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परतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर  (ANSA)

सरकार ख्रीस्तीय संस्थाओं के विदेशी धन की संघीय जांच चाहती है

रांची के महाधर्माध्यक्ष ने झारखंड सरकार पर कलीसिया समुदाय की छवि को खराब करने का प्रयास करने का आरोप लगाया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

भोपाल, मंगलवार,16 अप्रैल 2019 (उकान) : भारत के झारखंड राज्य ने विदेशी दान के कुप्रबंधन की जांच के लिए 31 काथलिक उदार संस्थाओं में संघीय जांच की मांग की है।

13 अप्रैल को मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि हिंदुत्ववादी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली राज्य सरकार को संदेह है कि काथलिक उदार संगठनों को दान में दिए गए धन को अनिर्दिष्ट खर्चों में बदल दिया है और कुछ नियमों का उल्लंघन किया है।

कलीसिया के नेताओं ने राज्य द्वारा लिये गये इस कदम को उन्हें और कलीसिया समुदाय को बदनाम करने का प्रयास करार दिया है।

रांची के महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स टोप्पो ने कहा, 'यह हम पर दबाव डालने और हमारा नाम खराब करने के प्रयास के अलावा कुछ नहीं है।' उन्होंने कहा कि मीडिया से उन्हें पता चला कि सरकार ने संघीय गृह मंत्रालय को 31 ख्रीस्तीय गैर-सरकारी संगठनों की जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का उपयोग करने की सिफारिश की है, उनमें से अधिकांश काथलिक हैं।

महाधर्माध्यक्ष टोप्पो ने इस दावे को खारिज कर दिया कि इन संस्थाओं ने विदेशी धन प्राप्त करने में नियमों का उल्लंघन किया है। उन्होंने उका न्यूज को बताया, “हमने किसी कानून की अवहेलना किये बिना सभी प्रावधानों का पालन किया है। हमारे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है, धन का उपयोग उन उद्देश्यों के लिए किया जाता है जिनके लिए हम उन्हें प्राप्त करते हैं।”

हिंदू समूहों ने ख्रीस्तीय संगठनों पर राज्य में सामाजिक रूप से गरीब आदिवासी और दलित लोगों को धर्मपरिवर्तन करने के प्रयासों में विदेशी धन का उपयोग करने का आरोप लगाया है।

संघीय गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव अनिल मलिक के बाद ख्रीस्तीय धर्मगुरुओं के लिए परेशानी शुरू हुई, पिछले जुलाई को मलिक ने राज्य के मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी को यह कहकर लिखा कि वे "शीघ्रता से" 88 ईसाई-प्रबंधित संगठनों की गतिविधियों में पूछताछ का संचालन करें, जिनपर धर्मांतरण के लिए विदेशी योगदान को खर्च करने का आरोप है ।

राज्य सरकार ने बाद में अपने आपराधिक जांच विभाग को इन संगठनों की जांच करने के लिए कहा।

महाधर्माध्यक्ष टोप्पो ने कहा कि स्थानीय कलीसिया ने राज्य पुलिस को "सभी दस्तावेजों की आपूर्ति" की है और उनकी जांच में सहयोग दिया है। उन्होंने कहा, "हमें कथित उल्लंघन के बारे में आधिकारिक तौर पर जानकारी नहीं दी गई है।" लेकिन मीडिया से आगे की जांच के बारे में पता चला है।

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के महासचिव धर्माध्यक्ष थियोदोर मस्करेन्हास ने कहा, "झारखंड में शांति प्रिय ख्रीस्तीय समुदाय के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि हिंदू समूहों सहित, कम से कम 577 गैर-सरकारी एजेंसियां विदेशी धन प्राप्त कर रही हैं, लेकिन राज्य में केवल 88 ख्रीस्तीय एजेंसियों को लक्ष्य किया गया है। "यह समुदाय को बदनाम करने और गरीबों एवं दलितों के बीच अपने विकासात्मक कार्यों में बाधा डालने की एक अच्छी तरह से की गई साजिश है।

केंद्रीय आदिवासी मोर्चा संगठन के अध्यक्ष अजय टोप्पो ने कहा कि सरकार ख्रीस्तीय समुदाय को निशाना बनाने और सांप्रदायिक घृणा को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा, "ख्रीस्तीय मिशनरी गरीब आदिवासी लोगों को शिक्षित करने में अच्छा काम कर रहे हैं, जबकि यह काम वास्तव में सरकार को करनी चाहिए। एक वास्तविक सरकार को लोगों के कल्याण के बारे में चिंता करनी चाहिए और बाधा पैदा करने के बजाय ऐसी गतिविधियों का समर्थन करना चाहिए।"

16 April 2019, 16:12