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दक्षिणी सिनाई में संत कैथरिन का एकांतमठ दक्षिणी सिनाई में संत कैथरिन का एकांतमठ  

आयरिश धर्माध्यक्ष द्वारा "ईश वचन रविवार" के लिए प्रेरितिक पत्र

आयरलैंड के धर्माध्यक्ष ने "ईश वचन रविवार" के पूर्व एक प्रेरितिक पत्र प्रकाशित किया है जिसमें उन्होंने कई चिंतन एवं परामर्श दिये हैं। प्रेरितिक पत्र का उद्देश्य है इस दिन को बेहतर तरीके से मनाने के लिए विश्वासियों को मदद देना।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

आयरलैंड, बृहस्पतिवार, 23 जनवरी 20 (रेई)˸ "ईश वचन रविवार" की स्थापना संत पापा फ्राँसिस ने प्रेरितिक पत्र अपेरूइत ईल्लीस को प्रकाशित करते हुए की है, जिसको हर साल सामान्य काल के तीसरे रविवार को मनाया जाएगा। इस साल इसे 26 जनवरी को मनाया जाएगा। जैसा कि संत पापा ने कहा है इसे ईश वचन को पढ़ने और उसका प्रचार करने के रूप में मनाया जाएगा। 

धर्माध्यक्ष डेरमोन फर्रेल ने प्रेरितिक पत्र में लिखा है कि पवित्र धर्मग्रंथ के माध्यम से प्रभु हमारे हृदय में दस्तक देते हैं। उन्होंने संत जेरोम के शब्दों में कहा है कि "धर्मग्रंथ को नहीं जानना ख्रीस्त को नहीं जानना है।"  

ईश वचन रविवार ˸ धर्मग्रंथ को अपने दिनचर्या का हिस्सा बनाना

धर्माध्यक्ष ने कहा, "उनकी वाणी आज भी हर तरह से गूँजती है। पुनर्जीवित प्रभु बाईबिल के माध्यम से हमें बोलते हैं। वे हमारे मन और हृदय में दस्तक देते हैं। यदि हम उनकी आवाज सुनते और उसपर ध्यान देते हैं तब वे हमारे जीवन में प्रवेश करते और हमारे साथ रहते हैं।"

धर्माध्यक्ष फर्रेल ने कहा है कि बाईबिल नियमों का संग्रह मात्र नहीं है। यह हम सभी के लिए है यह ईश्वर की प्रजा की किताब है। यह प्रार्थना, चिंतन एवं सांत्वना का प्रबल स्रोत है।

ख्रीस्तीय जीवन जीने की चुनौती

बाईबिल हमें निरंतर निमंत्रण और चुनौती देता है कि हम ईश वचन को अपने जीवन में शरीरधारण करने दें, ताकि हम येसु के शिष्य होने के योग्य जीवन जी सकें।

उन्होंने इस बात की ओर भी ध्यान आकृष्ट किया है कि इसके लिए प्रत्युत्तर की जरूरत है और हमें पवित्र धर्मग्रंथ को ध्यानपूर्वक सुनना, लगन से अध्ययन करना, सावधानी पूर्वक चिंतन करना और जिस भावना से वह लिखी गयी है उसी के प्रकाश में उसकी व्याख्या करना है।

उन्होंने कहा, "जब हमारा हृदय एवं मन, पवित्र बाईबिल में ख्रीस्त की उपस्थिति के लिए खुला है तब हम उन्हें अपने पड़ोसियों की जरूरतों में भी पायेंगे।"

पवित्र धर्मग्रंथ हमें चुनौती देता है कि हम उसे अपने दैनिक जीवन में शामिल करें। धर्मग्रंथ कलीसिया की सभी गतिविधियों के केंद्र में है। यह हमें पोषित करता एवं हमारी प्रार्थना और आराधना को आकार देता है। यह हमें दुनिया को समझने में मदद देता है। विश्व के प्रति हमारी समझ को आकार देता है। यह हमें सिखलाता है कि हम किस तरह जीयें एवं एक-दूसरे के साथ रहें।

धर्मग्रंथ के माध्यम से ही प्रभु अपने लोगों से बातें करते हैं और उन्हें मुक्ति का रास्ता दिखलाते हैं।

व्यवहारिक सलाह

अंततः धर्माध्यक्ष फर्रेल "ईश वचन रविवार" को मनाने के लिए कुछ व्यवहारिक बातें बतलाते हैं। उनके अनुसार स्तोत्र का पाठ करना और मिस्सा में ईश्वर के वचन की घोषणा करना चाहिए।

उन्होंने "लेक्टो दिविना" प्रार्थना पर जोर देते हुए उसे ईश वचन का स्वागत करने हेतु फलप्रद रास्ता बतलाया है। उन्होंने कहा है कि इसमें बाईबिल के छोटे अंश को पढ़ा जाना, उस पर चिंतन करना एवं मौन रूप से प्रार्थना करना चाहिए।

 

23 January 2020, 16:07