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म्यानमार के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल चार्ल्स बो म्यानमार के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल चार्ल्स बो  

एफएबीसी अध्यक्ष ने पोप की थाईलैंड व जापान यात्रा का स्वागत किया

एशियाई काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों के संघ (एफएबीसी) ने दो एशियाई देशों, थाईलैंड एवं जपान में संत पापा फ्राँसिस की आगामी प्रेरितिक यात्रा का स्वागत किया है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

यंगोन, बृहस्पतिवार, 24 अक्टूबर 2019 (मैटर्स इंडिया)˸ संत पापा फ्राँसिस 20-23 नवम्बर तक थाईलैंड एवं 23-26 नवम्बर तक जापान की यात्रा करेंगे।

थाईलैंड में संत पापा की प्रेरितिक यात्रा की विषयवस्तु है- "ख्रीस्त के शिष्य, मिशनरी शिष्य"। प्रेरितिक यात्रा में सियाम प्रेरितिक विकारियेट की 350वीं जयन्ती की याद की जायेगी जिसकी स्थापना 1669 में की गयी थी।

जापान के लिए प्रेरितिक यात्रा की विषयवस्तु में जीवन और सृष्टि की रक्षा पर प्रकाश डाला गया है और इसे संत पापा के प्रेरितिक विश्व पत्र "लाओदातो सी" से लिया गया है। इस विश्व पत्र में संत पापा प्रत्येक व्यक्ति की प्रतिष्ठा का सम्मान करने का प्रोत्साहन देते हैं किन्तु साथ ही साथ, पर्यावरण की भी रक्षा करने का आह्वान करते हैं।

22 अक्टूबर को प्रकाशित एक वक्तव्य में एशियाई काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों के संघ के अध्यक्ष, म्यानमार के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल चार्ल्स बो ने प्रेरितिक यात्रा हेतु संत पापा के चुनाव की सराहना की जिन्होंने उन देशों की यात्रा करने का चुनाव किया है जहाँ काथलिक समुदाय अल्पसंख्यक रूप में हैं।

उन्होंने कहा, "अल्पसंख्यक समुदायों के प्रति उनकी चिंता ने उनकी उपस्थिति को विस्तृत किया है। दो साल पहले उन्होंने ऐसे देशों को चुना था जहाँ ख्रीस्तियों की संख्या अत्यन्त कम है, म्यानमार और बंगलादेश। म्यानमार में ख्रीस्तियों की उपस्थिति 500 साल पुरानी है। उनकी यात्रा ने इस समुदाय को दुनिया के सामने लाया। यह एक महान कृपा थी, एक बड़ा चमत्कार था और अपने छोटे झुण्ड के लिए संत पापा का महान प्रेम।"

थाईलैंड और जापान में संत पापा की प्रेरितिक यात्रा के लिए अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कार्डिनल ने कहा है कि यह प्रेरितिक यात्रा एक कृपा है।

दोनों ही देशों की अपनी गहरी आध्यात्मिक परम्पराएँ हैं। पूर्वी देशों के धर्मों में पोप की दिलचस्पी जग जाहिर है। प्रकृति और वनस्पति के प्रति उनके स्नेह ने उन्हें आमघर की देखभाल पर प्रेरितिक पत्र "लाओदतो सी" प्रकाशित करने हेतु प्रेरित किया है। उन्होंने अमाजोन पर विशेष सिनॉड का आयोजन भी किया है। इन सभी में उन्होंने पूर्व की आध्यात्मिक परंपरा की प्रशंसा की है जो प्रत्येक जीवित प्राणी और पेड़-पौधों जैसी चीजों को ईश्वर की उपस्थिति का हिस्सा मानते हैं।

कार्डिनल ने कहा कि कि जलवायु परिवर्तन एवं गरीबी दो बड़े मुद्दे हैं जिनपर उन्होंने विश्व को वार्ता के लिए प्रोत्साहित किया है।

उन्होंने याद किया कि थाईलैंड और जापान दोनों ही देश जलवायु परिवर्तन के कारण बड़ी-बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। संत पापा को हमेशा लगता है कि धार्मिक परंपराएं मनुष्यों की गरिमा और सृष्टि की अखंडता को बनाए रखने के लिए दृढ़ता से जोर दे सकती हैं। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर उनकी आवाज निश्चय ही सुनी जाएगी।  

कार्डिनल बो ने संत पापा के बारे कहा कि एशिया न्याय के नबी का स्वागत करता है, जो आर्थिक एवं पर्यावरणीय न्याय के नबी हैं। एशिया महान धर्मों और सभ्यताओं का उद्गम स्थल है। उन्होंने कामना की कि संत पापा के साथ यह आध्यात्मिक मुलाकात इन देशों के हरेक व्यक्ति पर कृपाओं की वर्षा करे तथा हमारे महादेश में आशा एवं समृद्धि की नई सुबह हो।

24 October 2019, 16:45