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पवित्र भूमि में बेथलेहेम के येसु का जन्म गिरजाघर  पवित्र भूमि में बेथलेहेम के येसु का जन्म गिरजाघर   (AFP or licensors)

पवित्र भूमि के लिए वार्षिक दान संग्रह की अपील

हर साल की तरह पूर्वी कलीसियाओं के लिए गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ के अध्यक्ष ने "पवित्र भूमि के समर्थन" में दान संग्रह की अपील की है, इसके अनुसार पुण्य शुक्रवार को चढ़ाये जानेवाले विश्वभर के दान को येसु के जन्म स्थान के लिया समर्पित किया जाएगा।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 5 मार्च 2020 (रेई)˸ पूर्वी कलीसियाओं के लिए गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ के अध्यक्ष कार्डिनल सांद्री ने एक पत्र प्रेषित कर पवित्र भूमि के लिए दान संग्रह करने की अपील की है। ब्लेज पास्कल पेनसीस के शब्दों का हवाला देते हुए उन्होंने लिखा है, "येसु की प्राणपीड़ा दुनिया के अंत तक जारी रहेगी, हमें उस समय नहीं सो जाना चाहिए।" कार्डिनल सांद्री इन शब्दों की व्याख्या करते हुए कहते हैं कि ये वाक्य हमें मुक्तिदाता के संघर्ष और पीड़ा के रहस्य की याद दिलाते हैं जिसको वार्षिक धर्मविधि में विशेष रूप से पुण्य सप्ताह एवं पवित्र त्रिदियुम में मनाया जाता है।

2019 के पुण्य शुक्रवार को रोम के कोलोसेयुम में क्रूस रास्ता के अंत में किये गये संत पापा फ्राँसिस की प्रार्थना की याद करते हुए कार्डिनल सांद्री ने कहा, "यह दुनिया की बुराई और पाप पर पुनः समीक्षा है और उन्हें येसु के क्रूस के नीचे रख देना है।"  

कार्डिनल सांद्री ने कहा कि पवित्र भूमि वह वास्तविक स्थल है जहाँ येसु रहे तथा प्राण पीड़ा एवं दुःख सहे, जिसको वे बाद में असीम प्रेम के मुक्तिदायी कार्य में बदल दिये। गेतसेमानी बारी ने खून की उन बूंदों को ग्रहण किया जिसको वे पसीना के रूप में बहाये। विया दोलोरोसा में हम अब भी उनकी परीक्षण और मृत्यु दण्ड की याद करते हैं।  

पवित्र भूमि और विशेषकर ख्रीस्तीय समुदाय जो वहाँ रहती है, उसने विश्वव्यापी कलीसिया के हृदय में महत्वपूर्ण स्थान लिया है। संत पौलुस के शब्दों की याद करते हैं कार्डिनल ने कहा है कि जब कलीसिया येरूसालेम के साथ अपनी एकात्मता व्यक्त करती है जिसमें आर्थिक मदद भी शामिल है तब वह पुनर्निर्माण का कार्य करती है।  

कार्डिनल याद करते हैं कि पवित्र भूमि एवं पूरे मध्यपूर्व को सदियों से कई संघर्षों से होकर गुजरना पड़ रहा है। वे संघर्ष अब भी समाप्त नहीं हुए हैं।  

"लम्बा और थकाऊ युद्ध अब भी लाखों लोगों को शरणार्थी बना रहा है तथा समस्त पीढ़ी को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। वे शांतिपूर्ण बचपन, सौहार्दपूर्ण स्कूली शिक्षा, नौकरी की तलाश में युवावस्था, परिवार का निर्माण, अपनी बुलाहट की पहचान, मेहनती एवं गरिमापूर्ण वयस्क जीवन और शांति भरा बुढ़ापा जैसे मौलिक चीजों से भी वंचित किये जा रहे हैं।"

कार्डिनल ने कहा है कि कलीसिया अब भी ख्रीस्तियों की उपस्थिति की रक्षा एवं आवाजहीनों को आवाज देने का काम कर रही है। वह इन कार्यों को निश्चय ही प्रेरितिक एवं धर्मविधि के स्तर पर करती है और साथ ही साथ, स्कूलों के द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने हेतु गंभीरता से काम करती है जो ख्रीस्तीय पहचान को बनाये रखने एवं भाईचारापूर्ण सह-अस्तित्व के निर्माण के लिए आधारभूत है।    

कार्डिनल ने पत्र में विश्व के सभी ख्रीस्तियों को उनकी उदारता के लिए धन्यवाद दिया है। उन्होंने अंत में कहा है कि तीर्थस्थलों की देखभाल, पवित्र भूमि समर्थन दान-संग्रह के द्वारा ही संभव हो पाया है। ये तीर्थस्थल दिव्य प्रकाशना की यादों, शरीरधारण एवं हमारी मुक्ति के रहस्यों को सुरक्षित रखते और ख्रीस्तीय समुदायों को उनकी पहचान को आधार प्रदान करते हैं।

05 March 2020, 15:32