खोज

Vatican News
भारतीयों द्वारा श्रीलंका के पीड़ितों को श्रद्धांजलि भारतीयों द्वारा श्रीलंका के पीड़ितों को श्रद्धांजलि  (ANSA)

भोपाल: धार्मिक विभाजन को पाटने हेतु ईस्टर समारोह

श्रीलंका की बमबारी से परेशान मध्य प्रदेश में ख्रीस्तियों ने शांति पर ध्यान दिया, हिंदू, मुस्लिम, सिख एक साथ छुट्टी का आनंद लेते हैं।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

 भोपाल, बुधवार 24 अप्रैल 2019 (उकान) : मध्य भारत के भोपाल शहर में धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस वर्ष ईस्टर मनाने के लिए ख्रीस्तियों ने एक अंतर-धार्मिक सभा का आयोजन किया जिसमें ख्रीस्तियों के साथ हिंदू, मुस्लिम और सिख लगभग 3,000 की संख्या में शामिल हुए।

भोपाल का महाधर्माध्यक्ष लियो कोर्नेलियो रविवार के अंतर-धार्मिक सभा के मुख्य आयोजक थे। उन्होंने कहा, “धार्मिक कट्टरता केवल एक देश तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर में शांति प्रिय लोगों के लिए एक बड़ी चिंता बन गई है।”

एक प्रसिद्ध सिख, ज्ञानी दिलीप सिंह ने कहा कि उन्होंने ईस्टर रविवार को कोलम्बो में तीन गिरजाघरों और कुछ होटलों को निशाना बनाते हुए विस्फोटों की श्रृंखला के बारे में सुना। इस कारण से अंतर-धार्मिक सभा में एक निराशा की लहर फैल गई।

23 अप्रैल को श्रीलंका सरकार ने शोक के दिन के रूप में नामित किया। विस्फोट से  500 से अधिक घायलों के साथ मरने वालों की संख्या 359 तक पहुंच गई और लगभग 40 संदिग्ध गिरफ्तार किए गए।

भोपाल महाधर्मप्रांत के प्रवक्ता फादर मरिया स्टीफन ने कहा “आतंकवादी हमलों की खबर सुनकर, हमने ईस्टर को साधारण रुप में मनाने का फैसला किया।”

महाधर्माध्यक्ष कोर्नेलियो ने ऊकान समाचार को बताया कि राजनेताओं, धर्मगुरुओं नागर अधिकारियों और सामान्य लोगों द्वारा "ईस्टर के हमारे आनंद को साझा करने" के निमंत्रण पर "बड़े उत्साह" के साथ भाग लेते हुए देखकर वे बहुत खुश हुए।

कई लोगों ने कहा कि इस तरह की पहल पूर्वाग्रह को रोकने और विभिन्न धर्मों की शिक्षाओं को बेहतर समझने में मदद करती हैं। उन्होंने मसीह के जीवन और ख्रीस्तियों के इतिहास के बारे प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद भी लिया। येसु के दुखभोग, मृत्यु और पुनरुत्थान को नृत्य-नाटिका द्वारा प्रस्तुत किया गया।

भोपाल के एक पत्रकार संदीप पौराणिक ने कहा, "सभी धर्मगुरुओं को इस तरह के अंतर-धार्मिक मेल-जोल का आयोजन करना चाहिए, ताकि अज्ञानता के अंधेरे को दूर किया जा सके और हमारे विभिन्न धर्मों की बेहतर समझ को प्रज्वलित किया जा सके। इससे बड़ी शांति और सद्भाव पैदा होगा।"

एक मुस्लिम नेता अबुल रहमान फारुकी ने कहा, “भारत जैसे बहु-धार्मिक समाज में, विभिन्न धर्मों और मान्यताओं के लोगों को अपने त्योहारों को एक साथ मनाना चाहिए। अगर हम अपने धर्म को दूसरों के साथ साझा करते हैं तो इससे भाईचारे की भावना बढ़ेगी। हम सभी एक ईश्वर के बच्चे हैं।”

24 April 2019, 15:52