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भोपाल में रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर राखी खरीदती लड़कियाँ भोपाल में रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर राखी खरीदती लड़कियाँ  (ANSA)

भोपाल महाधर्मप्रांत ने रक्षाबंधन पर्व मनाया

महाधर्माध्यक्ष कोर्नेलियो ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे भाई-बहन की तरह एक दूसरे के साथ सहयोग करें ताकि हमारे दिश में विकास लाया जा सके।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

भोपाल, बृहस्पतिवार, 15 अगस्त 2019 (ऊकान)˸ भोपाल महाधर्मप्रांत ने भारत के लाखों लोगों के साथ रक्षाबंधन का त्योहार मनाया, जिसमें बहनों नें अपने भाई की कलाई पर राखी या रक्षाबंधन का सूत्र बांधीं जो प्रेम एवं सम्मान का चिन्ह है।   

रक्षाबंधन पर्व की पूर्व संध्या को कई विद्यार्थियों ने भोपाल के महाधर्माध्यक्ष लेओ कोर्नेलियो की कलाई पर रक्षाबंधन का सूत्र बांधा। इस हिन्दू महोत्सव का आयोजन भोपाल महाधर्मप्रांत की ओर से किया गया था।

रक्षाबंधन का अर्थ

रक्षाबंधन का अर्थ है संबंधों की रक्षा करना। इसके द्वारा भाई-बहन के रिश्ते को मनाया जाता है। यह पूरे भारत तथा नेपाल एवं पाकिस्तान में भी मनाया जाता है।

भोपाल के संत जेवियर स्कूल में एकत्रित लोगों को सम्बोधित करते हुए महाधर्माध्यक्ष ने कहा, "दिन की चमक तब पैदा होती है जब हम एक-दूसरे के चेहरे को देखते हैं और कहते हैं कि हम सभी एक परिवार के भाई-बहन हैं, उससे पहले हम अंधेरे में होते हैं।"

शहर के छः काथलिक विद्यालयों के सैंकड़ों बच्चे रक्षाबंधन मनाने के लिए जमा हुए थे जिसका आयोजन भोपाल महाधर्मप्रांत के प्रवक्ता फादर मरिया स्तेफन ने महाधर्मप्रांत की ओर से किया था।

महाधर्माध्यक्ष ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि देश में विकास लाने के लिए हम भाई-बहन की तरह एक-दूसरे का सहयोग करें।

समानता और न्याय हमारे संविधान की नींव

जब भारत अपनी स्वतंत्रता दिवस मना रही है, महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि "हम ब्रिटिश शासन से 1947 में छुटकारा पाने पर गर्व महसूस करते हैं" किन्तु "हमारी मानसिकता के कारण हम अब भी भाईचारा के साथ जीने के लिए स्वतंत्र नहीं हैं।"  

उन्होंने छात्रों को बताया कि समानता और न्याय हमारे संविधान की नींव है, जिसे हिंसा और अत्याचार को दूर करने के लिए, हमारे माता-पिता और पड़ोसियों को शिक्षित करके सुरक्षित किया जाना चाहिए।

फादर स्तेफन ने उका समाचार से कहा कि महाधर्मप्रांत ने अन्य धर्मों के त्योहारों का जश्न मनाने के लिए एक नीति बना दिया है, क्योंकि इस तरह के संयुक्त उत्सव व्यवहारिक रूप से अंतर-धार्मिक संवाद होते हैं।”

15 August 2019, 16:56