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बंगलादेश का एक बच्चा लकड़ी ढोये हुए बंगलादेश का एक बच्चा लकड़ी ढोये हुए  (AFP or licensors)

बंगलादेश की कलीसिया बाल सुरक्षा हेतु प्रयासरत

देश में कोई विशेष बाल सुरक्षा कानून नहीं है। सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं कलीसिया के धर्मगुरूओं ने मिलकर एक नीति बनाने का विचार किया है जो ख्रीस्तीय संगठनों के साथ-साथ पूरे देश के लिए एक आदर्श के रूप में काम कर सके। एनजीओ वर्ल्ड विजन की रिपोर्ट है कि देश में 82 प्रतिशत बच्चों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। धर्मबहन के अनुसार उपयुक्त भोजन का अभाव एवं अवकाश न मिलना एक तरह की हिंसा।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

ढाका, मंगलवार, 21 मई 2019 (एशियान्यूज)˸ ढाका में शनिवार को धर्माध्यक्षों, काथलिक विश्वासियों एवं कुछ अन्य संगठनों के लोगों ने एक सभा में भाग लिया जिसमें उन्होंने बच्चों को एक स्वस्थ वातावरण प्रदान किये जाने पर विचार किया ताकि वे परिवार एवं समाज में जी सकें और विकास कर सकें। उन्हें चिकित्सा की उचित सुविधा, आवश्यक, अवकाश एवं पर्याप्त भोजन प्राप्त हो सके।   

सभा के प्रतिभागियों के अनुसार, बाल संरक्षण नीति को परिभाषित करना ईसाई संगठनों के लिए सबसे पहले एक दिशा-निर्देश के रूप में और फिर सामान्य रूप से समाज में एक तत्काल आवश्यकता है।

संत पापा फ्राँसिस बच्चों की सुरक्षा चाहते हैं जिन्होंने कलीसिया में बाल यौन दुराचार को रोकने के लिए वाटिकन में सभा का आह्वान किया था।

ढाका में सभा का आयोजन न्याय एवं शांति के लिए गठित परमधर्मपीठीय समिति एवं बच्चों के कल्याण के लिए कार्य करने वाली गैर-सरकारी संगठन विश्व दर्शन द्वारा आयोजित की गयी थी।

सभा में ढाका के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल पैट्रिक डी रोजारियो के साथ, 4 धर्माध्यक्षों, पुरोहितों, धर्मबहनों एवं कुल 75 काथलिकों ने भाग लिया।

ढाका के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के न्याय एवं शांति आयोग के अध्यक्ष जेर्वास रोजारियो ने कहा, "बांग्लादेश में बड़ी संख्या में बच्चे स्वास्थ्य, पोषण, शैक्षिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण अपने मूल मानवाधिकारों से वंचित हैं।" वे घर पर, कार्यस्थल और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर शारीरिक और मानसिक हिंसा के शिकार होते हैं। यही कारण है कि काथलिक कलीसिया ने बच्चों के लिए एक कुशल एवं सुरक्षित वातावरण तैयार करने का निश्चय किया है तथा यह बंगलादेश के विश्व दर्शन (वॉल्ड विजन) के साथ कार्य करना चाहती है।

बंगलादेश विश्व दर्शन के विकास कार्यक्रम के निदेशक चंदन गोम्स ने कलीसियाई संगठन का स्वागत किया है तथा सहयोग के कुछ क्षेत्रों का सुझाव दिया है।

उन्होंने एशियान्यूज से कहा, "हमने देखा कि मीडिया ने बाल यौन शोषण के कई मामलों की रिपोर्ट दी है। परिणामतः कुछ बच्चे स्कूल जाना नहीं चाहते हैं क्योंकि वे घर से स्कूल तक की दूरी तय करने में भय महसूस करते हैं। इसके प्रकाश में, सरकार को कक्षाओं में एक आचार संहिता को मंजूरी देनी चाहिए।"

चंदन गोम्स ने कहा कि हमारे शोध से पता चलता है कि 82 प्रतिशत बच्चे हिंसा के शिकार हैं और 65 प्रतिशत लड़कियां रिश्तेदारों द्वारा यौन उत्पीड़न की शिकार होती  हैं। बच्चे फूल के समान हैं यदि वे बचपन में चोट खा जायेंगे तब वे उसे जीवन भर नहीं भूल पायेंगे।"

ढाका के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के न्याय एवं शांति आयोग के सचिव फादर लिटोन गोम्स ने कहा कि बंगलादेश के पास बाल सुरक्षा के लिए कोई कानून नहीं है। उन्होंने गौर किया कि कई काथलिक स्कूलों में शिक्षक बच्चों को पीटते हैं। अतः हमें हिंसा को रोकने के लिए रणनीति की आवश्यकता है।

संत जेवियर मिशनरियों द्वारा संचालित ग्रीन हेराल्ड इंटरनेशनल स्कूल की प्रधानाध्यपिका सिस्टर आशा विर्जिनिया गोम्स ने कहा, "धनी परिवारों की लड़कियाँ बतलातीं हैं कि परीक्षाओं में अच्छे अंक नहीं आने पर उन्हें अपने पिता से पिटाई खानी पड़ती है। इस तरह परिवारों में भी उन्हें हिंसा का सामना करना पड़ता है।"

उन्होंने कहा कि कलीसिया द्वारा संचालित कई छात्रावासों में विद्यार्थियों को पर्याप्त भोजन नहीं दिया जाता है और उन्हें अवकाश भी कम मिलता है जो कि एक तरह की हिंसा है। 

21 May 2019, 14:36