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मिस्र के कॉप्टिक ख्रीस्तीय मिस्र के कॉप्टिक ख्रीस्तीय  (AFP or licensors)

शहीद, "शिकार" नहीं "साक्षी", महाधर्माध्यक्ष अंजेलोस

लंदन के कॉप्टिक ऑर्थोडॉक्स कलीसिया के महाधर्माध्यक्ष अनबा अंजेलोस ने संचार विभाग से जुड़े लोगों से तथा विश्वभर के ख्रीस्तीय समुदायों में हिंसा एवं अत्याचार के विपरीत जागरूकता लाने हेतु दिशानिर्देश दिया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

लंदन, मंगलवार, 9 जुलाई 2019 (रेई)˸ ख्रीस्तीय शहीद जो आस्था पर घृणा के कारण मार डाले जाते हैं वे शिकार नहीं बल्कि साक्षी हैं और मीडिया को चाहिए कि जब वे उनके बारे रिपोर्ट पेश करते हैं तब वे जिम्मेदारी की भावना से उसे पेश करें। लोगों का ध्यान खींचने के लिए वे केवल संवेदनशील भाषा का प्रयोग न करें। उक्त बातें लंदन के कॉप्टिक ऑर्थोडॉक्स कलीसिया के महाधर्माध्यक्ष अनबा अंजेलोस ने संचार विभाग से जुड़े लोगों से तथा विश्वभर के ख्रीस्तीय समुदायों में हिंसा एवं अत्याचार के विपरीत जागरूकता लाने हेतु दिशानिर्देश देते हुए कही।

लंदन के संत मार्गरेट गिरजाघर में 4 जुलाई को मध्यपूर्व के राजदूतावास के वार्षिक सम्मेलन में मध्यपूर्व के कमजोर लोगों एवं समुदायों की सहायता करने वाले ख्रीस्तीय संगठन को सम्बोधित करते हुए महाधर्माध्यक्ष ने कहा, "जब हम उनकी मदद करना चाहते हैं, तब हमें उन्हें देखने की जरूरत है, उनकी पीड़ा पर नजर डालना है न कि अपने आपको देखना है। हमें स्थानीय समुदाय के प्रति प्राथमिकता का मनोभाव नहीं रखना चाहिए। हमें उनका न्याय नहीं करना चाहिए कि उन्हें किस तरह रहना है बल्कि वे जैसे भी हैं वैसे ही उनका सम्मान करना चाहिए। हमें उन्हें सुनना चाहिए। शहीदों को शिकार का दर्जा देना उन्हें चोट पहुँचायेगा, क्योंकि वे अपने आपको एक शिकार के रूप में नहीं देखते बल्कि साक्ष्य के रूप में देखते हैं। हम उनकी दुर्बलता को समझ सकते हैं किन्तु दुर्बलता शिकार बनने से अलग है।"         

महाधर्माध्यक्ष अनबा अंजेलोस ने पत्रकारों का आह्वान किया कि वे सबसे बढ़कर शहीदों एवं अत्याचार की घटनाओं की जानकारी सम्मान पूर्वक उचित तरीके से पेश करें। उन्होंने कहा, "हम सभी मीडिया द्वारा जानकारी प्राप्त करते हैं और यह महत्वपूर्ण है कि मीडिया अत्यचारों के बारे जिम्मेदारी पूर्व बोलें क्योंकि बोलने में असावधानी किसी के जीवन को खतरे में डाल सकता है।"

09 July 2019, 17:21