स्वागत एवं रक्षा की।

कराची महाधर्मप्रांत के न्याय एवं शांति आयोग के निदेशक सालेह डियेगो ने ख्रीस्तियों की ओर से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को भारत में हिंसक दंगे का कड़ा विरोध करने के लिए धन्यवाद दिया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने भारत में हो रही हिंसा का विरोध करते हुए ट्वीट में कहा था, "हमारे अल्पसंख्यक भी देश में दूसरे नागरिकों के बराबर हैं।" फादर डियागो ने कहा कि इस वक्तव्य ने न केवल हिन्दूओं को बल्कि पाकिस्तान के अन्य सभी अल्पसंख्यकों को मजबूती प्रदान की है। उन्होंने पाकिस्तान के सभी ख्रीस्तियों से आग्रह किया है कि वे भारत में शांति के लिए 6 मार्च को, एक दिन के उपवास एवं प्रार्थना दिवस के रूप में मनायें।

भारत में हिन्दूओं और मुसलमानों के बीच तनाव और हिंसा बहुत पुराना है जिसके कारण 1947 में पाकिस्तान भारत से अलग हो गया था।

04 March 2020, 16:47