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बिब्लिकुम के विद्यार्थी बिब्लिकुम के विद्यार्थी 

संवाद का आधार पड़ोसी प्रेम, संत पापा

संत पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार 9 मई को परमधर्मपीठीय बाईबिल संस्थान (बिब्लिकुम) की स्थापना की 110वीं वर्षगाँठ के अवसर पर वहाँ के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से मुलाकात की।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

संत पापा ने उन्हें सम्बोधित कर कहा, "मेरे पूर्वाधिकारी संत पीयुस दसवें ने परमधर्मपीठीय बाईबिल संस्थान की स्थापना सन् 1909 में की थी तथा उसे रोम में धर्मग्रंथ की पढ़ाई में विशिष्ठता हासिल करने के लिए समर्पित किया था।"

उन्होंने कहा कि इन वर्षों में बिब्लिकुम ने अपने मिशन में विश्वस्त रहने के लिए कठिन काम किया है, चुनौतियों के समय में भी इसने विद्वत्तापूर्ण अनुसंधान एवं बाईबिल के अध्ययन में शिक्षा तथा उससे संबंधित क्षेत्रों को प्रोत्साहन दिया है। इस संस्थान में अभी करीब 70 विभिन्न देशों के विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।    

संत पापा ने अपने संदेश में कहा कि हाल के अध्ययन में पाया गया है कि पहले की पीढ़ी की तुलना में फरीसियों के बारे अभी कम जानकारी है। "हम उनके मूल तथा उनकी शिक्षा एवं अभ्यासों से अनभिज्ञ हैं।"

फरीसीः अनुसंधान और जाँच

संत पापा ने कहा कि सम्मेलन में साहित्यिक और ऐतिहासिक प्रश्नों में फरीसियों के बारे में अनुसंधान की जाँच, "इस धार्मिक समुदाय के प्रति साकारात्मक दृष्टिकोण में योगदान करेगी, जबकि इससे असामाजिकता का मुकाबला करने में भी मदद मिलेगी।"

नये व्यवस्थान की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए संत पापा ने गौर किया कि आम बातों में येसु का फरीसियों के साथ कई बहस हुए थे। संत योहन रचित सुसमाचार में हम एक महत्वपूर्ण अवसर को पाते हैं जिसमें येसु निकोदिमुस नामक फरीसी से मुलाकात करते हैं जो यहूदियों के नेता थे। उनसे येसु कहते हैं कि "ईश्वर ने संसार को इतना प्यार किया कि उसने उसके लिए अपने एकलौते पुत्र को अर्पित कर दिया, जिससे जो उस में विश्वास करता है, उसका सर्वनाश न हो, बल्कि अनन्त जीवन प्राप्त करे।" (यो. 3:16) निकोदिमुस ने येसु से बहस की थी और उनकी दफन क्रिया में भी भाग लिया था अतः यह स्पष्ट है कि वे अन्य फरीसियों की तरह रूढ़िवादी नहीं थे।

पड़ोसियों से प्रेम, स्वर्णिम नियम

अपने संदेश में संत पापा ने याद किया कि किस तरह दूसरी शताब्दी के एक प्रसिद्ध रब्बी "रब्बी अकिबा" ने इन शब्दों की ओर इंगित किया था- अपने पड़ोसियों को अपने समान प्यार करने को तोराह का महान सिद्धांत कहा था।

संत पापा ने बतलाया कि अपने पड़ोसियों से प्रेम करना एक स्वर्णिम नियम है जो येसु और उनसे वार्तालाप करने वाले फरीसियों के बीच समानता को पहचानने के लिए एक महत्वपूर्ण चिन्ह का प्रतिनिधित्व करता है।

यह निश्चित रूप से आज भी, यहूदियों और ख्रीस्तियों के बीच किसी भी बातचीत के लिए एक महत्वपूर्ण आधार है।”

संत पापा ने कहा कि अपने पड़ोसियों से प्रेम करने के लिए हमें उन्हें जानने की जरूरत है और उन्हें जानने के लिए हमें पुराने पूर्वाग्रहों से बाहर निकलना है। उन्होंने शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से कहा, "यही कारण है कि आपका सम्मेलन एक पूर्ण और अधिक सटीक समझ पाने के प्रयास में विश्वासों और विषयों को पार करेगी जिससे उन्हें शिक्षण और उपदेश में अधिक उचित रूप से प्रस्तुत करना संभव होगा।”

उन्होंने कहा, "मैं निश्चिंत हूं, कि ये अध्ययन, और जो नए रास्ते खुलेंगे, वे और अधिक गहन और भ्रातृ संवाद के मद्देनजर यहूदियों और ख्रीस्तियों के बीच संबंधों में सकारात्मक योगदान देंगे।"

09 May 2019, 16:40